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अम्बिकापुर@ सास-बहू,पति-पत्नी ने साथ दी महापरीक्षा,60 पार की महिलाओं ने भी दिखाई सीखने की ललक

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सरगुजा में 4198 नवसाक्षरों ने दी परीक्षा;247 केंद्रों पर हुआ आयोजन,केंद्रीय जेल के 96 बंदी भी हुए शामिल
-संवाददाता-
अम्बिकापुर,27 सितम्बर 2026(घटती-घटना)।
उम्र की कोई सीमा नहीं होती और सीखने की कोई उम्र नहीं होती—सरगुजा में रविवार को आयोजित राज्यव्यापी महापरीक्षा में इसका जीवंत उदाहरण देखने को मिला। कहीं सास और बहू एक साथ परीक्षा देने पहुंचीं तो कहीं पति-पत्नी ने एक ही केंद्र में बैठकर अक्षर ज्ञान की परीक्षा दी। 60 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं ने भी पूरे उत्साह के साथ परीक्षा दी। कई महिलाएं अपने छोटे बच्चों को साथ लेकर परीक्षा केंद्र पहुंचीं। उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत जिले के 247 परीक्षा केंद्रों में आयोजित महापरीक्षा में कुल 4198 नवसाक्षर शिक्षार्थी शामिल हुए। परीक्षा के लिए जिले में 4306 परीक्षार्थियों का लक्ष्य रखा गया था। सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक आयोजित परीक्षा की जिला, विकासखंड और ग्राम पंचायत स्तर पर निगरानी की गई।
गांवों में परीक्षा का माहौल उत्सव जैसा रहा : महापरीक्षा को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में खासा उत्साह नजर आया। एक ही परिवार के कई सदस्य साथ परीक्षा देने पहुंचे। सास-बहू, पति-पत्नी और देवरानी-जेठानी के साथ दिव्यांगजनों ने भी परीक्षा में सहभागिता की। उम्रदराज महिलाओं की मौजूदगी ने इस अभियान को अलग पहचान दी। इनमें ऐसे लोग भी शामिल रहे, जो कभी स्कूल नहीं जा सके या शुरुआती कक्षाओं के बाद पढ़ाई छोड़ चुके थे। साक्षरता कक्षाओं के माध्यम से पढ़ना-लिखना सीखने के बाद इन नवसाक्षरों ने अब परीक्षा देकर अपनी सीख को परखा।
जेल में भी लगी परीक्षा, 96 बंदियों ने लिखी अपनी नई शुरुआत : केंद्रीय जेल अम्बिकापुर में भी महापरीक्षा के लिए विशेष केंद्र बनाया गया था। यहां 35 महिला और 61 पुरुष बंदियों समेत कुल 96 नवसाक्षर बंदी परीक्षा में शामिल हुए। केंद्रीय जेल की वरिष्ठ परिवीक्षा एवं कल्याण अधिकारी वाणी मुखर्जी के अनुसार बंदियों को भी साक्षरता अभियान से जोड़ा गया है। परीक्षा में उनकी सहभागिता यह बताती है कि शिक्षा का अवसर जेल की दीवारों के भीतर भी पहुंच सकता है।
राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय अधिकारियों ने देखी व्यवस्था : भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के उप सचिव चरणजीत सिंह तनेजा समेत समग्र शिक्षा छत्तीसगढ़ और राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण के अधिकारियों ने केंद्रीय जेल स्थित परीक्षा केंद्र का निरीक्षण किया। इसके अलावा राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय दल ने अम्बिकापुर विकासखंड के कोटेया, टपरकेला तथा मैनपाट के अवराडांड स्थित उल्लास परीक्षा केंद्रों का भी जायजा लिया। दल ने कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय अम्बिकापुर का भी अवलोकन किया। अधिकारियों ने परीक्षा व्यवस्था देखने के साथ नवसाक्षर शिक्षार्थियों से बातचीत कर उनका उत्साह बढ़ाया।
15 वर्ष से अधिक उम्र के शिक्षार्थी परीक्षा में शामिल : जिला परियोजना अधिकारी गिरीश गुप्ता ने बताया कि परीक्षा में 15 वर्ष से अधिक आयु के ऐसे शिक्षार्थियों को शामिल किया गया, जो शिक्षा की मुख्यधारा से बाहर रह गए थे अथवा प्रारंभिक स्तर पर ही स्कूल छोड़ चुके थे। साक्षरता कक्षाओं में उल्लास प्रवेशिका के सात पाठ या 200 घंटे की पढ़ाई पूरी करने वाले नवसाक्षरों को भी परीक्षा में शामिल किया गया।
अधिकारियों ने अलग-अलग केंद्रों पर की मॉनिटरिंग
महापरीक्षा के दौरान जिले के विभिन्न विकासखंडों में अधिकारियों ने परीक्षा केंद्रों का निरीक्षण किया। जिला शिक्षा अधिकारी डॉ. दिनेश कुमार झा ने उदयपुर के सुखरीभण्डार और कुमदेवा केंद्रों का निरीक्षण किया। डाइट प्राचार्य केसी गुप्ता ने बतौली,जिला मिशन समन्वयक सर्वजीत पाठक ने लखनपुर,सहायक संचालक शिक्षा रविशंकर तिवारी ने उदयपुर और सहायक संचालक शिक्षा पूनम पाण्डेय ने लुण्ड्रा में मॉनिटरिंग की। मैनपाट में सहायक जिला परियोजना अधिकारी सुनील तिवारी तथा अम्बिकापुर में सहायक परियोजना समन्वयक करुणेश श्रीवास्तव ने परीक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। कलेक्टर अजीत वसंत के मार्गदर्शन और जिला पंचायत सीईओ रोमा श्रीवास्तव के नेतृत्व में आयोजित अभियान के सफल संचालन में जन शिक्षण संस्थान, जिला एवं विकासखंड शिक्षा विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों तथा संकुल शैक्षिक समन्वयकों का सहयोग रहा। कंट्रोल रूम से परीक्षार्थियों की जानकारी राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण को भेजी जाती रही। महापरीक्षा के आंकड़े भले 4198 परीक्षार्थियों के हों, लेकिन इसके पीछे उन लोगों की कहानी है, जिन्होंने उम्र, परिस्थितियों और बीते समय की परवाह किए बिना दोबारा पढ़ना-लिखना सीखने का फैसला किया।


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