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अम्बिकापुर@जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल से मरीजों की निगरानी पर बढ़ा दबाव

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तीन दिन ओपीडी बहिष्कार से सीनियर डॉक्टरों पर बढ़ा भार, रोज करीब एक हजार मरीज पहुंचते हैं मेडिकल कॉलेज अस्पताल

-संवाददाता-
अम्बिकापुर,24 सितम्बर 2026 (घटती-घटना)। राजमाता देवेंद्र कुमारी सिंहदेव शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल में पीजी और जूनियर डॉक्टरों के तीन दिन के ओपीडी बहिष्कार से मरीजों की उपचार व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है। जेडीए के बैनर तले डॉक्टरों ने अस्पताल परिसर में धरना देकर काम बंद किया है। इनके आंदोलन के चलते ओपीडी में सीनियर डॉक्टरों को मरीजों की बढ़ी संख्या संभालनी पड़ रही है। वहीं वार्डों में भर्ती मरीजों की नियमित निगरानी की जिम्मेदारी भी प्रभावित हुई है। मेडिकल कॉलेज अस्पताल की ओपीडी में अवकाश के दिनों को छोडकर रोज करीब एक हजार मरीज पहुंचते हैं। आईपीडी में भी बड़ी संख्या में मरीज भर्ती रहते हैं। पीजी और जूनियर डॉक्टर नियमित रूप से वार्डों में मरीजों की निगरानी करने के साथ गंभीर स्थिति में सीनियर चिकित्सकों को जानकारी देते हैं। ऐसे में इनके काम से दूर रहने के कारण उपचार व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है। गुरुवार को मेडिसिन विभाग की ओपीडी में सीनियर चिकित्सक मरीजों की संख्या संभालते नजर आए। सामान्य दिनों में पीजी और जूनियर डॉक्टर भी ओपीडी व वार्ड की व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनके हड़ताल पर जाने से मरीजों को देखने और उनकी स्थिति की निगरानी का अतिरिक्त भार सीनियर चिकित्सकों पर आ गया है।
इमरजेंसी बंद करने की चेतावनी : जेडीए ने फिलहाल तीन दिन के लिए ओपीडी सेवाओं का बहिष्कार किया है। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होने की स्थिति में आंदोलन को आगे बढ़ाते हुए इमरजेंसी सेवाओं से भी दूरी बनाई जा सकती है। ऐसा होने पर मेडिकल कॉलेज अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव और बढऩे की आशंका है।
स्टाइपेंड से लेकर ड्यूटी और सुरक्षा तक मांगें : डॉक्टरों की मांगों में इंटर्न का स्टाइपेंड 15,900 से बढ़ाकर 30 हजार रुपए प्रतिमाह करना, पीजी डॉक्टरों के लिए 1.20 लाख रुपए स्टाइपेंड, बॉन्डेड एसआर और एमओ के मानदेय में वृद्धि तथा सभी कैडर में वार्षिक वेतन वृद्धि शामिल है।
इसके अलावा 48 घंटे की ड्यूटी सीमा का पालन, सुरक्षित आवास, आधुनिक उपकरण व पर्याप्त दवाएं, ग्रामीण क्षेत्र में कार्यरत डॉक्टरों के लिए विशेष भत्ता, जिला अस्पतालों में विशेषज्ञों की नियुक्ति और डॉक्टरों की सुरक्षा की मांग भी की गई है। जेडीए का कहना है कि इन मांगों को लेकर पहले भी प्रदेशव्यापी आंदोलन किया जा चुका है। बातचीत और आश्वासन के बाद आंदोलन स्थगित किया गया था, लेकिन मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के कारण दोबारा आंदोलन शुरू करना पड़ा।


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