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सूरजपुर@ भक्ति की धारा में डूबा पटना गांव

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11 कुण्डीय विष्णु महायज्ञ व भागवत कथा से गूंजा आस्था का स्वर,हर दिशा में राम-कृष्ण नाम
सूरजपुर,25 जनवरी 2026 (घटती-घटना)
। प्रेमनगर विधायक भूलन सिंह मरावी का गृहग्राम पटना इन दिनों भक्ति,श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास का जीवंत केंद्र बन गया है,ग्राम पंचायत पटना स्थित पावन गंवहा सरना प्रांगण में 19 जनवरी से आयोजित श्री श्री 11 कुण्डीय विष्णु महायज्ञ एवं श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ ने पूरे क्षेत्र को भक्ति रस से सराबोर कर दिया है। यज्ञ वेदी से उठती अग्नि की दिव्य लौ, वेद मंत्रों की गूंज और श्रद्धालुओं की अपार आस्था—हर दृश्य मन को भीतर तक स्पर्श कर रहा है। प्रतिदिन तड़के सुबह से ही श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ता है। हाथों में फूल-अक्षत लिए स्त्री-पुरुष, युवा और बच्चे सामूहिक रूप से आहुतियां समर्पित कर रहे हैं। ऐसा प्रतीत होता है मानो पूरा गांव एक साथ ईश्वर भक्ति में लीन हो गया हो।
संतों के सानिध्य से बना दिव्य वातावरण
महायज्ञ में श्री श्री 108 (त्यागी) नागा बाबा रामदास जी महाराज (वाराणसी) एवं श्रीमद् भागवताचार्य अरुणाचार्य महाराज (श्रीधाम वृन्दावन) का पावन सानिध्य प्राप्त हो रहा है, संतों के ओजस्वी प्रवचनों और यज्ञीय मंत्रोच्चार से वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण हो गया है। यज्ञ की अग्नि और कथा की वाणी ने गांव में ऐसा आध्यात्मिक आलोक रचा है कि हर मन श्रद्धा से पुलकित नजर आ रहा है।
दोपहर में भागवत, रात में रामलीला
आयोजन के अंतर्गत प्रतिदिन दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक श्रीमद् भागवत कथा का भावपूर्ण वाचन रात्रि में भव्य श्रीराम लीला मंचन हो रहा है, भागवत कथा में भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से लेकर गीता तत्व तक का भावपूर्ण वर्णन श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर रहा है। वहीं रामलीला मंचन में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के आदर्श चरित्र से जनमानस को संस्कार और प्रेरणा मिल रही है।
26 को पूर्णाहुति, 27 को विशाल भंडारा
आयोजन समिति के अनुसार 26 जनवरी को महायज्ञ की पूर्णाहुति एवं भागवत कथा का समापन, 27 जनवरी को तर्पण एवं विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।
परंपरा, सहभागिता और समरसता का संदेश
यह भव्य धार्मिक आयोजन विधायक भूलन सिंह मरावी की पहल एवं मार्गदर्शन तथा ग्रामवासियों के सामूहिक सहयोग से संपन्न हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों पुरानी यह परंपरा इस वर्ष अपने शिखर पर पहुंच गई है, महायज्ञ ने न केवल पटना गांव बल्कि आसपास के अंचलों में भी भक्ति,सद्भाव और सामाजिक समरसता का सशक्त संदेश दिया है—जहां हर वर्ग और हर आयु के लोग एक सूत्र में बंधकर आस्था का उत्सव मना रहे हैं।


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