Breaking News

सूरजपुर@ मृत महिला के नाम आवास,एक परिवार को 5 तो कहीं 3 स्वीकृतियां!

Share

  • जिसे छत की सबसे ज्यादा जरूरत,वही सूची से बाहर! बड़सरा में आवास चयन पर उठे सवाल
  • गरीबों की छत पर सवाल : मृत महिला के नाम आवास,एक परिवार को कई-कई स्वीकृतियां
  • प्रधानमंत्री आवास योजना में कथित गड़बड़ी, विधवा-दिव्यांगों को छोड़ा, मृत महिला को मिला आवास!
  • बड़सरा की आवास सूची में बड़ा खेल? मृत महिला के नाम स्वीकृति, एक परिवार को पांच आवास
  • बड़सरा में प्रधानमंत्री आवास की 26 नामों वाली वरीयता सूची पर सवाल,विधवा,दिव्यांग, परित्यक्ता और गंभीर बीमार जरूरतमंदों की अनदेखी का आरोप
  • सामाजिक कार्यकर्ता रक्षेन्द्र प्रताप सिंह ने कलेक्टर से की शिकायत,कलेक्टर ने जांच का दिया आश्वासन


-ओंकार पाण्डेय-
सूरजपुर,28 सितम्बर 2026 (घटती-घटना)।
गरीब परिवारों को पक्की छत उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित प्रधानमंत्री आवास योजना की जमीनी क्रियान्वयन प्रक्रिया को लेकर ग्राम पंचायत बड़सरा में गंभीर सवाल खड़े हुए हैं, विकासखंड भैयाथान की ग्राम पंचायत बड़सरा में प्रधानमंत्री आवास के लिए जारी 26 हितग्राहियों की वरीयता सूची पर सामाजिक कार्यकर्ता रक्षेन्द्र प्रताप सिंह ने कई गंभीर आपत्तियां दर्ज कराते हुए जांच की मांग की है, उनका आरोप है कि सूची तैयार करने में पात्रता और प्राथमिकता के निर्धारित मानकों की अनदेखी की गई है, आरोपों के मुताबिक, करीब पांच वर्ष पहले मृत्यु हो चुकी महिला के नाम पर भी आवास स्वीकृति दी गई है, वहीं एक ही परिवार के कई सदस्यों को आवास का लाभ दिए जाने की बात भी सामने आई है।
शिकायतकर्ता का कहना है कि प्रधानमंत्री आवास योजना का मूल उद्देश्य ऐसे गरीब और जरूरतमंद परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराना है, जिनके पास रहने के लिए पर्याप्त आवासीय सुविधा नहीं है, ऐसे में यदि वास्तविक जरूरतमंद परिवार सूची से बाहर रह जाते हैं और एक ही परिवार के कई सदस्यों को लाभ मिलता है तो पूरी चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
दिव्यांग हितग्राहियों की अनदेखी का आरोप-प्रधानमंत्री आवास योजना में वास्तविक जरूरतमंदों की प्राथमिकता को लेकर भी शिकायत में सवाल उठाए गए हैं,ग्राम पंचायत बड़सरा में दिव्यांगजनों को वरीयता नहीं दिए जाने का आरोप लगाया गया है, शिकायतकर्ता ने जिला दिव्यांग संघ के अध्यक्ष परमेश्वर यादव पिता बिशुन यादव, उमेश कुर्रे पिता जवाहिर कुर्रे,सुशील कुमार पिता बहाल, हरिश्चंद यादव पिता वंश गोपाल यादव,श्याम बाई पिता धर्मजीत और हिना पिता जोगिंदर के नामों का उल्लेख किया है, शिकायत के अनुसार,इन दिव्यांगजनों को अब तक प्रधानमंत्री आवास के लिए चयनित नहीं किया गया है,वहीं इस वर्ष जारी सूची में दिव्यांग श्रेणी से अंगद विश्वकर्मा पिता रामजीत विश्वकर्मा और संजय कुमार पिता बिरजू को वरीयता सूची में शामिल किया गया है, इस स्थिति को लेकर शिकायतकर्ता का सवाल है कि ग्राम पंचायत में मौजूद अन्य दिव्यांग और जरूरतमंद परिवारों के मामलों का परीक्षण किस आधार पर किया गया और उन्हें सूची में स्थान क्यों नहीं मिला।
विधवा महिलाओं की लंबी सूची, फिर भी आवास से वंचित होने का दावा- ग्राम पंचायत बड़सरा में विधवा महिलाओं को आवास की प्राथमिकता नहीं मिलने का आरोप भी शिकायत का प्रमुख हिस्सा है, शिकायतकर्ता ने बड़ी संख्या में विधवा महिलाओं के नाम प्रशासन के सामने रखे हैं, इनमें फूल कुमारी बेवा पन्ना लाल चक्रधारी,कौशल्या बेवा रामप्रसाद,अनीता प्रजापति बेवा रमेश,धनेश्वरी बेवा सीताराम, रुकमनिया बेवा भैयालाल चक्रधारी, राजकुमारी बेवा रामरूप, रजमतिया बेवा मुकुंद, मईया बेवा शिवचरण, मुन्नी बाई बेवा हिरासाय, सोनमती बेवा संजय साहू, संतोषी बेवा शेषमन सिंह, सुखमनिया बेवा रामसिंह और