रायपुर,08 जनवरी 2026। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत भारत सरकार द्वारा लागू की गई ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री व्यवस्था में छत्तीसगढ़ ने उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। राज्य में विद्यार्थियों की स्थायी डिजिटल शैक्षणिक पहचान बनाने की दिशा में तेजी से काम किया गया है, जिसका असर आंकड़ों में साफ नजर आ रहा है। जानकारी के अनुसार, छत्तीसगढ़ के 57,045 स्कूलों में पढ़ने वाले कुल 57,10,207 विद्यार्थियों में से 50,60,941 छात्रों की ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री आईडी सफलतापूर्वक तैयार की जा चुकी है। यह कुल का 88.63 प्रतिशत है, जो प्रतिशत के आधार पर देश के बड़े राज्यों में सबसे अधिक माना जा रहा है। इसे राज्य के लिए डिजिटल शिक्षा ढांचे की दिशा में बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। जिलावार स्थिति पर नजर डालें तो बेमेतरा (96.40′) और राजनांदगांव (96.38′) जिलों में सबसे अधिक विद्यार्थियों की ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री आईडी बनाई गई है। इसके अलावा रायगढ़,कोरिया,रायपुर,कोरबा,धमतरी,दुर्ग और बलौदाबाजार जैसे जिलों में भी 93 प्रतिशत से अधिक छात्रों की आईडी तैयार हो चुकी है। राज्य के केवल पांच जिले—नारायणपुर, बीजापुर, सुकमा, बलरामपुर और दंतेवाड़ा ऐसे हैं, जहां अब तक 80 प्रतिशत से कम विद्यार्थियों की ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री आईडी बन पाई है। हालांकि इन जिलों में भी शेष छात्रों की आईडी बनाने का कार्य लगातार जारी है। भारत सरकार ने सभी राज्यों को निर्देश दिए हैं कि 31 जनवरी 2026 तक सभी विद्यार्थियों की ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री आईडी अनिवार्य रूप से तैयार कर ली जाए। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए छत्तीसगढ़ में स्कूल स्तर पर शिक्षकों और शिक्षा विभाग की टीम लगातार काम कर रही है। ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री आईडी के माध्यम से प्रत्येक विद्यार्थी को एक स्थायी डिजिटल शैक्षणिक पहचान मिलती है। इसमें छात्र की शैक्षणिक उपलब्धियां,प्रमाण-पत्र, मार्कशीट और क्रेडिट्स सुरक्षित डिजिटल रूप में दर्ज रहते हैं।
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