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बैकुंठपुर@बैंक नहीं…कर्ज का जाल! रिश्वत,फर्जी साइन और सूदखोरी का संगठित खेल,यूको बैंक बैकुंठपुर की शाखा पर गंभीर आरोप

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  • बैंक नहीं,कर्ज¸ का जाल यूको बैंक बैकुंठपुर में रिश्वत,फर्जी साइन और सूदखोरी का संगठित खेल
  • 18–22 साल के युवाओं को कर्ज¸ में धकेला गया, यूको बैंक मैनेजर–भाई की जोड़ी पर गंभीर आरोप
  • जहाँ भरोसा होना था,वहाँ वसूली चली,यूको बैंक बैकुंठपुर कटघरे में
  • फर्जी हस्ताक्षर से लोन,चेक बाउंस की सूचना रोकी गई:यूको बैंक शाखा प्रबंधक पर जांच की मांग
  • दोस्ती का झांसा, लोन का फंदा: यूको बैंक में युवाओं के भविष्य से खिलवाड़
  • सार्वजनिक बैंक में निजी सूदखोरी? यूको बैंक बैकुंठपुर की कार्यप्रणाली पर सवाल

-जिला प्रतिनिधि-
बैकुंठपुर,07 जनवरी 2026 (घटती-घटना)।
जिस बैंक पर जनता की गाढ़ी कमाई और भविष्य की सुरक्षा की जिम्मेदारी होती है, वही बैंक यदि युवाओं को जबरन कर्ज में फंसाने, रिश्वत लेकर लोन बांटने,फर्जी हस्ताक्षरों से ऋण स्वीकृत कराने और सूदखोरी के धंधे का माध्यम बन जाए,तो यह केवल अनियमितता नहीं,बल्कि संगठित वित्तीय अपराध का संकेत है,यूको बैंक की बैकुंठपुर शाखा पर लगे आरोप ठीक इसी भयावह तस्वीर को उजागर करते हैं। शहर की यूको बैंक शाखा बैकुंठपुर इन दिनों गंभीर आरोपों के घेरे में है,शाखा प्रबंधक और उनके भाई पर युवाओं को कथित तौर पर रिश्वत लेकर लोन में फंसाने,फर्जी हस्ताक्षरों से ऋण स्वीकृत कराने,चेक बाउंस की सूचना रोकने और सूदखोरी के लिए बैंक तंत्र के दुरुपयोग जैसे गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं, इन आरोपों के सामने आने के बाद बैंकिंग व्यवस्था, ग्राहकों की गोपनीयता और युवाओं की आर्थिक सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं,अब यह मामला केवल आरोप बनाम आरोप नहीं रहा,कानूनी नोटिस जैसे आधिकारिक दस्तावेज यह दर्शाते हैं कि युवाओं को पहले आर्थिक जाल में फंसाया गया,फिर कानूनी डर दिखाकर दबाया गया, यदि समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं हुई,तो यह प्रकरण सार्वजनिक बैंकिंग व्यवस्था पर गहरा दाग बन सकता है।


यूको बैंक बैकुंठपुर प्रकरण: कानूनी नोटिसों से खुला लोन–चेक–सूदखोरी का पूरा खेल- यूको बैंक बैकुंठपुर शाखा से जुड़े कथित लोन घोटाले, युवाओं को कर्ज¸ में फंसाने और बैंकिंग तंत्र के दुरुपयोग के मामले में अब ठोस दस्तावेज़ सामने आ चुके हैं, पीडç¸त युवक के विरुद्ध भेजे गए नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881 की धारा 138(बी) के तहत दो कानूनी नोटिस इस पूरे प्रकरण को केवल आरोप नहीं, बल्कि दस्तावेज़ी सच्चाई में बदल देते हैं, ये नोटिस यह संकेत देते हैं कि कैसे पहले युवाओं को लोन/लेन–देन में उलझाया गया और बाद में चेक बाउंस व कानूनी दबाव के ज़रिये उन्हें मानसिक, आर्थिक और सामाजिक रूप से तोड़ने की कोशिश की गई।


