- सरकारी गाड़ी से बिलासपुर तक ‘निजी सफर’ का दावा,लॉगबुक और ईंधन रिकॉर्ड पर नजर…
- मनेन्द्रगढ़ से बिलासपुर तक सरकारी गाड़ी का सफर,अब लॉगबुक खोलेगी राज
- सरकारी गाड़ी का ‘निजी सफर’! लॉगबुक,ईंधन और किलोमीटर रिकॉर्ड की जांच जरूरी आबकारी विभाग के वाहन
- क्रमांक CG 02AU 1633 के उपयोग पर आरोप; लॉगबुक, ईंधन पर्ची और जीपीएस रिकॉर्ड से साफ होगी तस्वीर
- सरकारी वाहन,सरकारी ईंधन और निजी आवागमन? उठे गंभीर सवाल
-रवि सिंह-
मनेन्द्रगढ़,24 सितम्बर 2026 (घटती-घटना)। सरकारी संसाधन जनता के पैसे से संचालित होते हैं और उनका उपयोग निर्धारित शासकीय कार्यों के लिए किया जाना अपेक्षित है, लेकिन जब शासकीय वाहन के कथित निजी उपयोग की शिकायत सामने आती है तो सवाल केवल वाहन के चलने तक सीमित नहीं रहता,बल्कि यह भी जानना जरूरी हो जाता है कि वाहन किसके आदेश पर चला, यात्रा का उद्देश्य क्या था, ईंधन का भुगतान किस मद से हुआ और यात्रा की अनुमति किस स्तर से मिली?
इसी तरह के सवाल मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले के आबकारी विभाग में शासकीय वाहन के कथित निजी उपयोग को लेकर उठ रहे हैं, आरोप है कि जिला आबकारी अधिकारी नितिन शुक्ला द्वारा शासकीय वाहन क्रमांक सीजी 02 एयू 1633 का उपयोग मनेन्द्रगढ़ से बिलासपुर स्थित निजी निवास तक आने-जाने में किया जा रहा है, हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और वास्तविक स्थिति संबंधित विभागीय अभिलेखों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकती है।
हर सप्ताह मनेन्द्रगढ़-बिलासपुर आवागमन का दावा-शिकायतों में दावा किया जा रहा है कि संबंधित अधिकारी शुक्रवार को शासकीय वाहन से बिलासपुर जाते हैं और सोमवार को चालक द्वारा पुनः बिलासपुर जाकर उन्हें मनेन्द्रगढ़ लाया जाता है, यदि यह आवागमन नियमित रूप से शासकीय वाहन से हो रहा है, तो सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि इन यात्राओं को किस शासकीय कार्य के अंतर्गत दर्ज किया गया है? यदि यात्राएं विभागीय निरीक्षण, बैठक, सरकारी दौरे अथवा अन्य अधिकृत कार्य से संबंधित हैं तो उनका विवरण संबंधित अभिलेखों में होना चाहिए, वहीं यदि यात्रा निजी कारणों से हुई है, तो शासकीय वाहन और ईंधन के उपयोग की वैधता का प्रश्न स्वाभाविक रूप से सामने आता है।
लॉगबुक बताएगी वाहन की असली कहानी-इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज वाहन की लॉगबुक हो सकती है, लॉगबुक में वाहन के उपयोग की तारीख, प्रारंभिक और अंतिम किलोमीटर, यात्रा का स्थान तथा उपयोग का उद्देश्य दर्ज होने की स्थिति में नियमित आवागमन की तस्वीर काफी हद तक साफ हो सकती है, इसके साथ ही ईंधन पर्चियां, किलोमीटर रीडिंग, चालक का ड्यूटी रजिस्टर, अधिकारी का दौरा कार्यक्रम और उपलब्ध होने पर वाहन का जीपीएस रिकॉर्ड भी महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकते हैं,मसलन,यदि शुक्रवार को मनेन्द्रगढ़ से बिलासपुर और सोमवार को बिलासपुर से मनेन्द्रगढ़ की यात्रा नियमित रूप से दर्ज है, तो यह भी देखा जा सकता है कि प्रत्येक यात्रा के सामने शासकीय कार्य का क्या कारण अंकित किया गया है, इसी तरह लॉगबुक और ईंधन रिकॉर्ड में दर्ज किलोमीटर का वास्तविक दूरी से मिलान भी किया जा सकता है।
सिर्फ शिकायत नहीं,रिकॉर्ड की जांच जरूरी-सरकारी वाहन के कथित निजी उपयोग से जुड़ा मामला फिलहाल आरोप और दावों के स्तर पर है,इसलिए किसी अधिकारी को दोषी ठहराने से पहले विभागीय रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच जरूरी है,संबंधित अधिकारी या विभाग के पास यदि वाहन उपयोग को लेकर नियम सम्मत अनुमति, शासकीय दौरे का कार्यक्रम अथवा अन्य दस्तावेज हैं तो उनका पक्ष भी सामने आना चाहिए,मामले में जांच का सबसे सीधा रास्ता यही है कि संबंधित अवधि की लॉगबुक और ईंधन रिकॉर्ड का मिलान किया जाए,इसके बाद चालक की ड्यूटी,दौरा कार्यक्रम और उपलब्ध जीपीएस रिकॉर्ड से भी इसका सत्यापन किया जा सकता है।
अब सवाल सिर्फ आरोपों का नहीं, रिकॉर्ड का है-सरकारी संसाधनों के उपयोग को लेकर पारदर्शिता तभी कायम रह सकती है जब रिकॉर्ड यह बताए कि सरकारी वाहन कहां गया, कितनी दूरी चला,किस उद्देश्य से चला और किसकी अनुमति से चला,यदि मनेन्द्रगढ़-बिलासपुर का आवागमन नियमित रूप से हुआ है तो दस्तावेजों में उसका पूरा हिसाब होना चाहिए,इसलिए अब निगाह इस बात पर है कि संबंधित विभाग लॉगबुक, ईंधन पर्चियों और ड्यूटी रिकॉर्ड की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाता है या नहीं, फिलहाल मामले में विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।
सरकारी खजाने पर कितना पड़ा बोझ?
शासकीय वाहन केवल वाहन नहीं होता। उसके साथ ईंधन, चालक का ड्यूटी समय,रखरखाव, टायर, सर्विसिंग और अन्य परिचालन खर्च भी जुड़ा होता है,इसलिए यदि वाहन का नियमित उपयोग निजी आवागमन में हुआ है तो सरकारी संसाधनों पर हुए संभावित खर्च का आकलन भी रिकॉर्ड के आधार पर किया जाना चाहिए,हालांकि फिलहाल यह कहना उचित नहीं होगा कि कितनी राशि का शासकीय नुकसान हुआ है, इसके लिए संबंधित अवधि की लॉगबुक, ईंधन खपत और भुगतान अभिलेखों की जांच जरूरी होगी।
अनुमति थी तो सामने आए आदेश
पूरे मामले में एक अहम सवाल अनुमति का भी है,यदि शासकीय वाहन का उपयोग निजी निवास तक आने-जाने के लिए नियमों के तहत अनुमत था,तो संबंधित अनुमति अथवा आदेश के आधार पर स्थिति स्पष्ट हो सकती है,यदि ऐसी कोई लिखित अनुमति है तो उसे सामने आने से विवाद का बड़ा हिस्सा स्वतः स्पष्ट हो सकता है,दूसरी ओर,यदि वाहन उपयोग की कोई अधिकृत व्यवस्था नहीं थी,तो फिर उसके औचित्य और जिम्मेदारी को लेकर विभागीय जांच का सवाल उठ सकता है।
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