बैकुंठपुर,14 जनवरी 2026 (घटती-घटना)। कोरिया जिला मुख्यालय स्थित विश्राम गृह में उस समय माहौल असहज हो गया, जब प्रभारी मंत्री से मीडिया कर्मियों ने शासकीय भवनों में आयोजित अश्लील नृत्य कार्यक्रमों को लेकर सीधा सवाल दाग दिया। सवाल साधारण था, लेकिन मंत्रीजी का जवाब इतना अप्रत्याशित निकला कि अब वह बयान नहीं,बल्कि एक लंबा व्याख्यान बनकर सुर्खियों में छा गया है।
कुल मिलाकर एक ओर शासकीय भवनों में अश्लील नृत्य जैसे गंभीर मुद्दे पर ठोस जवाब की उम्मीद,दूसरी ओर मंत्रीजी का कला पर दिया गया व्याख्यान, और बीच में महिला जनप्रतिनिधि की कैमरे में कैद हंसी-शर्माहट इन तीनों ने मिलकर इस पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक,सामाजिक और नैतिक बहस का केंद्र बना दिया है, अब देखना यह है कि मंत्रीजी के इस बयान पर सरकार या पार्टी की ओर से कोई सफाई आती है या यह मामला यूं ही सुर्खियों में गर्माता रहेगा।
सवाल कुछ, जवाब कुछ और
मीडिया ने जब मंत्रीजी से पूछा कि शासकीय भवनों में अश्लील नृत्य जैसे आयोजन होना कितना उचित है और इस पर सरकार का क्या रुख है, तो जवाब में मंत्रीजी ने नृत्य को कला का रूप बताते हुए अलग ही दिशा पकड़ ली। उन्होंने नृत्य विद्याओं, कला की अभिव्यक्ति और सांस्कृतिक पहलुओं पर विस्तार से बोलना शुरू कर दिया, मंत्रीजी का कहना था कि नृत्य सदियों से कला का माध्यम रहा है और इसे केवल एक दृष्टिकोण से नहीं देखा जाना चाहिए।
कैमरे में कैद हुई हंसी और शर्माहट
इस पूरे व्याख्यान के दौरान मंत्रीजी के ठीक बगल में बैठीं कोरिया जिला पंचायत की उपाध्यक्ष,जो एक महिला जनप्रतिनिधि हैं,कैमरे में बार-बार शर्माती और हल्की-हल्की हंसी रोकती नजर आईं। मंत्रीजी का बयान जितना लंबा होता गया, उतना ही उनका संकोच और असहजता साफ झलकती रही, उनकी यह प्रतिक्रिया सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का नया विषय बन गई है।
बयान ने बढ़ाई राजनीतिक बहस
मंत्रीजी का यह बयान अब केवल एक प्रेस वार्ता तक सीमित नहीं रहा, विपक्ष इसे अश्लीलता को संरक्षण देने वाला बयान बता रहा है, सामाजिक संगठनों का कहना है कि कला और अश्लीलता के बीच की रेखा को इस तरह धुंधला करना समाज के लिए गलत संदेश है, वहीं कुछ लोग मंत्रीजी के बयान को संदर्भ से हटकर पेश किया गया भी बता रहे हैं।
शासकीय भवन और नैतिक जिम्मेदारी का सवाल
विश्राम गृह, वन विश्राम गृह या अन्य शासकीय भवनों में होने वाले ऐसे आयोजनों पर पहले भी सवाल उठते रहे हैं, ऐसे में मंत्रीजी का यह कथन कि अश्लील नृत्य भी कला हो सकता है, प्रशासनिक जिम्मेदारी और नैतिकता के सवाल को और गहरा कर रहा है।
मीडिया भी रह गई अचंभित
मौके पर मौजूद पत्रकारों का कहना है कि वे इस सवाल पर स्पष्ट प्रशासनिक रुख, कार्रवाई या कम से कम नैतिक टिप्पणी की उम्मीद कर रहे थे। लेकिन मंत्रीजी द्वारा अश्लील नृत्यों को कला के दायरे में रखने की कोशिश ने सभी को हैरान कर दिया,खासतौर पर तब,जब सवाल शासकीय भवनों जैसे संवेदनशील और जिम्मेदार स्थानों पर इस तरह के आयोजनों से जुड़ा था।
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