दस्तावेज़–1 : पहला कानूनी नोटिस (दिनांक 25 अक्टूबर 2025)– यूको बैंक शाखा प्रबंधक के भाई के अधिवक्ता: मुकेश कुमार के पहले नोटिस में निम्न तथ्य दर्ज हैं नोटिस के प्रमुख बिंदु के अनुसार अगस्त 2025 में ₹18,17,000 (अठारह लाख सत्रह हजार) को “फ्रेंडली लोन” बताया गया यह राशि निजी उपयोग हेतु लेने का उल्लेख 6 माह में भुगतान का समझौता अंतिम तिथि 18.08.2025 बताई गई, आंशिक भुगतान के नाम पर 6,00,000 का चेक दिनांक 07.10.2025 एचडीएफसी बैंक पर ड्रॉ यह चेक 09.10.2025 को खाते में पैसा नहीं होने कारण से बाउंस बताया गया 15 दिन में भुगतान नहीं होने पर आपराधिक कार्यवाही (एनआई एक्ट 138) की धमकी दी गई, महत्वपूर्ण तथ्य यह नोटिस स्पष्ट करता है कि लेन–देन को बैंकिंग लोन नहीं, बल्कि “फ्रेंडली लोन” बताया गया, जबकि यह मामला उसी युवक से जुड़ा है जिसके खाते, लोन और बैंक गतिविधियां यूको बैंक बैकुंठपुर से जुड़ी बताई जा रही हैं।
दस्तावेज़–2 : दूसरा कानूनी नोटिस (दिनांक 06 दिसंबर 2025)- दूसरा नोटिस पहले से कहीं अधिक गंभीर और संदिग्ध परिस्थितियों को उजागर करता है, दूसरे नोटिस में नए तथ्य, पहले नोटिस (25.10.2025) के बाद युवक ने “आगे कार्रवाई न करने” का अनुरोध किया, 16.11.2025 को मुलाकात का दावा, युवक द्वारा देयता स्वीकार करने की बात लिखी गई, इसके बाद पूरी विवादित राशि ₹18,17,000 का दूसरा चेक दिनांक 17.11.2025 फिर से एचडीएफसी बैंक पर ड्रॉ, यह चेक भी 18.11.2025 को पैसा नहीं होने के कारण से बाउंस अब पूरे ₹18,17,000 की मांग 15 दिन में भुगतान नहीं होने पर जेल और जुर्माने की चेतावनी।
दस्तावेज़ों से निकलते बेहद गंभीर सवाल
सवाल नंबर 1. दो-दो चेक क्यों?
जब ₹6 लाख का चेक पहले ही बाउंस हो गया था, तो पूरी राशि का दूसरा चेक क्यों लिया गया?
सवाल नंबर 2. बैंक सूचना क्यों नहीं?
खाताधारक को न SMS न कॉल न बैंक इंटीमेशन सीधे वकील का नोटिस — यह सामान्य प्रक्रिया नहीं है।
सवाल नंबर 3. यूको बैंक और एचडीएफसी बैंक का संबंध?
विवाद यूको बैंक बैकुंठपुर से जुड़ा लेकिन सभी चेक एचडीएफसी बैंक पर क्या यह जानबूझकर चुना गया रास्ता था?
सवाल नंबर 4. “फ्रेंडली लोन” या सूदखोरी?
लाखों की रकम, बार-बार चेक, कानूनी दबाव यह फ्रेंडली लोन नहीं, बल्कि संगठित वसूली मॉडल प्रतीत होता है।
यूको बैंक बैकुंठपुर से सीधा लिंक- पहले सामने आए आरोपों में कहा गया था कि युवाओं को यूको बैंक से मुद्रा लोन अन्य लोन जबरन दिलवाए गए, खातों की जानकारी का दुरुपयोग हुआ और बाद में निजी सूदखोरी के लिए चेक और नोटिस का सहारा लिया गया, अब ये कानूनी नोटिस उसी कहानी की दस्तावेज़ी कड़ी बनते दिख रहे हैं।
अब जांच क्यों जरूरी हो गई है इन दस्तावेज़ों के सामने आने के बाद निम्न बिंदुओं पर जांच अनिवार्य हो जाती है—

  • यूको बैंक बैकुंठपुर के सभी युवा खाताधारकों के लोन
  • चेक इश्यू की टाइमलाइन
  • बैंक से सूचना रोके जाने की भूमिका
  • बैंक अधिकारियों और निजी व्यक्तियों का गठजोड़
  • क्या बैंकिंग डेटा का उपयोग निजी वसूली में हुआ?

