- हजारों क्विंटल की शॉर्टेज के बाद भी कांग्रेसी नेता बांट रहे ईमानदारी का सर्टिफिकेट
- धान घोटाले में किसान पीडि़त,कांग्रेसी जनपद सदस्य भ्रष्टाचारियों के साथ खड़े…
- प्रशासन की जांच पर सवाल…जनपद सदस्य बने समिति कर्मचारियों के वकील
- शिवप्रसाद नगर खरीदी केंद्र में 13 हजार बोरी धान कम…वीडियो में खुली पोल
- किसान बोले, प्रति बोरी आधा किलो ज्यादा धान…फिर भी जनपद सदस्य दे रहे क्लीन चिट
- धान खरीदी में गड़बड़ी पर कार्रवाई की जगह धमकी…प्रशासन पर दबाव का आरोप
- सोशल मीडिया में चमकने के चक्कर में कांग्रेसी नेता की फजीहत…किसान की बात अनसुनी
- चुनावी फाइनेंसर बने धान घोटाले के संरक्षक? जनपद सदस्य पर गंभीर आरोप
- शिवप्रसाद नगर धान खरीदी केंद्र में घोटाला…जनपद सदस्य का वीडियो वायरल…


-ओंकार पाण्डेय-
सूरजपुर,23 जनवरी 2026 (घटती-घटना)। छत्तीसगढ़ सरकार की धान खरीदी व्यवस्था वर्ष 2025-26 अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है, शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि इस बार किसी भी प्रकार की गड़बड़ी,फर्जी खरीदी,अवैध उठाव या किसान शोषण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा,इसी कारण प्रशासन इस समय अलर्ट मोड में है और लगातार धान खरीदी केंद्रों का निरीक्षण,रिकॉर्ड मिलान और भौतिक सत्यापन किया जा रहा है, इन सत्यापनों के दौरान प्रदेश के कई जिलों से बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के मामले सामने आए हैं, कहीं अवैध धान पकड़ा गया, तो कहीं राइस मिलर्स और समिति कर्मचारियों की मिलीभगत उजागर हुई,लेकिन इन्हीं सबके बीच सूरजपुर जिले का शिवप्रसादनगर धान खरीदी केंद्र अब एक गंभीर उदाहरण बनकर सामने आया है,शिवप्रसादनगर धान खरीदी केंद्र का मामला अब केवल एक समिति की गड़बड़ी नहीं रहा,यह बन चुका है किसानों के शोषण का प्रतीक,राजनीतिक संरक्षण का उदाहरण और प्रशासनिक निष्पक्षता की सबसे बड़ी परीक्षा,यदि इतने स्पष्ट तथ्यों के बाद भी कार्रवाई नहीं होती, तो यह संदेश जाएगा कि धान की चोरी से बड़ा अपराध उसे बचाने की राजनीति है,अब जनता जवाब चाहती है कानून चलेगा या प्रभाव?
प्रशासनिक जांच में खुलासाः 13 हजार से अधिक धान की बोरियां कम
शिवप्रसादनगर उपार्जन केंद्र में गड़बड़ी की शिकायत मिलने के बाद प्रशासनिक टीम द्वारा समिति के खरीद अभिलेख,उठाव रिकॉर्ड, परिवहन दस्तावेज और गोदाम में उपलब्ध स्टॉक का भौतिक सत्यापन कराया गया,जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि केंद्र में 13,000 से अधिक धान की बोरियां कम पाई गईं, यह शॉर्टेज हजारों क्विंटल धान के बराबर है,जिसकी कीमत करोड़ों रुपये में आंकी जा रही है,यह आंकड़ा किसी तकनीकी त्रुटि या सामान्य अंतर की श्रेणी में नहीं आता, बल्कि सीधे तौर पर व्यवस्थित भ्रष्टाचार की ओर संकेत करता है।
सोशल मीडिया की चमक में खुद फंस गए जनपद सदस्य
भैयाथान जनपद पंचायत के जनपद सदस्य एवं कांग्रेसी नेता राजू गुप्ता सोशल मीडिया पर अत्यधिक सक्रिय रहने के लिए जाने जाते हैं, उनके फोटो और वीडियो नियमित रूप से फेसबुक,व्हाट्सएप और अन्य प्लेटफॉर्म पर दिखाई देते हैं,लेकिन इस बार सोशल मीडिया की यही सक्रियता उनके लिए उलटी साबित हो गई, शिवप्रसादनगर धान खरीदी केंद्र में पहुंचकर बनाए गए वीडियो अब स्वयं उनके ही खिलाफ सबसे मजबूत प्रमाण बनते जा रहे हैं।
