पोषण या कमीशन? आत्मानंद स्कूल पटना में मध्यान्ह भोजन संचालन पर राजनीतिक दबाव के आरोप
बिना शिकायत बदला जा रहा मध्यान्ह भोजन समूह, आत्मानंद विद्यालय पटना में उठा बड़ा सवाल
बच्चों के भोजन पर राजनीति! आत्मानंद विद्यालय पटना में मध्यान्ह भोजन को लेकर जोर-आजमाइश
मध्यान्ह भोजन योजना या राजनीतिक लाभ? आत्मानंद स्कूल पटना में विवाद गहराया
क्लीन चिट के बावजूद हटाने की तैयारी, आत्मानंद विद्यालय में मध्यान्ह भोजन पर सियासी दखल
पोषण योजना पर ‘दबाव तंत्र’: आत्मानंद विद्यालय पटना में मध्यान्ह भोजन को लेकर बवाल
स्कूल के रसोईघर तक पहुंची राजनीति, आत्मानंद विद्यालय पटना में मध्यान्ह भोजन पर घमासान
शिकायत नहीं, फिर भी बदलाव! आत्मानंद विद्यालय पटना में मध्यान्ह भोजन बना विवाद का कारण
बच्चों की थाली पर नजर? आत्मानंद विद्यालय पटना में मध्यान्ह भोजन को लेकर सियासी खेल
-रवि सिंह-
कोरिया/पटना,10 जनवरी 2026(घटती-घटना)। शासकीय स्कूलों में बच्चों को पोषण आहार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई मध्यान्ह भोजन योजना अब राजनीतिक हस्तक्षेप और आर्थिक लाभ के आरोपों के घेरे में आ गई है। कोरिया जिले के नगर पंचायत पटना स्थित आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम विद्यालय पटना में मध्यान्ह भोजन संचालन को लेकर इन दिनों जबरदस्त खींचतान चल रही है। सूत्रों के मुताबिक, यहां योजना का संचालन बेहतर ढंग से कर रहे समूह को हटाकर राजनीतिक दल से जुड़े एक कार्यकर्ता के समूह को जिम्मेदारी सौंपने की तैयारी की जा रही है।
वैसे वर्तमान में जिस समूह के पास संचालन की जिम्मेदारी है उसकी शिकायत एक भी नहीं पाए जाने की बात सामने आई है,यहां तक कि स्कूल प्रबंधन,छात्र छात्रा भी इस बदलाव के समर्थन में नहीं हैं,वैसे सूत्रों की माने तो वर्तमान में संचालनकर्ता समूह की कई शिकायतें की गईं और जिसकी वृहद जांच भी हुई लेकिन जांच में भी जब कोई कमी सामने नहीं आई तब नया हथकंडा अपनाया गया और अब स्थानीय बनाम बाहरी कहकर संचालन की जिम्मेदारी राजनीतिक दल के कार्यकर्ता को प्रदान करने की तैयारी पूरी हुई है,वैसे इस मामले में भारी लेनदेन भी खबरें सुनी जा रही हैं,बताया जा रहा है कि स्थानीय बनाम बाहरी का मुद्दा जो संचालन के संबंध में सामने लाकर वर्तमान समूह को हटाने की तैयारी है वह स्थानीय लोगों द्वारा ही संचालित समूह है, वैसे यदि सूत्रों की माने तो महिला स्वयं सहायता समूहों की कहानी हर जगह ऐसी ही है,कई जिम्मेदारी प्राप्त करने अन्य लोगों के समूहों से लोग कोई जिम्मेदारी प्राप्त करते हैं और उसका संचालन करते हैं,जो इस मामले का भी सच है।वैसे पटना आत्मानंद मामले में यह एक बड़ा सवाल है कि आखिर क्या आवश्यकता पड़ गई जो एक मध्यान्ह भोजन संचालन समूह को तब बदला जा रहा है जब उसकी कोई शिकायत नहीं,शिक्षक, पालक,छात्र जिससे संतुष्ट हैं और जो जांच में भी दोषी नहीं पाया गया वहीं वर्तमान में जब शिक्षा सत्र समाप्ति की ओर है।
सरकार की महत्वाकांक्षी योजना पर सवाल- मध्यान्ह भोजन योजना का मूल उद्देश्य स्कूली छात्र-छात्राओं को पौष्टिक भोजन देकर उनके स्वास्थ्य में सुधार और स्कूलों में उपस्थिति बढ़ाना है। आमतौर पर इसका संचालन महिला स्वयं सहायता समूहों को सौंपा जाता है, जिनकी निगरानी शिक्षक, शाला प्रबंधन समिति और पालक समिति करती है। नियमों के अनुसार, जब तक किसी संचालनकर्ता समूह के विरुद्ध गंभीर शिकायत या अनियमितता प्रमाणित न हो, तब तक उसे बदला नहीं जाता, लेकिन आत्मानंद विद्यालय पटना में हालात इसके उलट बताए जा रहे हैं।