सरोज बेवा रामदुलारे यादव के नाम शामिल हैं, इसके अलावा बच्ची बाई बेवा रामचरण कुशवाहा, शिवचरणी बेवा रामनारायण, जगमन बाई बेवा उदराज, ग्राम पंचायत की पूर्व सरपंच प्रेम बाई बेवा धनी सिंह, बसंती यादव बेवा रामचरण, बिंदु बेवा धवर साय, इंदु गोस्वामी बेवा रामसुभग, फूलमती यादव बेवा रामदास, सुनीता बेवा राम सुंदर सिंह, ऊषा सिंह बेवा सुरेन्द्र प्रताप सिंह और रजवंती बेवा मनोहर यादव सहित अन्य महिलाओं का भी शिकायत में उल्लेख किया गया है, शिकायतकर्ता ने देवकुमारी बेवा जीवन लाल, सीमा पाण्डेय बेवा तारकेश्वर, बिरहुल बेवा बहाल, हीरोदिया बाई बेवा बाल साय चंदे, भगमत बेवा राम साय, हुलासो बेवा रामसाय, बुधनी बेवा गोविंद, सोनमती बेवा जगरनाथ, सुमरिया बेवा चंद्रिका और इंद्रासो बेवा सुरदयाल के नाम भी बताए हैं, वहीं शिकायत में कहा गया है कि कैलाश्वती बेवा भागीरथी को आवास प्रदान किया गया है, ऐसे में सवाल उठाया गया है कि जब पंचायत में बड़ी संख्या में विधवा महिलाएं आवास की जरूरत में हैं तो वरीयता सूची तैयार करते समय अन्य विधवा महिलाओं को किस आधार पर पीछे रखा गया।
परित्यक्ता महिलाओं के मामले में भी सवाल- शिकायत में परित्यक्ता महिलाओं को भी प्रधानमंत्री आवास की सूची में स्थान नहीं दिए जाने का आरोप लगाया गया है, सामाजिक कार्यकर्ता ने दुर्गावती कुर्रे पिता तिवारी और कलेसिया पिता रामा अगरिया का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों को भी वरीयता सूची में स्थान नहीं मिला, ऐसे में सवाल यह है कि पंचायत स्तर पर आवास की पात्रता और प्राथमिकता निर्धारित करते समय महिलाओं की सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति का आकलन किस प्रकार किया गया।
गंभीर रूप से बीमार लोगों को भी नहीं मिली प्राथमिकता- शिकायत में गंभीर रूप से बीमार बताए गए लोगों का मामला भी उठाया गया है, रक्षेन्द्र प्रताप सिंह के अनुसार मकसूदन यादव पिता स्व. रामदास, रामकेश्वर साहू पिता रामजतन और अमलेश्वर पिता रूपचंद को भी प्रधानमंत्री आवास की वरीयता सूची में स्थान नहीं दिया गया, शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि वास्तव में ये परिवार गंभीर आर्थिक संकट और बीमारी से जूझ रहे हैं तो उनके मामलों की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए तथा यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि पात्रता के बावजूद उन्हें सूची में स्थान क्यों नहीं मिला।
सवाल सिर्फ सूची का नहीं,चयन प्रक्रिया का है- बड़सरा की इस शिकायत ने प्रधानमंत्री आवास योजना की वरीयता सूची तैयार करने की पूरी प्रक्रिया को सवालों के घेरे में ला दिया है, मामला केवल इस बात तक सीमित नहीं है कि किसका नाम सूची में है और किसका नहीं, बड़ा सवाल यह है कि हितग्राहियों की पात्रता का सत्यापन किस स्तर पर किया गया? यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु कई वर्ष पहले हो चुकी है और फिर भी उसके नाम पर आवास स्वीकृत हुआ है तो सत्यापन प्रक्रिया की जांच जरूरी है, इसी तरह यदि एक ही परिवार के कई सदस्यों को आवास स्वीकृत किया गया है तो उनके अलग-अलग परिवार होने अथवा योजना की पात्रता पूरी करने से संबंधित दस्तावेजों की जांच भी आवश्यक होगी, इसके साथ ही पंचायत में मौजूद दिव्यांग, विधवा, परित्यक्ता और गंभीर रूप से बीमार बताए गए लोगों की पात्रता तथा उनके आवासीय स्थिति का भी भौतिक सत्यापन किए जाने की मांग उठ रही है।
कलेक्टर के सामने पहुंचा मामला- मामला ग्राम पंचायत स्तर से निकलकर अब जिला प्रशासन तक पहुंच गया है, शिकायतकर्ता रक्षेन्द्र प्रताप सिंह ने ग्राम पंचायत बस्कर के डालाबहरा में आयोजित कार्यक्रम के दौरान कलेक्टर रेना जमील के समक्ष इस मामले को रखा, शिकायतकर्ता के अनुसार, कलेक्टर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच कराने की बात कही है, अब प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी वास्तविकता है और वरीयता सूची तैयार करने में निर्धारित प्रक्रिया का पालन हुआ या नहीं।
