- प्रशासनिक अनदेखी: नेशनल हाईवे किनारे सरकारी नाली तोड़कर निजी निर्माण, नियमों की उड़ रहीं धज्जियां
- राष्ट्रीय राजमार्ग पर खुलेआम कानून का उल्लंघन, अधिकारी बने मूकदर्शक
- नाली तोड़कर निर्माण से बढ़ा हादसे का खतरा, मानसून में हो सकता है बड़ा नुकसान
- एनएच की नाली तोड़कर निजी रास्ता, रसूखदारों के आगे नियम बेबस
- सरकारी नाली तोड़ना गंभीर अपराध, फिर भी धड़ल्ले से जारी निर्माण
- मंगल भवन के सामने हाईवे पर मनमानी, नागरिकों ने उठाई FIR की मांग
- मनेन्द्रगढ़ में एनएच की सरकारी नाली ध्वस्त, निजी निर्माण जारी
- जब कानून सड़क किनारे टूटे और प्रशासन देखता रहे

मनेन्द्रगढ़,23 जनवरी 2026(घटती-घटना)। नेशनल हाईवे के किनारे सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर बनाए गए नियम अब कागजों तक ही सीमित होते नजर आ रहे हैं,ताजा मामला मनेन्द्रगढ़ नगर पालिका क्षेत्र के वार्ड नंबर 4,मंगल भवन के सामने का है,जहां खुलेआम सरकारी नाली को तोड़कर निजी जमीन तक रास्ता बनाने के उद्देश्य से अवैध निर्माण कार्य कराया जा रहा है,सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि यह पूरा निर्माण कार्य राष्ट्रीय राजमार्ग जैसे संवेदनशील क्षेत्र में हो रहा है,इसके बावजूद संबंधित विभागों की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। नेशनल हाईवे जैसी महत्वपूर्ण सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना केवल कानून का उल्लंघन नहीं,बल्कि आम नागरिकों की सुरक्षा के साथ सीधा खिलवाड़ है,यदि समय रहते इस मामले में कठोर कार्रवाई नहीं हुई,तो यह न केवल भविष्य के लिए गलत उदाहरण बनेगा,बल्कि किसी बड़े हादसे की वजह भी बन सकता है,अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेता है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।
क्या है पूरा मामला- प्राप्त जानकारी के अनुसार, राष्ट्रीय राजमार्ग से सटी हुई एक सरकारी जल निकासी नाली, जो वर्षा जल की निकासी के लिए वर्षों पूर्व बनाई गई थी, उसे कुछ रसूखदार लोगों द्वारा जेसीबी मशीन और भारी उपकरणों से तोड़ दिया गया, नाली को क्षतिग्रस्त कर उसके ऊपर पक्का निर्माण कराया जा रहा है ताकि निजी भूमि तक सीधे प्रवेश का रास्ता बनाया जा सके, यह कार्य न तो किसी स्वीकृत नक्शे के तहत किया जा रहा है और न ही इसके लिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (हृ॥्रढ्ढ) से किसी प्रकार की अनुमति ली गई है, स्थानीय लोगों का कहना है कि यह निर्माण कई दिनों से जारी है, लेकिन अब तक किसी भी अधिकारी ने मौके पर पहुंचकर कार्य रुकवाने की कोशिश नहीं की।
सरकारी संपत्ति को पहुंचाया गया भारी नुकसान– जिस नाली को तोड़ा गया है वह वर्षा जल निकासी की मुख्य व्यवस्था का हिस्सा थी, हाईवे की संरचना को सुरक्षित रखने के लिए बनाई गई थी, सड़क को जलभराव से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती थी, नाली के टूटने से अब पानी की निकासी बाधित हो गई है, जिससे आगामी मानसून में हाईवे पर जलभराव की गंभीर स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
हो सकता है बड़ा हादसा- विशेषज्ञों के अनुसार, यदि जल निकासी अवरुद्ध हुई तो बारिश के समय सड़क पर पानी जमा होगा, डामर की परत तेजी से खराब होगी, तेज रफ्तार वाहनों के फिसलने का खतरा बढ़ेगा, सड़क दुर्घटनाओं की आशंका कई गुना बढ़ जाएगी, नेशनल हाईवे जैसे व्यस्त मार्ग पर इस प्रकार की लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।
इन कानूनों के तहत बनता है गंभीर अपराध
कानून के जानकारों के अनुसार, राष्ट्रीय राजमार्ग की किसी भी संरचना को नुकसान पहुंचाना गंभीर दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है।
राष्ट्रीय राजमार्ग (भूमि एवं यातायात) अधिनियम, 2002 धारा 24 से 27 के तहत राजमार्ग भूमि पर अतिक्रमण या संरचना को क्षति पहुंचाना अपराध भारी जुर्माना, निर्माण ध्वस्तीकरण और बेदखली का प्रावधान सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम, 1984 धारा 3 के अंतर्गत सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने पर 5 वर्ष तक का कारावास और जुर्माना संभव
भारतीय न्याय संहिता (पूर्व IPC धारा 431) सार्वजनिक सड़क, नाली या पुल को नुकसान पहुंचाकर उसे असुरक्षित बनाना
संज्ञेय अपराध की श्रेणी में शामिल इसके बावजूद मौके पर न तो पुलिस कार्रवाई दिखी और न ही विभागीय हस्तक्षेप।
मुख्य मार्ग होने के बावजूद प्रशासन मौन– स्थानीय नागरिकों में इस बात को लेकर गहरा रोष है कि यह स्थान शहर का प्रमुख मार्ग है, दिन-रात भारी वाहनों की आवाजाही रहती है, इसके बावजूद अवैध निर्माण खुलेआम किया जा रहा है, लोगों का सवाल है कि यदि यह काम किसी आम नागरिक द्वारा किया गया होता, तो क्या प्रशासन इतनी चुप्पी साधे रहता?
अधिकारियों का पक्ष- इस पूरे मामले को लेकर जब राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (हृ॥्रढ्ढ) के अधिकारियों से संपर्क किया गया, तो उन्होंने कहा कि मामले की जांच कराई जाएगी और यदि अवैध निर्माण पाया गया तो सख्त कार्रवाई की जाएगी, हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल जांच का आश्वासन अब पर्याप्त नहीं, बल्कि तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता है।
क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि—
अवैध निर्माण को तुरंत रोका जाए
तोड़ी गई सरकारी नाली को पूर्ववत स्थिति में बहाल किया जाए
दोषियों पर एफआईआर दर्ज की जाए
संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच हो लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो भविष्य में हाईवे किनारे अतिक्रमण की ऐसी घटनाएं और बढ़ेंगी।
प्रश्न जो अब उठ रहे हैं
बिना अनुमति जेसीबी कैसे लगी?
निर्माण सामग्री किसके संरक्षण में डाली गई?
स्थानीय प्रशासन और नगर पालिका की जानकारी में यह कार्य क्यों नहीं आया?
क्या रसूखदारों के दबाव में नियमों को नजरअंदाज किया जा रहा है? इन सवालों के जवाब अब प्रशासन को सार्वजनिक रूप से देने होंगे।
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