बिना शिकायत समूह बदलने की कवायद- सूत्रों के अनुसार, वर्तमान में जिस समूह के पास मध्यान्ह भोजन संचालन की जिम्मेदारी है उसके खिलाफ एक भी प्रमाणित शिकायत नहीं, पूर्व में हुई जांच में भी कोई कमी नहीं पाई गई, शिक्षक, पालक और छात्र संचालन से संतुष्ट बताए जा रहे हैं, इसके बावजूद अब अचानक समूह बदलने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, जिससे स्कूल परिसर में असमंजस और तनाव की स्थिति बन गई है।
शिकायतें विफल, अब ‘स्थानीय बनाम बाहरी’ का मुद्दा- बताया जा रहा है कि पहले वर्तमान समूह को हटाने के लिए लगातार शिकायतें कराई गईं। प्रशासन और संबंधित विभागों द्वारा जांच भी की गई, लेकिन जांच में समूह को क्लीन चिट मिल गई, इसके बाद अब नया “स्थानीय बनाम बाहरी” का मुद्दा खड़ा किया गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि जिसे “बाहरी” बताया जा रहा है, वह समूह भी स्थानीय लोगों द्वारा ही संचालित है।एक ही समूह को लाभ क्यों?- पूरे मामले में बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि स्थानीयता ही आधार है, तो फिर अन्य स्थानीय महिला स्वयं सहायता समूहों को प्रक्रिया में शामिल क्यों नहीं किया गया? केवल एक खास समूह, जो राजनीतिक दल के एक कार्यकर्ता से जुड़ा बताया जा रहा है, उसी का नाम क्यों प्रस्तावित किया जा रहा है? सूत्रों का कहना है कि अन्य समूहों को न तो सूचना दी गई और न ही किसी चयन प्रक्रिया में शामिल किया गया।
लेनदेन और दबाव की चर्चाएं- मामले में बड़े लेनदेन की चर्चाएं भी सामने आ रही हैं। सूत्रों के मुताबिक, शिकायतों से बात नहीं बनी तो शाला प्रबंधन समिति पर दबाव बनाया गया और इसके बाद ही आनन-फानन में बैठक बुलाकर नया प्रस्ताव लाया गया, यदि यह आरोप सही हैं, तो यह योजना की पारदर्शिता और ईमानदारी पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
शिक्षकों में नाराजगी, विवाद की आशंका- सूत्रों के अनुसार, इस बेवजह बदलाव से स्कूल के शिक्षक भी नाराज बताए जा रहे हैं। नाम न छापने की शर्त पर शिक्षकों का कहना है कि वर्तमान समूह बेहतर ढंग से काम कर रहा है, शिक्षा सत्र समाप्ति की ओर है, ऐसे समय में बिना शिकायत बदलाव से कार्यक्रम प्रभावित होने की आशंका है, कई लोगों का मानना है कि यह जबरन बदलाव आगे चलकर विवाद और टकराव की स्थिति पैदा कर सकता है।
बड़ा सवाल—पोषण या फायदा?- आत्मानंद विद्यालय पटना का यह मामला अब एक बड़े सवाल की ओर इशारा कर रहा है क्या मध्यान्ह भोजन योजना वास्तव में स्कूली बच्चों के पोषण के लिए है, या फिर यह राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं की जेब भरने का जरिया बनती जा रही है? अब देखना यह है कि शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन इस पूरे मामले में निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाते हैं या नहीं। बच्चों के पोषण से जुड़ी योजना पर राजनीति भारी पड़ी तो इसका खामियाजा सीधे स्कूली बच्चों को भुगतना पड़ेगा।
स्थानीय बाहरी का ही यदि है मुद्दा,एक ही समूह का नाम क्यों आ रहा बाहर,अन्य समूहों को प्रकिया में क्यों नहीं किया जा रहा शामिल?- पूरे मामले में यह सवाल उठ रहा है कि यदि मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम का बेहतर संचालन करने वाले किसी समूह को यदि बाहरी और स्थानीय मुद्दे पर ही हटाया जा रहा है तो फिर अन्य स्थानीय समूहों को भी प्रकिया में क्यों शामिल नहीं किया जा रहा है,केवल एक ही समूह का नाम क्यों प्रस्तावित किया जा रहा है, बताया जा रहा है एक खास समूह जो एक स्थानीय स्तर के राजनीतिक दल के कार्यकर्ता का समूह है उसे ही यह जिम्मेदारी दिए जाने की तैयारी है अन्य स्थानीय समूहों को कोई जानकारी प्रदान नहीं की गई है कि संचालन समूह में बदलाव का कोई कार्य किया जा रहा है।
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