इसी बीच सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो-
प्रशासनिक जांच के कुछ ही दिन बाद एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगा, यह वीडियो किसी और का नहीं बल्कि भैयाथान जनपद पंचायत के कांग्रेस नेता एवं जनपद सदस्य राजू गुप्ता का है, यह वीडियो स्वयं उनके सोशल मीडिया अकाउंट से अपलोड किया गया,जिसमें वे शिवप्रसादनगर धान खरीदी केंद्र में मौजूद दिखाई देते हैं।
बयान सुनकर लोग रह गए हैरान- जनपद सदस्य के इस बयान ने कई सवाल खड़े कर दिए क्या जांच नियमों के विरुद्ध हुई थी? या जांच इसलिए गलत मानी जा रही है क्योंकि उसमें कमी सामने आ गई? विशेषज्ञों के अनुसार भौतिक सत्यापन किसी भी चरण में किया जा सकता है, और उठाव का इंतजार करना नियमों में कहीं दर्ज नहीं है।
क्या धान माफिया को बचाने की कोशिश?- स्थानीय लोगों और किसानों में यह चर्चा तेज हो गई कि समिति प्रबंधक,खरीदी प्रभारी और कथित धान माफिया अपने बचाव के लिए राजनीतिक संरक्षण का सहारा ले रहे हैं,वीडियो जिस तरह योजनाबद्ध प्रतीत होता है, उससे यह आशंका भी गहराई कि कहीं यह पूरी कवायद जांच पर पर्दा डालने के लिए तो नहीं की गई?
जनपद सदस्य के लिए किसानों की पीड़ा फिर हाशिए पर- जहां किसान अतिरिक्त तौल,हमाली वसूली, भुगतान संबंधी समस्याओं से परेशान हैं, वहीं वायरल वीडियो में इन मुद्दों पर कोई ठोस पहल नहीं दिखाई देती, किसान की परेशानी से ज्यादा चिंता इस बात की नजर आती है कि समिति कर्मचारियों पर कार्रवाई कैसे रोकी जाए।
जनता पूछ रही है—यह प्रतिनिधित्व किसका है? अब गांव-गांव में यह सवाल गूंज रहा है क्या जनपद सदस्य किसानों के प्रतिनिधि हैं या उन लोगों के, जिन पर 13 हजार बोरी धान गायब करने का आरोप है? लोकतंत्र में जनप्रतिनिधि का दायित्व प्रशासन को डराना नहीं बल्कि जनता को न्याय दिलाना होता है।
वीडियो में किसान ने कैमरे पर स्वीकार की सच्चाई- वायरल वीडियो में स्पष्ट रूप से देखा और सुना जा सकता है कि किसान स्वीकार करता है कि प्रति बोरी लगभग आधा किलो अतिरिक्त धान देना उसकी मजबूरी है,किसान यह भी कहता है कि हमाली की पूरी राशि उसे स्वयं अपनी जेब से देनी पड़ रही है, यह बयान किसी तीसरे व्यक्ति का नहीं, बल्कि स्वयं जनपद सदस्य द्वारा कैमरे पर पूछे गए सवालों के जवाब में सामने आया है।
फिर भी किसानों को नहीं, भ्रष्टाचारियों को मिला साथ- सब कुछ सुनने और देखने के बावजूद, न अतिरिक्त तौल रोकने का प्रयास किया गया, न हमाली वसूली पर कोई सवाल उठाया गया, न समिति कर्मचारियों से जवाब मांगा गया, इसके विपरीत, कुछ ही क्षणों बाद राजू गुप्ता समिति कर्मचारियों को ईमानदार बताते हैं, धान खरीदी को ‘पूरी तरह साफ’ घोषित करते हैं,और सोशल मीडिया के माध्यम से उन्हें क्लीन चिट दे देते हैं,यही विरोधाभास इस पूरे मामले को गंभीर बनाता है।
सूत्रों का बड़ा खुलासा- सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार शिवप्रसादनगर समिति में गड़बड़ी करने वाले कर्मचारी और पूरी अवैध व्यवस्था को संचालित करने वाले कथित सरगना, राजू गुप्ता के राजनीतिक जीवन में गहरी भूमिका निभाते रहे हैं, सूत्र बताते हैं कि चुनाव के समय वोट मैनेजमेंट, क्षेत्र में मतदाताओं की ठेकेदारी,और चुनावी खर्च का बड़ा हिस्सा, इन्हीं लोगों के माध्यम से प्रबंधित किया जाता रहा है,यही वजह बताई जा रही है कि जनपद सदस्य किसानों के साथ खड़े होने के बजाय उन्हीं लोगों के बचाव में उतर आए जिन पर हजारों क्विंटल धान की हेराफेरी का आरोप है।
