- टूटा जूता पड़ड़ेगा सर में और नये भी देने होंगे,महिला से कही ऐसी बात।
- क्या प्रभारी साहब पत्रकार को पकड़डऩे इतना दौड़े की जूता टूट गया ?
- क्या विभागीय जूते इतने होते है कमजोर?
- महिला व नाबालिग से दुव्र्यवहार करने वाले थाना प्रभारी पर कार्यवाही की मांग।
- महिला ने मुख्यमंत्री से की शिकायत,जल्द करे कार्यवाही।
-रवि सिंह-
बैकुंठपुर 06 मार्च2022 (घटती घटना)। वायरल चैट मामले में पुलिस के चेहरे से नकाब उठ़ा सबके सामने लाने के साथ विशेष समुदाय के लिये कही आपत्तिजनक बात कहने वाले पुलिसकर्मियों को छोड़ पुलिस ने पत्रकार को अपना निशाना बना लिया। पुलिस खुद प्रार्थी बन कर आनन-फानन में पत्रकार को पकड़ने उनके कार्यस्थल पर जा पहुंची और उनके साथ कार्यरत महिला सहकर्मी के साथ खूब बदतमीजी करते हुये, महिला सहकर्मी के नाबालिक बच्चे तक को नहीं छोड़ा। पत्रकार को पकड़ने के चक्कर में महिला व नाबालिग को पकड़ कर परेशान करते हुये महिला को जूता दिखाते हुये यह तक कहा कि जूते टूट गए अब नया जूता लेना पड़ेगा यह बात कोई और नहीं मनेंद्रगढ़ में पदस्थ थाना प्रभारी उप निरीक्षक सचिन सिंह ने कही थी इन्होंने पत्रकार को पकड़ने में सबसे ज्यादा अपनी मर्यादा लांघने वाले पुलिसकर्मी थे। जूता टूटने पर महिला को जूता खरीदने की बात कह रहे थे ऐसे प्रभारी पर क्या कार्रवाई होगी फिलहाल ऐसे प्रभारियों पर कार्रवाई करने के लिए महिला ने प्रदेश के मुखिया को पत्र लिखकर अपनी आप बीती बताई है और परेशान करने वाले चारों पुलिस कर्मचारियों जो क्रमश: पर कार्रवाई की मांग की है। जबकि इस मामले को लेकर प्रदेशभर में ज्ञापन सौंपकर गलत कार्यवाही करने वाले पुलिसकर्मियों पर कार्यवाही करने की मांग की गयी है फिर भी पुलिस अपने हरकतों से बाज नहीं आ रही है और जांच को प्रभावित करने में ऐड़ी-चोटी लगा रही है।
पुलिस वालो पर महिला का आरोप
वायरल चैट मामले में खबर प्रकाशन करने वाले पत्रकार पर मामला पंजीबद्ध किया फिर उसे अपराधी की भांति उसे पकड़ने में कोरिया पुलिस अपनी मर्यादा भी भूल बैठी कि कैसे किसी महिला से बात करनी चाहिए और नाबालिक बच्चे से कैसे पेश आना चाहिऐ। इसी कड़ी में पिड़ित शिकायतकर्ता महिला ने कहा की बिना सर्च वारंट के मेरे घर में बिना महिला पुलिस के घुस गये और मुझे जबदस्ती अपने जिले से दूसरे जिले तक पुलिस द्वारा निजी वाहन में घुमाया गया। मेरे साथ रह रहे में 15 वर्षीय बेटे को भी थाने ले जाकर उसे डराया-धमकाया गया। बिना अपराध के पुछताछ के नाम पर उन्होंने कहा कि साहब नीचे बुला रहे है जब मुझे पुलिस वाले नीचे ले गये और जबरदस्ती मुझे गाड़ी में बैठा कर कहा कि सूरजपुर थाने ले जा रहे हैं और पटना थाना ले आए, लाते समय नवीनदत्त तिवारी ने किसी निजी वाहन में धक्के मारते हुये और आपत्ती जनक तरीके से मुझे पकड़कर घर से बाहर लाया था और दुर्व्यवहार करते हुये मुझे गाड़ी में बैठाया गया। मुझे सचिन सिंह के बगल में बैठाकर उस गाड़ी से पटना थाना लाया गया। मुझ पर जबरदस्ती दबाव बनाकर मुझसे पत्रकार रवि सिंह के बारे में पूछा जा रहा था और रवि के खिलाफ सचिन सिंह व सौरव द्विवेदी द्वारा गलत तरीके से झूठा मामला दर्ज कराने का दबाव बनाने लगे। बार बार यह कर रहे थे की रवि सिंह नहीं मिला तो तुम रवि के खिलाफ केस फाइल करोगी नहीं तो तुम्हे और बच्चे दोनों को गांजे में फसा कर अन्दर कर देंगे। आरोपी जैसे व्यवहार करते हुये कोरिया में पदस्थ प्रधान आरक्षक नवीनदत्त तिवारी, पटना थाना प्रभारी सौरव द्विवेदी, मनेंद्रगढ़ थाना प्रभारी सचिन सिंह व साइबर सेल पुष्कल सिन्हा यह वह नाम है जिनके द्वारा सबसे ज्यादा पताड़ित किया गया। इनके द्वारा मेरे चरित्र को लेकर तरह-तरह की अषोभनीय बाते कहते हुये मेरा बाल पकड़कर खिंचा गया। मैं मानसिक रूप से आहत हूं। मेरा नाबालिक बच्चा भी इस पूरे मामले से काफी डरा-सहमा हुआ है। जबकि इन पूरे मामले में मेरा और रवि सिंह का सम्बन्ध सिर्फ इतना है कि हम दोनों एक ही कम्पनी में कार्यरत है और वह मेरे सहकर्मी है।
क्या कहते है मनेन्द्रगढ के थाना प्रभारी महिला से
महिला के अनुसार सचिन सिंह ने परेशान करते हुये मुझे पटना थाना ले जाते समय वह मेरे बगल में बैठे रहे। पूरे रास्ता भर अपना जुता दिखाया और डंडे से मारने की धमकी दी और जूता दिखाते हुये कहा कि जुता टूट गया है अब यह जूता तुम्हीं पर पूरा टूटेगा क्योंकि अब मुझे नया जूता लेना है। तुम्हारे बेटे की जिन्दगी बर्बाद कर दूंगा अब तेरा बेटा कुत्ता बनेगा और अब तेरा बेटा ही तेरा मर्डर करेगा। तुमलोगों को कही का नही छोड़ूगा और तुम्हारी भी जिन्दगी बर्बाद हो जायेगी मैं जिस प्रकार रात के परिधान में थी उसी हालत में मुझे दो जिला घुमाया गया।
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