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सूरजपुर@ सुपरमैन’ रंजीत गुप्ता फिर मैदान में,नकली ढक्कनों और रैपरों का खेल उजागर

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सूरजपुर में 12 लीटर मिलावटी शराब के साथ 2500 नकली ढक्कन और 200 रैपर जब्त,आरोपी भेजा गया जेल
-संवाददाता-
सूरजपुर,26 सितम्बर 2026 (घटती-घटना)
। शराब के नाम पर लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ संभागीय आबकारी उड़नदस्ता ने सूरजपुर जिले में बड़ी कार्रवाई की है। सहायक जिला आबकारी अधिकारी ‘सुपरमैन’ रंजीत गुप्ता के नेतृत्व में कुमदा बस्ती में दबिश देकर कथित रूप से मिलावटी शराब तैयार करने और उसे ब्रांडेड शराब की बोतलों में भरने का मामला पकड़ा गया। कार्रवाई के दौरान टीम ने करीब 12 लीटर मिलावटी शराब, 2500 नग विभिन्न ब्रांड के ढक्कन, 200 नग नकली लेबल/रैपर और बड़ी संख्या में खाली शीशियां जब्त की हैं। आबकारी विभाग के अनुसार 25 सितंबर की शाम उड़नदस्ता टीम सूरजपुर जिले में गश्त पर थी। कुमदा चौक के पास मुखबिर से सूचना मिली कि कुमदा बस्ती निवासी चंद्रप्रकाश राजवाड़े अपने घर से शराब में मिलावट कर उसे बेच रहा है। सूचना के आधार पर टीम ने उसके घर दबिश दी। तलाशी के दौरान एक कमरे में बड़ी संख्या में शराब की बोतलों के ढक्कन, लेबल, खाली शीशियां और शराब मिली। सबसे गंभीर बात यह सामने आई कि अलग-अलग ब्रांड के नाम वाले ढक्कन और रैपर के साथ मैकडॉवेल नंबर वन,रॉयल स्टैग, गोवा और इंपीरियल ब्लू जैसी ब्रांडेड शराब की शीशियों में कथित मिलावटी शराब भरी हुई मिली। बरामद सामग्री को देखकर मामला केवल अवैध शराब रखने तक सीमित नहीं, बल्कि ब्रांडेड शराब की पैकिंग का इस्तेमाल कर मिलावटी शराब को असली बताकर खपाने की आशंका से भी जुड़ता दिखाई देता है।
‘सुपरमैन’ की टीम ने फिर पकड़ा मिलावट का खेल : सहायक जिला आबकारी अधिकारी सुपरमैन रंजीत गुप्ता के नेतृत्व में उड़नदस्ता टीम की शराब और नशीले पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई पहले भी सामने आती रही है। मई 2025 में मठपारा में तीन लोगों से महुआ शराब और बड़ी मात्रा में महुआ लाहन जब्त कर उन्हें जेल भेजने की कार्रवाई रिपोर्ट हुई थी। सूरजपुर में जनवरी 2025 में इससे भी मिलता-जुलता मामला सामने आया था। उस समय उक्त के नेतृत्व वाली टीम ने प्रतापपुर की विदेशी मदिरा दुकान से कथित मिलावटी शराब के साथ बड़ी संख्या में खाली बोतलें,लेबल और हजारों ढक्कन बरामद किए थे। यानी सवाल सिर्फ एक आरोपी की गिरफ्तारी का नहीं है। एक साल से अधिक समय बाद भी अगर इसी तरह नकली ढक्कन,रैपर और खाली बोतलों के जरिए मिलावटी शराब तैयार करने का खेल सामने आ रहा है तो आखिर इस कारोबार की जड़ें कितनी गहरी हैं?
2500 ढक्कन और 200 रैपर… सवाल सिर्फ 12 लीटर शराब का नहींः मामले में बरामद 12 लीटर मिलावटी शराब की मात्रा से ज्यादा ध्यान खींचने वाली सामग्री है—2500 ढक्कन और करीब 200 रैपर। इतनी बड़ी संख्या में पैकिंग सामग्री का मिलना इस बात की जांच की जरूरत पैदा करता है कि यह सामग्री आरोपी तक कहां से पहुंची और क्या इसके पीछे कोई बड़ा सप्लाई नेटवर्क है। यदि जांच केवल आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेजने तक सीमित रहती है तो असली सवाल अधूरा रह जाएगा। यह पता लगाना भी जरूरी होगा कि नकली ढक्कन और रैपर कहां से खरीदे गए, खाली बोतलें कहां से आईं और तैयार माल किन इलाकों में खपाया जाना था।
पुराने मामले के बाद फिर वही कहानी : आबकारी विभाग की कार्रवाई यह जरूर बताती है कि उड़नदस्ता टीम को सूचना मिली और उसने तत्काल दबिश देकर कथित मिलावटखोरी पकड़ी। लेकिन दूसरी तरफ पुराने मामलों को देखते हुए यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि क्या गिरफ्तारियों के बावजूद ऐसे नेटवर्क पूरी तरह समाप्त हो पा रहे हैं? जनवरी 2025 के प्रतापपुर मामले में भी बड़ी संख्या में खाली बोतल, रैपर और ढक्कन बरामद हुए थे। अब सितंबर 2026 में कुमदा बस्ती में फिर लगभग 2500 ढक्कन और 200 रैपर मिलना बताता है कि नकली पैकिंग के जरिए शराब में मिलावट का खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। मध्यप्रदेश में मिलावटी शराब से मौतों की घटनाओं के बाद छत्तीसगढ़ आबकारी विभाग ने अवैध शराब के खिलाफ सख्ती के निर्देश दिए हैं। ऐसे में इस तरह की कार्रवाई जरूरी भी है, लेकिन कार्रवाई की असली सफलता केवल कितने आरोपी जेल गए,इससे नहीं बल्कि यह पता चलने से होगी कि नकली शराब बनाने और खपाने वाली पूरी कड़ी कहां से संचालित हो रही है। आबकारी विभाग ने आरोपी चंद्रप्रकाश राजवाड़े के खिलाफ आबकारी अधिनियम की धारा 34(1),34(2),38(क) और 59(क) के तहत कार्रवाई करते हुए 26 सितंबर को न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेजे जाने की कार्रवाई की गई। कार्रवाई में आबकारी उपनिरीक्षक टी.आर. केहरी,सहायक उपनिरीक्षक रमेश दुबे,प्रधान आबकारी आरक्षक अशोक सोनी,नगर सैनिक रोहित सोनवानी सहित अन्य कर्मचारियों की भूमिका बताई गई है।अब निगाह इस बात पर रहेगी कि ‘सुपरमैन’ रंजीत गुप्ता की यह कार्रवाई सिर्फ एक कमरे तक सीमित रहती है या 2500 ढक्कनों के पीछे छिपे संभावित नेटवर्क तक भी जांच पहुंचती है।


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