जांच में इन बिंदुओं पर स्पष्टता जरूरी- बड़सरा मामले में यदि प्रशासन निष्पक्ष जांच करता है तो कई बिंदुओं की जांच महत्वपूर्ण होगी मृत महिला के नाम आवास स्वीकृति का आरोप सही है या नहीं, संबंधित हितग्राहियों का भौतिक सत्यापन कब और किसके द्वारा किया गया, एक ही परिवार के कई सदस्यों को आवास मिलने की स्थिति में उनके अलग-अलग पात्र परिवार होने का आधार क्या है, जिन परिवारों को पूर्व में आवास मिल चुका है, उनके अन्य सदस्यों को दोबारा लाभ दिए जाने का आधार क्या है, विधवा महिलाओं की पात्रता और उनकी आवासीय स्थिति का सर्वे किस आधार पर हुआ, दिव्यांग हितग्राहियों के नाम वरीयता सूची में शामिल नहीं किए जाने का कारण क्या है, परित्यक्ता महिलाओं और गंभीर रूप से बीमार बताए गए लोगों की पात्रता का परीक्षण किया गया या नहीं, 26 हितग्राहियों की सूची तैयार करने के दौरान ग्राम पंचायत स्तर पर कौन-कौन से दस्तावेज और सत्यापन प्रक्रिया अपनाई गई।
अब जांच रिपोर्ट पर टिकी नजर- प्रधानमंत्री आवास योजना सीधे गरीब परिवारों के जीवन से जुड़ी योजना है, इसलिए पात्रता सूची में कथित गड़बड़ी की शिकायत सामने आने के बाद सबसे महत्वपूर्ण भूमिका जांच की है, यदि आरोप गलत हैं तो जांच से स्थिति स्पष्ट होगी और यदि अनियमितता पाई जाती है तो जिम्मेदारी भी तय की जा सकती है, फिलहाल बड़सरा की 26 हितग्राहियों वाली सूची को लेकर उठे सवालों का जवाब प्रशासनिक जांच के बाद ही सामने आएगा, शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है, इसलिए मामले में जांच के निष्कर्ष और संबंधित पंचायत/विभाग का पक्ष सामने आना महत्वपूर्ण रहेगा।
26 नामों की सूची ने खड़े किए कई सवाल
सामाजिक कार्यकर्ता रक्षेन्द्र प्रताप सिंह ने बताया कि ग्राम पंचायत बड़सरा में प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए जारी वरीयता सूची में कुल 26 नाम शामिल किए गए हैं,इसी सूची के परीक्षण के दौरान कथित तौर पर कई ऐसी विसंगतियां सामने आईं, जिनके आधार पर उन्होंने प्रशासन से जांच की मांग की है,उनके अनुसार,सूची में एक ऐसी महिला का नाम भी शामिल है,जिसकी लगभग पांच वर्ष पहले मृत्यु हो चुकी है,आरोप है कि इसके बावजूद मृत महिला के नाम पर प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत कर दिया गया, यदि शिकायत में लगाए गए इस आरोप की जांच में पुष्टि होती है तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि हितग्राही का भौतिक सत्यापन,परिवार की वर्तमान स्थिति और दस्तावेजों का परीक्षण किस स्तर पर किया गया।
एक परिवार को 5,दूसरे को 3 आवास का आरोप
शिकायत में केवल मृत महिला के नाम आवास स्वीकृति का मामला ही नहीं है, रक्षेन्द्र प्रताप सिंह ने आरोप लगाया है कि एक ही परिवार के पांच सदस्यों को आवास का लाभ दिए जाने की स्थिति सामने आई है,वहीं एक अन्य परिवार में तीन सदस्यों को आवास की स्वीकृति दिए जाने की बात कही गई है,सबसे महत्वपूर्ण सवाल उस मामले को लेकर उठाया गया है,जहां शिकायतकर्ता के अनुसार परिवार के पति को पहले ही प्रधानमंत्री आवास का लाभ मिल चुका है,इसके बावजूद पत्नी के नाम पर भी आवास स्वीकृत कर दिया गया, यह आरोप यदि जांच में सही पाया जाता है तो यह देखना जरूरी होगा कि अलग-अलग हितग्राहियों की पारिवारिक स्थिति का सत्यापन किस आधार पर किया गया और एक ही परिवार के सदस्यों को अलग-अलग आवास के लिए पात्र कैसे माना गया।


Share

Check Also

रायपुर@ भूपेश बघेल की पाटन चुनाव याचिका सुप्रीम कोर्ट में स्वीकार

Share हाईकोर्ट को प्रारंभिक स्तर पर सुनवाई करने के निर्देश,पहले खारिज हुआ था आवेदनरायपुर,28 सितम्बर …

Leave a Reply