बंद स्ट्रीट लाइटों से पसरा अंधेरा
धुम्माडांड से तहसील मार्ग तक जर्जर सड़कें, हादसों को दावत


-राजन पाण्डेय-
सोनहत,14 जनवरी 2026(घटती-घटना)। विकासखंड मुख्यालय सोनहत में बुनियादी सुविधाओं की बदहाली अब आमजन के लिए गंभीर परेशानी का कारण बनती जा रही है। क्षेत्र की मुख्य सड़कों और रिहायशी वार्डों में वर्षों से जर्जर सड़कें और बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटें प्रशासनिक उदासीनता की तस्वीर पेश कर रही हैं। हालात ऐसे हैं कि सूर्यास्त होते ही पूरा इलाका अंधेरे में डूब जाता है, ब्लॉक मुख्यालय सोनहत की जर्जर सड़कें और बंद स्ट्रीट लाइटें केवल विकास की धीमी रफ्तार नहीं, बल्कि आमजन की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन चुकी हैं, अब देखना यह है कि प्रशासन इस बढ़ती जनसमस्या पर कब तक संज्ञान लेता है और राहत के लिए ठोस कदम कब उठाए जाते हैं।
हादसों को दावत देती जर्जर सड़कें- सोनहत क्षेत्र की सड़कों की स्थिति बेहद चिंताजनक हो चुकी है, लंबे समय से मरम्मत न होने के कारण सड़कों पर बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं, स्थानीय लोगों का कहना है कि पैदल चलना तो दूर, दोपहिया वाहन निकालना भी जोखिम भरा हो गया है, बारिश के मौसम में गड्ढों में पानी भर जाने से स्थिति और भी भयावह हो जाती है, जिससे आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं।
स्ट्रीट लाइटें बंद, अंधेरे में बढ़ रहा खतरा- जर्जर सड़कों के साथ-साथ वर्षों से बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटों ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है, ग्रामीणों का आरोप है कि अंधेरे का फायदा उठाकर असामाजिक तत्वों की सक्रियता बढ़ रही है, गड्ढों वाली सड़कों पर रोशनी न होने से रात के समय लोग गिरकर चोटिल हो रहे हैं, जिसमें बच्चे और बुजुर्ग सबसे अधिक प्रभावित हैं, एक स्थानीय निवासी ने बताया, शाम होते ही घर से निकलना मुश्किल हो जाता है। बच्चों और बुजुर्गों को लेकर हमेशा डर बना रहता है।
धुम्माडांड मुख्य मार्ग बना ‘हादसों का सफर’- सोनहत ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाला धुम्माडांड मुख्य मार्ग अपनी बदहाली की कहानी खुद बयां कर रहा है। वर्षों से मरम्मत की प्रतीक्षा कर रही यह सड़क अब पूरी तरह गड्ढों में तब्दील हो चुकी है, स्थिति यह है कि सड़क में गड्ढे हैं या गड्ढों में सड़क यह पहचान पाना मुश्किल हो गया है, यह मार्ग केशगवां, बेलिया, ओरगई, तंजरा सहित कई गांवों को सोनहत से जोड़ता है और ग्रामीणों के आवागमन का प्रमुख साधन है, इसके बावजूद सड़क की हालत इतनी खराब है कि यहां से गुजरना किसी खतरे से कम नहीं।सोनहत कॉलेज मार्ग की भी बदहाली- सोनहत से कॉलेज मार्ग की स्थिति भी चिंताजनक है। भारत स्कूल से कॉलेज और आगे हसदेव नदी तक सड़क पूरी तरह जर्जर हो चुकी है, स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मार्ग की मरम्मत अत्यंत आवश्यक है, लेकिन वर्षों से इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया।
जनपद से नर्सरी और हाउसिंग बोर्ड मार्ग- सोनहत जनपद से नर्सरी मार्ग की हालत भी बेहद खराब है। जनपद हटमेंट कॉलोनी, स्टेडियम होते हुए हाउसिंग बोर्ड तिराहा तक सड़क पूरी तरह उखड़ चुकी है, इस मार्ग पर सड़क के साथ-साथ रोड लाइटें भी खराब हैं, जिससे रात में आवाजाही और भी कठिन हो जाती है।
तहसील कार्यालय मार्ग की दुर्दशा- फारेस्ट चौक से तहसील कार्यालय तक का मार्ग भी बदहाली का शिकार है, तहसील कार्यालय के पास बड़े-बड़े गड्ढे बन चुके हैं, लेकिन उनकी मरम्मत अब तक नहीं कराई गई, यहां भी रोड लाइटें बंद पड़ी हैं, जिससे आम लोगों और कर्मचारियों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।
प्रशासनिक अनदेखी से बढ़ रहा आक्रोश- स्थानीय निवासियों का कहना है कि इन समस्याओं को लेकर कई बार पंचायत और संबंधित विभागों को अवगत कराया गया, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला, वर्षों बीत जाने के बाद भी न तो सड़कों का कायाकल्प हुआ और न ही खराब स्ट्रीट लाइटों को बदला गया।
आंदोलन की चेतावनी– धुम्माडांड क्षेत्र के आक्रोशित ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही सड़क के सुधारीकरण या नए सिरे से निर्माण कार्य शुरू नहीं किया गया, तो वे चक्काजाम और उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
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