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बलरामपुर@ कलेक्टर का आदेश भारी,शासन के निर्देश हल्के…

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कुसमी जनपद में फिर पशु चिकित्सक को मुख्य कार्यपालन अधिकारी का प्रभार, डेढ़ महीने में तीन बार बदला प्रभार, प्रशासनिक स्थिरता पर सवाल
सुदामा राजवाड़े
बलरामपुर,27 सितम्बर 2026 (घटती-घटना)।
जनपद पंचायत कुसमी में मुख्य कार्यपालन अधिकारी (मुख्य कार्यपालन अधिकारी) के पद को लेकर प्रशासनिक व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। शासन स्तर से पशु चिकित्सकों को गैर-विभागीय दायित्वों से मुक्त रखने के निर्देशों के बावजूद कुसमी जनपद की कमान फिर पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारी को सौंप दी गई है। कलेक्टर कार्यालय से जारी आदेश के अनुसार अतिरिक्त उप संचालक, पशु चिकित्सा सेवाएं शंकरगढ़ डॉ. महेन्द्र सिंह मरकाम को उनके मूल दायित्वों के साथ जनपद पंचायत कुसमी के प्रभारी मुख्य कार्यपालन अधिकारी का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब पशु चिकित्सकों को गैर-विभागीय काम से दूर रखने के निर्देश पहले से मौजूद हैं, तो उसी व्यवस्था के विपरीत नया आदेश क्यों जारी किया गया? यही नहीं, महज डेढ़ महीने के भीतर मुख्य कार्यपालन अधिकारी का प्रभार तीन बार बदले जाने से प्रशासनिक स्थिरता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
शासन का निर्देश फिर भी पशु चिकित्सक के पास जनपद की कमान : संचालनालय पशु चिकित्सा सेवाएं, छत्तीसगढ़ के पूर्व आदेश क्रमांक 1633/स्थापना-अ/जी-68/2017-18 में पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञों को गैर-विभागीय दायित्वों से मुक्त कर मूल विभागीय कार्यों में वापस भेजने के निर्देश दिए गए थे। बताया जाता है कि कृषि मंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में भी पशु चिकित्सकों से गैर-चिकित्सकीय एवं गैर-विभागीय कार्य लिए जाने पर नाराजगी जताई गई थी। इसके बावजूद कुसमी में पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारी को ही जनपद पंचायत जैसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक संस्थान का अतिरिक्त प्रभार सौंपा जाना प्रशासनिक फैसले की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़ा करता है। सवाल यह भी है कि यदि विभागीय अधिकारियों को गैर-विभागीय दायित्वों से मुक्त रखने की नीति है, तो स्थानीय स्तर पर उसके विपरीत व्यवस्था बनाने की जरूरत क्यों पड़ी?
डेढ़ महीने में तीन बार प्रभार बदला,आखिर स्थायी मुख्य कार्यपालन अधिकारी क्यों नहीं?
कुसमी जनपद में मुख्य कार्यपालन अधिकारी पद को लेकर जिस तरह लगातार बदलाव हो रहे हैं, उससे प्रशासनिक कामकाज प्रभावित होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। अधिकारी बदलने के साथ योजनाओं, पंचायतों और विकास कार्यों की निगरानी की जिम्मेदारी भी बदलती है। ऐसे में बार-बार प्रभार बदलना व्यवस्था की निरंतरता के लिहाज से गंभीर विषय है।
डेढ़ महीने में तीन बार प्रभार बदलने की नौबत क्यों आई?
क्या प्रशासन के पास इस महत्वपूर्ण पद के लिए नियमित अधिकारी उपलब्ध नहीं है? यदि उपलब्ध है तो स्थायी पदस्थापना क्यों नहीं की जा रही?
मंत्री-विधायक की खींचतान की चर्चा,प्रशासन मौन
कुसमी में मुख्य कार्यपालन अधिकारी पद को लेकर हो रहे बदलावों के पीछे राजनीतिक खींचतान की चर्चाएं भी स्थानीय स्तर पर जोर पकड़ रही हैं। राजनीतिक सूत्रों और जानकारों के अनुसार सत्ता पक्ष के एक प्रभावशाली मंत्री और क्षेत्रीय विधायक के बीच कथित मतभेदों का असर प्रशासनिक नियुक्तियों पर पड़ने की चर्चा है। हालांकि इन चर्चाओं की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्षों की ओर से ऐसा कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। फिर भी जिस तेजी से प्रभार बदले गए हैं, उससे इन चर्चाओं को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। यदि नियुक्तियां पूरी तरह प्रशासनिक जरूरत के आधार पर हुई हैं तो प्रशासन को इसकी वजह सार्वजनिक करने में क्या आपत्ति है?
पहले भी पशु चिकित्सक के पास रही है जनपद की कमान
कुसमी जनपद में पशु चिकित्सक को मुख्य कार्यपालन अधिकारी का प्रभार दिए जाने का यह पहला मामला नहीं बताया जा रहा है। इससे पहले भी लंबे समय तक पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारी के पास जनपद की जिम्मेदारी रही है। स्थानीय स्तर पर उस अवधि के दौरान विभिन्न ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों को लेकर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की शिकायतें सामने आने की बात कही जाती रही है। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि संबंधित जांच या सक्षम प्राधिकारी के निष्कर्षों से ही हो सकती है। ऐसे में दोबारा इसी तरह की व्यवस्था बनने से ग्रामीण विकास कार्यों की निगरानी और पारदर्शिता को लेकर सवाल उठना लाजिमी है।
मौजूदा प्रभारी बोले- आदेश की जानकारी है,अभी प्रभार नहीं सौंपा
मामले में वर्तमान प्रभारी मुख्य कार्यपालन अधिकारी से जानकारी लेने पर उन्होंने बताया कि नए मुख्य कार्यपालन अधिकारी की नियुक्ति संबंधी आदेश की जानकारी उन्हें मिली है,लेकिन अभी तक उन्होंने प्रभार नहीं सौंपा है। आगे की स्थिति शासन और प्रशासन के स्तर पर तय होगी।
अब सवाल आदेश से ज्यादा व्यवस्था पर
कुसमी का मामला केवल एक अधिकारी को अतिरिक्त प्रभार देने तक सीमित नहीं है। असल सवाल प्रशासनिक व्यवस्था की स्थिरता और शासन के निर्देशों के पालन का है। यदि पशु चिकित्सकों को गैर-विभागीय दायित्वों से मुक्त रखने का निर्देश है,तो कुसमी में उसका पालन क्यों नहीं हुआ? यदि यह नियुक्ति नियमों के अनुरूप है तो उसका आधार क्या है? और यदि प्रशासन को तत्काल व्यवस्था चलाने के लिए अतिरिक्त प्रभार देना ही था, तो स्थायी मुख्य कार्यपालन अधिकारी की नियुक्ति कब होगी? बार-बार बदलते प्रभार के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि कुसमी जनपद में प्रशासन चलेगा या फिर प्रभार बदलने का सिलसिला ही चलता रहेगा? अब नजर इस बात पर है कि शासन स्तर पर इस नियुक्ति और पशु चिकित्सक को गैर-विभागीय प्रभार दिए जाने के मामले में कोई स्पष्टीकरण या पुनर्विचार होता है या नहीं।


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