- युवाओं को कर्ज के जाल में फंसाने का आरोप, यूको बैंक में लोन महाघोटाले का बड़ा खुलासा
- लोन युवाओं के नाम, पैसा किसी और का! यूको बैंक प्रकरण में परत-दर-परत साजिश उजागर
- इलेक्ट्रॉनिक लोन, फर्जी आईटीआर और एक ही मोबाइल नंबर, यूको बैंक घोटाले ने हिलाया सिस्टम
- कम उम्र के युवाओं के नाम पर लाखों का कर्ज, बैंक मैनेजर–एजेंट गठजोड़ पर गंभीर आरोप
- नाम युवाओं का, दस्तावेज पियूष के, यूको बैंक लोन घोटाले में सनसनीखेज खुलासा
- सूत्रों का दावा: युवाओं को मोहरा बनाकर यूको बैंक से निकाले गए करोड़ों
- दस्तावेज बोले एक ही मोबाइल नंबर से बने कई आईटीआर, लोन पास कराने की साजिश
- बैंकिंग नियमों की खुली अनदेखी 18 साल से कम उम्र में भी मिला 10 लाख का लोन
- आईटीआर से लेकर इलेक्ट्रॉनिक बिल तक सब फर्जी?
- यूको बैंक लोन घोटाले में नया धमाका, युवा कर्जदार बने, ऐश-आराम दूसरों ने किया
- एक नंबर, कई आईटीआर, करोड़ों का लोन यूको बैंक प्रकरण में चौंकाने वाले सबूत
- बैंक बना घोटाले का अड्डा? दस्तावेजों ने खोली पूरी साजिश
- सूत्रों का खुलासा—आईटीआर तक एजेंट ने बनवाए, बैंक ने आंख मूंद ली
- युवाओं को मोहरा बनाकर यूको बैंक में कथित लोन महाघोटाला
- बैंक मैनेजर–भाई–एजेंट की साजिश में फंसे दर्जनों युवा
- इलेक्ट्रॉनिक लोन, फर्जी आईटीआर, एक ही मोबाइल नंबर और दस्तावेजों का जाल
सूत्रों के खुलासे ने खोली पूरी परत-दर-परत साजिश

-न्यूज डेस्क-
बैकुंठपुर,18 जनवरी 2026 (घटती-घटना)। यूको बैंक से जुड़े कथित लोन घोटाले का मामला अब केवल बैंकिंग अनियमितता नहीं रह गया है, बल्कि यह युवाओं को योजनाबद्ध तरीके से कर्ज के जाल में फंसाने की संगठित वित्तीय साजिश के रूप में सामने आ रहा है, दैनिक घटती घटना द्वारा लगातार प्रकाशित खबरों के बीच अब इस पूरे प्रकरण से जुड़े ऐसे दस्तावेज और तथ्य सामने आए हैं, जिन्होंने बैंक,एजेंट और दस्तावेज निर्माण की पूरी प्रक्रिया को कटघरे में खड़ा कर दिया है, विशेष सूत्रों के अनुसार यूको बैंक के शाखा प्रबंधक आनंद,उनके भाई विशाल और बैंक से जुड़े अधिकृत एजेंट पियूष पर आरोप है कि इन तीनों ने मिलकर कम उम्र के युवाओं को आगे कर उनके नाम पर लाखों रुपये के लोन स्वीकृत कराए, जबकि लोन की राशि का वास्तविक उपयोग कथित तौर पर इन्हीं लोगों द्वारा किया गया,दैनिक घटती-घटना द्वारा प्रकाशित की जा रही खोजी खबरों के बीच अब एक और चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है,जिसने पूरे बैंकिंग सिस्टम की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं, विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिस अधिकृत एजेंट पियूष पर युवाओं को बैंक लोन के जाल में फंसाने का आरोप है, वह स्वयं इलेक्ट्रॉनिक दुकान का संचालक है और उसके नाम पर भी इसी यूको बैंक से लगभग 30 लाख रुपये का लोन स्वीकृत बताया जा रहा है।
युवाओं के नाम पर लाखों के लोन, नियंत्रण दूसरों के हाथ- सूत्रों के अनुसार लोन स्वीकृति के लिए युवाओं को केवल नाम और दस्तावेजों तक सीमित रखा गया, लोन की संपूर्ण प्रक्रिया आवेदन, फाइल तैयारी, दस्तावेज संलग्न करना और बैंक से समन्वय कथित तौर पर एजेंट पियूष द्वारा संचालित की गई, जिन युवाओं के नाम पर लोन स्वीकृत होने की जानकारी सामने आई है, उनमें शामिल हैं श्यामलाल 8 लाख, शिवमंगल 8.50 लाख, राहुल साहू 10 लाख, अथर्व श्रीवास्तव 10 लाख, शिवांश सिंह 10 लाख, भुवनेश्वर सिंह 10 लाख (सूत्रों के अनुसार लोन के समय उम्र 18 वर्ष से कम), विकास 9 लाख सूत्रों का दावा है कि इनमें से अधिकांश युवाओं ने स्वयं कभी लोन राशि का उपयोग नहीं किया।
