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नई दिल्ली@वित्त मंत्री सीतारमण आज 9वीं बार पेश करेंगी बजट

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नई दिल्ली,31 जनवरी 2026। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज लगातार 9वीं बार केंद्रीय बजट पेश कर एक रिकॉर्ड बनाने जा रही हैं। इस बार सभी की निगाहें बहुप्रतीक्षित सीमा शुल्क सुधारों पर टिकी होंगी। सीतारमण ने 2019 में अपने पहले केंद्रीय बजट में दशकों से चले आ रहे चमड़े के ब्रीफकेस की जगह लाल कपड़े में लिपटे पारंपरिक ‘बही-खाता’ का अनुकरण किया था।
पिछले 4 वर्षों की तरह इस साल का बजट भी कागज रहित रूप में पेश किया जाएगा। सीतारमण ऐसे समय में बजट पेश करने जा रही हैं,जब भारत जापान को पीछे छोड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और अगामी दो वर्षों में तीसरी बड़ी इकोनॉमी बनने की ओर बढ़ रहा है। वहीं, कई गंभीर आर्थिक चुनौतियां भी सरकार के सामने खड़ी हैं।
राजकोषीय घाटा : सरकार के कुल खर्च और आय के बीच का अंतर राजकोषीय घाटा कहलाता है। चालू वित्त वर्ष 2025-26 के लिए इसके जीडीपी के 4.4 फीसदी पर रहने का अनुमान जताया गया है। केंद्रीय बजट में 4.5 फीसदी से नीचे का लक्ष्य हासिल करने के बाद बाजार अब कर्ज जीडीपी अनुपात में कमी की दिशा में आगे बढ़ने के लिए सटीक आंकड़ों का इंतजार कर रहा है। ऐसे में उम्मीद है कि सरकार अगामी वित्त वर्ष 2026-27 के लिए चार फीसदी के राजकोषीय घाटे की घोषणा कर सकती है।
पूंजीगत व्यय : चालू वित्त वर्ष 2025-26 के लिए सरकार का नियोजित पूंजीगत व्यय 11.2 लाख करोड़ रुपये तय किया गया है। निजी क्षेत्र के निवेशकों की सावधानी को देखते हुए सरकार आगामी केंद्रीय बजट में बुनियादी ढांचे पर खर्च को बनाए रख सकती है और इसमें 10-15 फीसदी की वृद्धि कर सकती है। यह राशि 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक होने की संभावना है।
कर्ज की रूपरेखा : वित्त मंत्री ने वित्त वर्ष 2024-25 के बजट भाषण में कहा था कि वित्त वर्ष 2026-27 से राजकोषीय नीति का प्रयास केंद्र सरकार के कर्ज को जीडीपी के फीसदी के रूप में कम करने का होगा। बाजार यह देखना चाहेगा कि सरकार कर्ज-जीडीपी अनुपात को कब तक 60 फीसदी के लक्ष्य तक लाने की बात कहती है। 2024 में यह अनुपात 85 फीसदी था, जिसमें केंद्र का हिस्सा 57 फीसदी था।
उधारी
वित्त वर्ष 2025-26 में सरकार की सकल उधारी का केंद्रीय बजट 14.80 लाख करोड़ रुपये था। सरकार अपने राजकोषीय घाटे को पूरा करने के लिए बाजार से कर्ज लेती है। उधारी का आंकड़ा देश की आर्थिक सेहत और राजस्व संग्रह की स्थिति का संकेत देता है।
कर राजस्व
वित्त वर्ष 2025-26 के केंद्रीय बजट में सकल कर राजस्व का लक्ष्य 42.70 लाख करोड़ रुपये रखा गया था, जो पिछले वर्ष से 11 फीसदी अधिक है। इसमें 25.20 लाख करोड़ रुपये प्रत्यक्ष कर (आयकर और कॉरपोरेट कर) और 17.5 लाख करोड़ रुपये अप्रत्यक्ष कर (सीमा शुल्क, उत्पाद शुल्क और जीएसटी) से आने का अनुमान है।
जीएसटी
वित्त वर्ष 2025-26 में जीएसटी राजस्व संग्रह 11 फीसदी बढ़कर 11.78 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। सितंबर 2025 से दरों में की गई कटौती के बाद राजस्व वृद्धि में तेजी आने की उम्मीद है।


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