शिकायत में 20 से 25 हजार रुपये लेकर फर्जी बीटीसी तैयार कराने का दावा
12 दिन के बीटीसी पर काम कराने और 48 दिन के अनुभव की शर्त दरकिनार करने का आरोप,निष्पक्ष जांच की मांग
-संवाददाता-
पटना/पांडवपारा,25 सितम्बर 2026 (घटती-घटना)। झिलमिली सह क्षेत्र के पांडवपारा खदान में मजदूरों से जुड़े दस्तावेजों और रिप्लेसर के रूप में काम कराने की व्यवस्था को लेकर गंभीर शिकायत सामने आई है, 25 सितंबर 2026 को की गई लिखित शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कुछ मजदूरों को कथित तौर पर केवल 12 दिन के बीटीसी के आधार पर रिप्लेसर के रूप में काम में लगाया जा रहा है, जबकि संबंधित कार्य के लिए 48 दिन के रिकॉर्ड/अनुभव की आवश्यकता बताई गई है, शिकायतकर्ताओं ने आरोपों की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक दस्तावेजों के आधार पर कार्रवाई की मांग की है। शिकायत में संबंधित सब एरिया प्रबंधन को संबोधित करते हुए कहा गया है कि पांडवपारा कोलरी खदान में कार्यरत मजदूरों की जानकारी के अनुसार कुछ लोगों को कम अवधि के बीटीसी के आधार पर रिप्लेसर के रूप में काम में लगाया जा रहा है, शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ लोगों द्वारा पैसे लेकर कथित तौर पर फर्जी बीटीसी तैयार कराए जाने और उसके आधार पर काम दिलाए जाने की व्यवस्था चल रही है।
12 दिन के बीटीसी पर रिप्लेसर बनाने का आरोप
शिकायत में कहा गया है कि कुछ मजदूरों को केवल 12 दिन के बीटीसी के आधार पर रिप्लेसर के रूप में काम कराया जा रहा है, जबकि काम के लिए 48 दिन का रिकॉर्ड अथवा अनुभव मांगा जाता है,शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि यदि यह व्यवस्था सही पाई जाती है तो इससे निर्धारित प्रक्रिया और पात्रता संबंधी नियमों के पालन पर सवाल खड़े होते हैं, शिकायत में इस बात की भी जांच की मांग की गई है कि जिन मजदूरों को रिप्लेसर के रूप में काम में लगाया गया है, उनके बीटीसी दस्तावेज वास्तविक हैं या नहीं और उनमें दर्ज प्रशिक्षण अथवा कार्य दिवसों का रिकॉर्ड किस आधार पर तैयार किया गया।
20 से 25 हजार रुपये लेकर फर्जी बीटीसी बनाने का दावा
शिकायत का सबसे गंभीर हिस्सा कथित रूप से 20 हजार से 25 हजार रुपये लिए जाने से जुड़ा है, शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि कुछ लोगों से पैसे लेकर फर्जी बीटीसी तैयार कराया जा रहा है और बाद में ऐसे दस्तावेजों को मान्य मानकर संबंधित व्यक्तियों को काम में लगाया जा रहा है, हालांकि,यह आरोप फिलहाल शिकायत में लगाए गए दावों तक सीमित हैं,दस्तावेज में किसी कथित लेनदेन की स्वतंत्र पुष्टि अथवा जांच रिपोर्ट का उल्लेख नहीं है, इसलिए वास्तविक स्थिति सामने लाने के लिए बीटीसी जारी करने वाले रिकॉर्ड,प्रशिक्षण अवधि,भुगतान संबंधी दस्तावेज और रिप्लेसर ड्यूटी से जुड़े अभिलेखों की जांच आवश्यक होगी।
एक ही व्यक्ति से 12-12 दिन काम कराने का आरोप
शिकायत में यह भी कहा गया है कि कथित रूप से ऐसे बीटीसी के आधार पर लोगों को 12-12 दिन के रिप्लेसर के रूप में लगातार काम कराया जा रहा है,यदि यह व्यवस्था वास्तव में संचालित हो रही है तो यह भी जांच का विषय होगा कि प्रत्येक मजदूर की पात्रता का सत्यापन किस स्तर पर किया गया और ड्यूटी लगाने से पहले उसके दस्तावेजों की जांच किस अधिकारी या जिम्मेदार व्यक्ति ने की,शिकायतकर्ताओं ने आशंका जताई है कि यदि फर्जी अथवा अपूर्ण दस्तावेजों के आधार पर खदान में मजदूरों को कार्य कराया जा रहा है तो इसका असर केवल नियमों के पालन तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि खदान में कार्यरत मजदूरों की सुरक्षा से भी जुड़ा गंभीर विषय बन सकता है।
ठेकेदार की भूमिका की भी जांच की मांग…
शिकायत में ठेकेदार की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं,शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि यह जांच की जाए कि संबंधित मजदूरों के बीटीसी किस माध्यम से तैयार हुए,उन्हें काम में किसने लगाया और ठेकेदार स्तर पर दस्तावेजों का सत्यापन किस प्रकार किया गया, इसके लिए केवल मौखिक जांच के बजाय संबंधित मजदूरों के बीटीसी,प्रशिक्षण रिकॉर्ड, उपस्थिति पंजी,रिप्लेसर ड्यूटी रिकॉर्ड,भुगतान विवरण और ठेकेदार द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों का मिलान किया जाना जरूरी होगा।
निष्पक्ष जांच और वैध दस्तावेजों के आधार पर काम देने की मांग…
शिकायतकर्ताओं ने संबंधित प्रबंधन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है,शिकायत में कहा गया है कि बीटीसी एवं उससे संबंधित रिकॉर्ड की जांच की जाए और यदि फर्जी बीटीसी अथवा पैसे लेकर दस्तावेज तैयार कराने की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए, साथ ही यह मांग भी की गई है कि मजदूरों को वास्तविक योग्यता और वैध दस्तावेजों के आधार पर ही काम में लगाया जाए, ताकि पात्र मजदूरों के अधिकार प्रभावित न हों और खदान में सुरक्षा मानकों के साथ किसी तरह का समझौता न हो।
अब रिकॉर्ड की जांच से खुलेगा मामला
पांडवपारा खदान से सामने आई शिकायत में लगाए गए आरोपों की अभी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए किसी व्यक्ति या अधिकारी को दोषी मानने से पहले दस्तावेजों की जांच आवश्यक है,यदि बीटीसी के रिकॉर्ड,प्रशिक्षण अवधि,रिप्लेसर ड्यूटी और भुगतान से संबंधित अभिलेखों में शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि होती है,तो मामला गंभीर हो सकता है,अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि 12 दिन के बीटीसी पर किन लोगों को रिप्लेसर बनाया गया,48 दिन के अनुभव की शर्त वास्तव में क्या है, बीटीसी किस प्रक्रिया से जारी हुए और कथित 20-25 हजार रुपये के लेनदेन का कोई रिकॉर्ड है या नहीं? इन सवालों का जवाब खदान प्रबंधन द्वारा कराई जाने वाली निष्पक्ष जांच और संबंधित दस्तावेजों के परीक्षण से ही सामने आ सकेगा।
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