राजनीतिक संरक्षण की बू साफ महसूस हो रही- स्थानीय ग्रामीणों और किसानों के बीच यह चर्चा आम हो चली है कि यदि कोई साधारण किसान आधा किलो धान कम दे दे तो उसकी बोरी लौटा दी जाती है, लेकिन जब 13 हजार से अधिक बोरियां गायब मिलती हैं, तब राजनीतिक संरक्षण खुलकर सामने आ जाता है, यही दोहरा मापदंड अब जनता के गुस्से का कारण बन रहा है।
प्रशासनिक जांच को ही कठघरे में खड़ा किया गया– वीडियो में जनपद सदस्य यह कहते भी सुने गए कि धान का पूरा उठाव होने दीजिए, उसके बाद कमी मिले तो कार्रवाई करना, इस बयान ने प्रशासनिक व्यवस्था पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है, विशेषज्ञों के अनुसार भौतिक सत्यापन किसी भी चरण में किया जा सकता है, उठाव पूरा होना कोई पूर्व शर्त नहीं है, इसके बावजूद जांच को गलत ठहराने का प्रयास यह संकेत देता है कि असली चिंता जांच नहीं, बल्कि उसके नतीजे हैं।
कांग्रेस नेता एवं जनपद सदस्य राजू गुप्ता के तीन वीडियो -तीन अलग दृश्य
पहला वीडियोः किसान का बयान- पहले वीडियो में जनपद सदस्य एक किसान से बातचीत करते नजर आते हैं, किसान साफ शब्दों में बताता है कि निर्धारित 40 किलो 700 ग्राम के बजाय उससे 41 किलो 200 ग्राम धान तौल कराया जा रहा है, यानी प्रति बोरी लगभग आधा किलो अतिरिक्त धान,इसके साथ किसान यह भी स्पष्ट करता है कि हमाली राशि भी उसे खुद देनी पड़ रही है,समिति की ओर से किसी प्रकार का भुगतान नहीं किया जा रहा, यह पूरा बयान कैमरे में रिकॉर्ड है।
दूसरा वीडियोः धान की गिनती-दूसरे वीडियो में जनपद सदस्य गोदाम में रखी बोरियों की गिनती करते हुए नजर आते हैं, मानो प्रशासनिक जांच प्रक्रिया को स्वयं दोहरा रहे हों।
तीसरा वीडियोः क्लीन चिट और चेतावनी-तीसरे वीडियो में जनपद सदस्य समिति कर्मचारियों को पूरी तरह ईमानदार बताते हैं धान खरीदी प्रक्रिया को ‘साफ-सुथरी’ घोषित करते हैं, और प्रशासन को यह चेतावनी देते नजर आते हैं कि धान का उठाव पूरा होने दीजिए,उसके बाद अगर कमी मिले तब कार्रवाई कीजिए,अभी की गई जांच गलत है।
प्रशासन की अग्निपरीक्षा अब पूरा जिला प्रशासन की ओर देख रहा है…
क्या शॉर्टेज के आधार पर एफआईआर दर्ज होगी?
क्या दोषी समिति कर्मचारियों पर कार्रवाई होगी?
क्या किसानों से वसूली गई अतिरिक्त मात्रा लौटाई जाएगी?
या फिर यह मामला राजनीतिक दबाव में दबा दिया जाएगा?
जांच के बाद भी कार्रवाई शून्य- इतनी बड़ी शॉर्टेज सामने आने के बावजूद न तो समिति प्रबंधक को हटाया गया, न खरीदी प्रभारी बदले गए, न खरीदी कार्य रोका गया, न ही तत्काल एफआईआर दर्ज की गई उल्टा, उसी समिति के कर्मचारियों से आगे भी खरीदी कराई जाती रही, जिससे प्रशासनिक स्तर पर भी सवाल उठने लगे।
शिवप्रसादनगर धान खरीदी केंद्र का मामला
अब स्पष्ट कर चुका है कि यह केवल धान की चोरी नहीं, बल्कि सिस्टम, राजनीति और पैसे के गठजोड़ की कहानी है, यदि इतने प्रत्यक्ष प्रमाणों के बावजूद कार्रवाई नहीं होती, तो यह संदेश जाएगा कि भ्रष्टाचार से ज्यादा ताकत उसके संरक्षक की होती है, अब सवाल सिर्फ इतना है कानून चलेगा या फाइनेंसर?
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