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रायपुर@छत्तीसगढ़ में कांग्रेस का बड़ा हल्लाबोल…

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धान खरीदी और मनरेगा को लेकर प्रदेशव्यापी चक्काजाम,सड़कों पर उतरे दिग्गज…
रायपुर,30 जनवरी 2026। छत्तीसगढ़ की राजनीति में उस समय उबाल आ गया जब राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि के अवसर पर कांग्रेस पार्टी ने प्रदेश स्तर पर ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ का बिगुल फूँक दिया। रायपुर, बिलासपुर, जगदलपुर, अंबिकापुर और रायगढ़ जैसे प्रमुख जिलों समेत राज्य के लगभग हर ब्लॉक में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। इस विरोध प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा कानून में किए जा रहे बदलावों का विरोध करना और राज्य सरकार से धान खरीदी की समय सीमा बढ़ाने की मांग करना था। सड़कों पर उतरे कांग्रेसी नेताओं ने चक्काजाम कर शासन-प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
मनरेगा के अस्तित्व पर संकटः एक्ट में बदलाव और नाम बदलने का कड़ा विरोध…
कांग्रेस के इस बड़े आंदोलन के केंद्र में ‘महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून’ है। विपक्षी दल का आरोप है कि केंद्र की मोदी सरकार इस ऐतिहासिक कानून के मूल स्वरूप को खत्म कर ‘ङ्कख्-त्र क्र्ररू त्र’ के नाम से एक नया ग्रामीण रोजगार कानून लाने की तैयारी में है। इसे लेकर मौजूदा शीतकालीन सत्र में चर्चा के लिए सूचीबद्ध भी किया गया है। कांग्रेसियों का कहना है कि मनरेगा ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और इसके नाम या एक्ट में किसी भी प्रकार का बदलाव गरीबों के अधिकारों पर हमला है। इसी मुद्दे को लेकर पूरे छत्तीसगढ़ में ब्लॉक स्तर पर विरोध प्रदर्शन आयोजित किए गए।
धान खरीदी की समय सीमा बढ़ाने की मांग,किसानों के नुकसान की जताई आशंका
आंदोलन का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण पहलू किसानों से जुड़ी धान खरीदी की समस्या है। प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में धरने पर बैठे कांग्रेस नेताओं ने पुरजोर मांग की है कि धान खरीदी की अंतिम तिथि को आगे बढ़ाया जाए। कांग्रेस का तर्क है कि अब भी राज्य के एक बड़े हिस्से में बहुत से किसान ऐसे हैं,जो तकनीकी कारणों या अन्य असुविधाओं के चलते अपना पूरा धान नहीं बेच पाए हैं। यदि समय सीमा नहीं बढ़ाई गई,तो इन किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। रायगढ़ और दुर्ग जैसे कृषि प्रधान जिलों में इस मांग को लेकर जबरदस्त चक्काजाम देखने को मिला,जिससे यातायात भी काफी प्रभावित हुआ।


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