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एमसीबी/जनकपुर@एमसीबी जिले में खाद्य अधिकारी की दबंगई से किसान त्रस्त

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धान खरीदी के दिन गाड़ी सहित धान जब्त, 50 हजार की रिश्वत मांगने का आरोप
कलेक्टर दरबार पहुंचा पीड़ित किसान, न्याय की लगाई गुहार

एमसीबी/जनकपुर,31 जनवरी 2026 (घटती-घटना)। छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले के जनकपुर विकासखंड अंतर्गत किसानों को प्रताडि़त किए जाने का एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। धान खरीदी के अंतिम चरण में एक खाद्य अधिकारी द्वारा किसान को मानसिक, आर्थिक और प्रशासनिक रूप से प्रताडि़त करने का आरोप लगा है। पीडि़त किसान ने जिला कलेक्ट्रेट पहुंचकर पूरे मामले की लिखित शिकायत करते हुए कलेक्टर से न्याय की गुहार लगाई है, मामला न केवल एक किसान की पीड़ा का है, बल्कि प्रदेश की धान खरीदी व्यवस्था, प्रशासनिक जवाबदेही और भ्रष्टाचार पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
पीड़ित किसान की पहचान- प्राप्त जानकारी एवं शिकायत पत्र के अनुसार पीडç¸त किसान का नाम प्रदीप यादव है, जो जनकपुर ब्लॉक का निवासी है, किसान शासन द्वारा संचालित धान उपार्जन प्रणाली में विधिवत पंजीकृत है और वर्षों से समर्थन मूल्य पर धान विक्रय करता आ रहा है।
धान खरीदी की सभी प्रक्रियाओं का किया गया पालन- किसान ने बताया कि राज्य में धान खरीदी की अंतिम तिथि 30 जनवरी 2026 निर्धारित थी, किसान ने नियमानुसार टोकन कटवाया, टोकन कटने के बाद विभागीय अधिकारियों द्वारा उसके घर जाकर धान का भौतिक सत्यापन किया गया, भौतिक सत्यापन का उद्देश्य यह जांचना होता है कि धान वास्तव में किसान के पास मौजूद है या नहीं, कहीं वह दूसरे राज्य या अन्य स्रोत से लाकर अवैध रूप से न बेचा जा रहा हो, सत्यापन के दौरान अधिकारी ने धान को वैध पाया और लिखित सत्यापन रसीद भी किसान को सौंपी गई।
23 जनवरी को शुरू हुई परेशानी– किसान के अनुसार दिनांक 23 जनवरी 2026 को वह ट्रैक्टर–ट्रॉली में धान भरकर निर्धारित धान खरीदी केंद्र पहुंचा, जैसे ही उसकी गाड़ी केंद्र परिसर के भीतर दाखिल हुई, तभी एक खाद्य अधिकारी वहां पहुंचा, किसान का आरोप है कि अधिकारी नशे की हालत में था,बिना कागजात देखे उसने कहा कि धान अवैध है,किसान द्वारा सभी दस्तावेज दिखाने के बावजूद अधिकारी ने सुनने से इंकार कर दिया।
तुम्हारे कागज मेरे काम के नहीं — किसान का आरोप- पीडç¸त किसान के अनुसार जब उसने टोकन, भौतिक सत्यापन पर्ची और अन्य वैध दस्तावेज दिखाए, तो खाद्य अधिकारी ने कहा तुम्हारे कागज मेरे किसी काम के नहीं हैं, यह धान जब्त किया जाएगा, किसान का कहना है कि अधिकारी ने नियमों को ताक पर रखकर अपने पद का दुरुपयोग किया।
चाकू के दम पर गाड़ी जब्त करने का सनसनीखेज आरोप- किसान ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जब उसने विरोध किया तो खाद्य अधिकारी ने चाकू दिखाकर डराया, ट्रैक्टर–ट्रॉली सहित धान को जबरन जब्त किया, गाड़ी को थाने ले जाने का आदेश दिया, यह पूरा घटनाक्रम खरीदी केंद्र परिसर में मौजूद लोगों के सामने घटित हुआ।
रास्ते में मांगी गई 50 हजार की रिश्वत- किसान के अनुसार थाने ले जाते समय रास्ते में खाद्य अधिकारी ने कहा 50 हजार रुपए दे दो, धान लेकर घर चले जाओ, किसान ने असमर्थता जताते हुए कहा कि उसके पास इतनी राशि नहीं है, उसके पास सभी वैध दस्तावेज मौजूद हैं, वह रिश्वत क्यों दे इस पर अधिकारी और भड़क गया।
कोटाडोल थाने में खड़ी कराई गई धान से भरी गाड़ी- रिश्वत न देने पर खाद्य अधिकारी ने ट्रैक्टर–ट्रॉली को कोटाडोल थाना परिसर में खड़ा करा दिया, इसके बाद किसान कई दिनों तक थाने और अधिकारियों के चक्कर काटता रहा, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला।
तहसीलदार और एसडीएम से भी नहीं मिला सहयोग– पीड़ित किसान ने मामले की जानकारी तहसीलदार, एसडीएम को भी दी, लेकिन किसान का आरोप है कि उसे वहां से भी कोई ठोस सहायता नहीं मिली।
29 जनवरी को कलेक्टर कार्यालय पहुंचा किसान- आखिरकार 29 जनवरी 2026 को थका-हारा किसान एमसीबी जिला कलेक्ट्रेट पहुंचा और कलेक्टर को अपनी आपबीती सुनाई, किसान ने बताया कि 30 जनवरी के बाद धान खरीदी बंद हो जाएगी, मेरा धान अब सरकारी केंद्र में नहीं बिक पाएगा।
लाखों रुपये के नुकसान की आशंका- किसान के अनुसार सरकार का समर्थन मूल्य: ₹3100 प्रति मि्ंटल, बाजार में बिचौलियों का भाव: ₹1800–1900 प्रति मि्ंटल, यदि धान सहकारी समिति में नहीं बिक पाया तो किसान को लाखों रुपये का सीधा आर्थिक नुकसान होगा।
किसान का सवाल — दोषी कौन?- किसान ने कलेक्टर से कहा “साहब, मैंने मेहनत से खेती की, नियमों का पालन किया, फिर भी मुझे अपराधी बना दिया गया, मेरे नुकसान की भरपाई कौन करेगा? किसान ने मांग की कि संबंधित खाद्य अधिकारी पर सख्त कार्रवाई हो, हुए नुकसान की भरपाई उसी अधिकारी से कराई जाए ताकि भविष्य में किसानों को ऐसी प्रताड़ना से बचाया जाए।
अब प्रशासन की अग्निपरीक्षा- यह मामला अब केवल एक किसान का नहीं, बल्कि धान खरीदी प्रणाली, भ्रष्टाचार पर नियंत्रण, किसानों की सुरक्षा से जुड़ा बड़ा सवाल बन चुका है, अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या जिला प्रशासन निष्पक्ष जांच करेगा? क्या किसान को समय रहते न्याय मिलेगा? या फिर सिस्टम के आगे उसकी मेहनत हार जाएगी? पूरा जिला अब कलेक्टर के निर्णय की ओर टकटकी लगाए बैठा है।


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