-राजेन्द्र शर्मा-
खड़गवां,31 जनवरी 2026(घटती-घटना)। जनपद पंचायत खड़गवां में कथित फर्जीवाड़े और भ्रष्टाचार को लेकर लगातार गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि यहां शिकायतों की जांच में जानबूझकर देरी की जा रही है, जिससे संबंधित प्रकरणों में लीपापोती कर दोषियों को बचाया जा सके। शिकायतकर्ता महीनों तक अपनी शिकायत की जांच का इंतजार करते रहते हैं, लेकिन कार्यवाही आगे नहीं बढ़ती।
स्थानीय सूत्रों का कहना है कि जनपद पंचायत में नवपदस्थ अधिकारियों की पदस्थापना के बाद भ्रष्टाचार को और बढ़ावा मिला है। शिकायतें आने के बावजूद उन पर समयबद्ध और निष्पक्ष कार्यवाही नहीं की जा रही। इससे यह संदेह गहराता जा रहा है कि शिकायत जांच में देरी अधिकारियों की सहमति से की जा रही है, ताकि जिनकी जांच होनी है उन्हें दस्तावेज दुरुस्त करने और अपने पक्ष में माहौल बनाने का पूरा मौका मिल सके।
इसी क्रम में ग्राम पंचायत सिंघत में सांसद मद से स्वीकृत कम्प्यूटर भवन निर्माण को लेकर गंभीर शिकायत सामने आई है। सिंघत निवासी बंशीलाल सिंह ने छत्तीसगढ़ शासन के स्वास्थ्य मंत्री को शिकायत करते हुए बताया कि ग्राम पंचायत सिंघत निवासी शिव चंदर सिंह द्वारा कम्प्यूटर भवन निर्माण कार्य स्व मेहीलाल के पट्टे की भूमि, खसरा नंबर 28 पर कराया जा रहा था, जो नियमों के विपरीत है। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया कि कार्य स्वीकृति के समय जिन दस्तावेजों और खसरा नंबर को दर्शाया गया था, उस स्थल पर निर्माण कार्य नहीं किया गया।शिकायत के बाद कम्प्यूटर भवन निर्माण कार्य पर रोक भी लगाई गई थी और जनपद पंचायत खड़गवां द्वारा ग्राम पंचायत सिंघत को नोटिस जारी किया गया था। बताया गया कि जनपद पंचायत में बी-वन नक्शा जिस स्थल के लिए जमा किया गया था,वहां निर्माण नहीं कर दूसरे खसरा नंबर और नक्शे पर भवन निर्माण कराया गया। मामला धीरे-धीरे शांत होने के बाद आरोप है कि जनपद पंचायत खड़गवां में पदस्थ अधिकारी और लिपिकों ने अपनी जिम्मेदारी से बचते हुए शिकायत की जांच में लीपापोती कर मामले का निराकरण कर दिया। सूत्रों के अनुसार, जनपद पंचायत में वर्षों से पदस्थ कुछ लिपिक ही शिकायतें दर्ज कराने और उन्हीं शिकायतों के लेन-देन के जरिए सरपंचों को बचाने का काम करते हैं। सांसद मद योजना का संचालन करने वाले लिपिक के खिलाफ पूर्व में भी कई शिकायतें सामने आ चुकी हैं, लेकिन अधिकारियों के संरक्षण के चलते उन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। यहां एक कहावत सटीक बैठती नजर आती है कि सांईया भाए कोतवाल तो डर काहे का। आरोप है कि जनपद पंचायत खड़गवां में निर्माण कार्य कराने वालों की सुविधा का ज्यादा ध्यान रखा जाता है, जबकि गरीब किसान और आम नागरिक परेशान होते रहते हैं। सूत्रों की मानें तो ग्राम पंचायत सिंघत में पहले भी कई बड़े घोटाले हो चुके हैं, जिनकी जांच जनपद पंचायत के सीईओ द्वारा कराई गई, लेकिन कार्यवाही के नाम पर या तो कुछ नहीं हुआ या फिर आपसी लेन-देन में मामला निपट गया। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या इस बार शिकायतकर्ता गरीब को जनपद पंचायत खड़गवां के सीईओ से न्याय मिल पाएगा या फिर यह शिकायत भी फाइलों और रद्दी की टोकरी में ही दफन हो जाएगी।
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