इलेक्ट्रॉनिक लोन बना घोटाले का मुख्य माध्यम- जांच में सामने आया कि शिवांश सिंह, भुवनेश्वर सिंह और विकास के नाम पर लोन इलेक्ट्रॉनिक सामान की खरीद के लिए स्वीकृत किए गए, लेकिन किसी इलेक्ट्रॉनिक सामग्री की वास्तविक डिलीवरी नहीं हुई, युवाओं के पास न दुकान है, न स्टॉक, न बिल रिकॉर्ड फिर भी बैंक फाइलों में खरीद पूरी दर्शाई गई, सूत्रों का कहना है कि जिस इलेक्ट्रॉनिक फर्म के माध्यम से लोन दिखाया गया, उससे एजेंट पियूष का सीधा गांठ-जोड़ है।
हर दस्तावेज में एक ही मोबाइल नंबर — पियूष का- इस कथित घोटाले की सबसे मजबूत कड़ी वह तथ्य है जो दस्तावेजों में बार-बार सामने आया सूत्रों के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक बिल, इतर/गारंटर दस्तावेज, लोन आवेदन और अब आयकर रिटर्न (ढ्ढभ्क्र) हर जगह एक ही मोबाइल नंबर दर्ज है जो पियूष का बताया जा रहा है, बैंकिंग और आयकर नियमों के अनुसार मोबाइल नंबर ग्राहक की डिजिटल पहचान होता है ह्रभ्क्क, सत्यापन और ई-फाइलिंग उसी से होती है ऐसे में यदि ढ्ढभ्क्र तक में पियूष का नंबर है, तो यह स्पष्ट करता है कि दस्तावेजों पर पूरा नियंत्रण उसी का था।
आईटीआर भी पियूष ने ही बनवाया?- सूत्रों का दावा है कि शिवांश, भुवनेश्वर और विकास ने कभी स्वयं आईटीआर दाखिल नहीं किया न ही उन्हें आयकर पोर्टल की जानकारी थी, आधार, पैन और हस्ताक्षर लेकर, आईटीआर पियूष के माध्यम से बनवाए गए, यह आईटीआर केवल एक उद्देश्य से बनाए गए बैंक को यह दिखाने के लिए कि युवक आयकरदाता और सक्षम व्यवसायी हैं, ताकि लाखों का लोन आसानी से स्वीकृत हो सके।
फर्जी हस्ताक्षर और दस्तावेजों के गंभीर आरोप- सूत्रों के अनुसार कुछ मामलों में हस्ताक्षर मेल नहीं खाते दस्तावेजों में एक जैसी हैंडराइटिंग दिखती है, श्यामलाल के मामले में फर्जी हस्ताक्षर का आरोप सामने आया, विवाद बढ़ने के बाद 7 लाख खाते में डाले गए, लेकिन लोन अब भी बंद नहीं हो पाया।
कर्ज युवाओं पर, विलासिता किसी और की- आज स्थिति यह है कि युवा बैंक रिकॉर्ड में कर्जदार हैं, किश्त नहीं भर पाने पर मानसिक दबाव झेल रहे हैं, परिजनों को अब भी पूरी जानकारी नहीं है, वहीं सूत्रों का दावा है कि लोन की रकम से महंगी गाडç¸यां, निजी खर्च, रहन-सहन, घूमने-फिरने जैसी गतिविधियां की गईं।
बैंक प्रबंधन की चुप्पी ने बढ़ाया संदेह- लगातार खबरें प्रकाशित होने के बावजूद यूको बैंक का उच्च प्रबंधन मौन है, कोई सार्वजनिक जांच नहीं, कोई निलंबन नहीं, कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं, जबकि शिकायतें क्षेत्रीय और जोनल स्तर तक पहुंचने की बात कही जा रही है।
अब यह मामला किन कानूनों के दायरे में आ सकता है- यदि आरोप प्रमाणित होते हैं तो मामला बैंकिंग धोखाधड़ी, जालसाजी व कूटरचना, आयकर अधिनियम उल्लंघन, आईटी एक्ट, संगठित वित्तीय अपराध के अंतर्गत जांच योग्य बन सकता है।
क्या युवाओं को कर्ज में डुबोने वाली यह कथित साजिश?– कानून के शिकंजे तक पहुंचेगी, या फिर मामला फाइलों में दबा दिया जाएगा? इन सवालों के जवाब अभी बाकी हैं, दैनिक घटती घटना इस पूरे प्रकरण से जुड़े हर दस्तावेज, हर सूत्र और हर पहलू पर लगातार नजर बनाए हुए है।
सबसे बड़ा सवाल
बिना वैध आय के लोन कैसे स्वीकृत हुए?
एक ही मोबाइल नंबर कई आईटीआर में कैसे स्वीकार हुआ?
इलेक्ट्रॉनिक बिल बिना डिलीवरी कैसे मान्य हुए?
बैंक अधिकारियों की भूमिका क्या रही?
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