    18–22 वर्ष के युवाओं को टारगेट कर ‘लोन फँसाओ’ मॉडल- सूत्रों और पीडç¸तों के बयानों के अनुसार, शाखा से जिन ऋणों का वितरण हुआ, उनमें बड़ी संख्या 18 से 22 वर्ष के युवाओं की बताई जा रही है, आरोप है कि कई युवाओं को “दोस्ती” और “आसान लोन” का झांसा दिलाकर मुद्रा लोन और अन्य ऋण दिलाए गए, जबकि उनमें से कई न तो वास्तविक व्यवसाय कर रहे थे और न ही व्यापार से उनका कोई संबंध था, कई मामलों में युवाओं के परिवार तक को लोन की जानकारी नहीं थी, परिणामस्वरूप आज अनेक खाते एनपीए बनने की कगार पर हैं और युवा कर्ज¸ के बोझ तले दब गए हैं।
    फर्जी हस्ताक्षर: कानून का खुला मज़ाक- सबसे चौंकाने वाला आरोप एक मामले से जुड़ा है, जिसमें एक व्यक्ति के नाम पर फर्जी हस्ताक्षर कर लोन स्वीकृत कर दिया गया, जब संबंधित व्यक्ति ने विरोध किया, तो उसके खाते में ₹7 लाख डाल दिए गए, लेकिन ₹1 लाख आज भी बकाया बताया जा रहा है, जिससे लोन खाता बंद नहीं हो पा रहा, यही नहीं, आरोप है कि इस राशि में से ₹3 लाख एक वेंडर को दिए गए, जिसका संबंध कथित तौर पर ट्रैक्टर शोरूम संचालक के बेटे से बताया जा रहा है, यह पूरा लेन–देन बैंकिंग नियमों के उल्लंघन की आशंका पैदा करता है, यह क्या है? अपराध छुपाने की कोशिश? पीडç¸त को चुप कराने का तरीका? या बैंकिंग रिकॉर्ड से खेल?
    चेक बाउंस की सूचना रोकी गई?- कई खाताधारकों ने आरोप लगाया कि उनके खातों पर चेक प्रस्तुत होने और चेक बाउंस की जानकारी उन्हें न तो एसएमएस से मिली और न ही बैंक से फोन आया, जबकि सामान्य बैंकिंग प्रक्रिया में खाताधारक को पूर्व सूचना और कन्फर्मेशन दिया जाता है, एक पीड़ित के अनुसार, उसके दो चेक (एक ₹6 लाख और दूसरा लगभग ₹18.17 लाख) कथित तौर पर शाखा प्रबंधक के भाई के एचडीएफसी बैंक खाते में लगाए गए और बाउंस कराए गए, लेकिन खाताधारक को इसकी कोई जानकारी नहीं दी गई, सीधे वकील का नोटिस भेजा गया।
    खाते में पैसा दिखते ही ‘उधारी’ का दबाव?- एक अन्य खाताधारक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि शाखा प्रबंधक स्वयं खातों की निगरानी करते थे और खाते में पैसा दिखते ही उधारी मांगते थे “कल लौटा देंगे, परसों लौटा देंगे, पैसा वापस न मिलने पर कई लोगों ने खाते में रकम रखना ही बंद कर दिया, यह आरोप सीधे तौर पर ग्राहक गोपनीयता और अधिकारों के उल्लंघन की ओर इशारा करता है, सवाल यह भी उठता है कि क्या किसी शाखा प्रबंधक को हर खाताधारक का बैलेंस देखने और निजी उधारी मांगने का अधिकार है? यह आरोप ग्राहक गोपनीयता और अधिकारों के घोर उल्लंघन की ओर इशारा करता है। सवाल साफ है, क्या बैंक मैनेजर निजी उधारी के लिए खातों का इस्तेमाल कर सकता है?
    सूदखोरी का धंधा, बैंक का चेक, खतरनाक गठजोड़– आरोप है कि शाखा प्रबंधक के भाई द्वारा चलाए जा रहे कथित सूदखोरी के धंधे में यूको बैंक के चेक का ही इस्तेमाल होता है, क्योंकि बैंक में भाई के प्रबंधकीय प्रभाव के चलते सूचनाएं और प्रक्रियाएं नियंत्रित की जाती हैं, एक पीडç¸त ने दावा किया कि उसे ₹6 लाख दिए गए, उसने ₹4 लाख लौटा दिए, फिर भी ₹18 लाख से अधिक के चेक लगाकर बाउंस कराए गए, यह वसूली नहीं, डर का कारोबार है।
    नियमों पर सवाल, जांच की मांग तेज- बैंकिंग नियमों के अनुसार, चेक प्रस्तुत होने, बाउंस की स्थिति और खाते की गतिविधियों की जानकारी खाताधारक को दी जाती है, आरोप है कि इन मामलों में जानबूझकर सूचना रोकी गई, ताकि वसूली का दबाव बनाया जा सके, इन गंभीर आरोपों के बाद शाखा प्रबंधक और उनके भाई के खिलाफ उच्चस्तरीय जांच, सभी लोन खातों की ऑडिट, सीसीटीवी व डिजिटल लॉग की फॉरेंसिक जांच, और पीड़ित युवाओं को राहत देने की मांग तेज हो गई है।
    भरोसे पर चोट- स्थानीय लोगों का कहना है कि जहां बैंक पर भरोसा होना चाहिए, वहीं अब “रिश्वत और दबाव” की चर्चा आम हो गई है, यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला केवल एक शाखा तक सीमित न रहकर पूरे बैंकिंग सिस्टम की साख पर सवाल खड़ा करेगा।
    नियमों की धज्जियां, जवाबदेही कहाँ?- बैंकिंग नियम स्पष्ट हैं की चेक प्रस्तुत होने/बाउंस की सूचना, खाताधारक की पुष्टि, पारदर्शी क्रेडिट असेसमेंट, हितों का टकराव से बचाव यदि आरोप सही हैं, तो यह प्रणालीगत विफलता नहीं, जानबूझकर किया गया दुरुपयोग है, बैंक जनता का सहारा होता है, शोषण का औज़ार नहीं, यदि इन आरोपों पर समय रहते कठोर कदम नहीं उठे, तो यह मामला केवल एक शाखा तक सीमित नहीं रहेगा, यह पूरे सार्वजनिक बैंकिंग सिस्टम की साख को चोट पहुँचाएगा।
    मांगें: अब लीपापोती नहीं, कड़ी कार्रवाई स्थानीय नागरिकों और पीडç¸तों की मांगें स्पष्ट हैं—
    स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच (बैंक से बाहर की एजेंसी)
    सभी लोन खातों का विशेष ऑडिट (पिछले वर्षों सहित)
    सीसीटीवी, कॉल लॉग, एसएमएस गेटवे, कोर बैंकिंग लॉग की फॉरेंसिक जांच
    हितों के टकराव पर तत्काल कार्रवाई
    पीडत युवाओं को राहत, दंडात्मक ब्याज/दबाव पर रोक
    दोष सिद्ध होने पर निलंबन, आपराधिक प्रकरण और रिकवरी

    डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट पीडतों के बयानों, दस्तावेज़ों और सूत्रों पर आधारित आरोपों पर आधारित है, बैंक प्रबंधन/आरोपित पक्ष का पक्ष प्राप्त होते ही उसे समान प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा, यह रिपोर्ट उपलब्ध कानूनी दस्तावेज़ों और पीडç¸त पक्ष के बयानों पर आधारित है, आरोपित पक्ष या बैंक प्रबंधन का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी समान प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।


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