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कोरिया@पिस्ता इन का नववर्ष आयोजन..उत्सव के मंच से उठा सियासी तूफान

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  • निष्कासित नेता,बदला प्रोटोकॉल और भाजपा की अंदरूनी राजनीति पर खड़े सवाल
  • निष्कासित नेता के मंच पर भाजपा की मौजूदगी,पिस्ता इन का नववर्ष आयोजन बना सियासी बहस
  • निष्कासन कागजों में,मंच पर साथ-साथः पिस्ता इन के नववर्ष आयोजन ने खोले भाजपा के भीतर के विरोधाभास
  • जिसे पार्टी से निकाला,उसी के कार्यक्रम में जुटे मंत्री-विधायक, बदले प्रोटोकॉल ने बढ़ाई हलचल
  • कोरिया@भाजपा अनुशासन पर सवालः निष्कासित चेहरे के आयोजन में क्यों पहुंचे मंत्री और विधायक?
  • पिस्ता इन का जश्न या संगठन की परीक्षा? नववर्ष मंच से उठा भाजपा की अंदरूनी राजनीति का तूफान
  • उत्सव के मंच पर सियासतः पिस्ता इन प्रकरण और भाजपा की असहज चुप्पी

-रवि सिंह-
कोरिया,05 जनवरी 2026 (घटती-घटना)। नगर पंचायत पटना में स्थित पिस्ता इन में आयोजित अंग्रेज़ी नववर्ष समारोह ने केवल सांस्कृतिक या सामाजिक चर्चा नहीं बटोरी, बल्कि यह आयोजन धीरे-धीरे राजनीतिक बहस और संगठनात्मक असहजता का केंद्र बन गया, वजह यह रही कि जिस व्यक्ति को भाजपा द्वारा पूर्व में निष्कासित किया गया बताया जाता है, उसी के नाम से जुड़े आयोजन में भाजपा के बड़े चेहरे एक मंच पर दिखाई दिए।
बता दे की पिस्ता इन का नववर्ष कार्यक्रम अब केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं रह गया है,यह भाजपा की अंदरूनी राजनीति, नेतृत्व के बीच तालमेल और संगठनात्मक संदेश को लेकर कई अनुत्तरित सवाल छोड़ गया है,आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी नेतृत्व इन सवालों पर क्या रुख अपनाता है, स्पष्टीकरण देता है या फिर यह मामला भी बाकी राजनीतिक चर्चाओं की तरह धीरे-धीरे ठंडे बस्ते में चला जाता है।
पुरानी घटनाएं और नई नाराजगी- सूत्र बताते हैं कि जनपद चुनाव के दौरान टिकट न मिलने को लेकर विवाद हुआ था, जिसमें वर्तमान भाजपा विधायक और जिलाध्यक्ष के साथ कथित रूप से आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल हुआ, इसके बाद संबंधित व्यक्ति पर पार्टी स्तर पर कार्रवाई की बात कही गई, ऐसे में उसी व्यक्ति से जुड़े आयोजन में भाजपा के मंत्री-विधायकों की मौजूदगी ने कई सवाल खड़े कर दिए…
– क्या निष्कासन केवल काग़ज़ी कार्रवाई थी?
– क्या कार्यक्रम को ‘भव्य’ बनाने के लिए भाजपाइयों का ही सहारा लिया गया?
– प्रभारी मंत्री का प्रोटोकॉल किसके बुलावे पर बदला गया?
– भाजपा जिलाध्यक्ष की कार्यक्रम से दूरी क्या संगठनात्मक असहमति का संकेत है?
संगठन के लिए संदेश या असहज चुप्पी?… राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह आयोजन भाजपा की स्थानीय राजनीति में अनुशासन बनाम व्यवहारिक राजनीति की खींचतान को उजागर करता है, एक ओर पार्टी अनुशासन और कार्रवाई की बात करती है, वहीं दूसरी ओर मंच पर दिखाई देने वाली तस्वीरें अलग कहानी कहती हैं।
पिस्ता इन का सफरः मोटल से आयोजन स्थल तक
पटना क्षेत्र में वर्षों पहले स्वर्गीय डॉ. रामचंद्र सिंहदेव के प्रयासों से पर्यटन विभाग द्वारा इस मोटल का निर्माण कराया गया था,उद्देश्य था…आवागमन करने वालों को ठहरने की सुविधा,साथ ही सामाजिक आयोजनों के लिए एक उपयुक्त स्थल, शुरुआती वर्षों में जागरूकता की कमी के कारण यह सुविधा आम लोगों तक पूरी तरह नहीं पहुंच पाई, समय बदला,सोच बदली और कांग्रेस शासनकाल में यह मोटल लीज़ पर दे दिया गया, जिसके बाद इसे पिस्ता इन के नाम से विकसित किया गया, अलग-अलग संचालकों के प्रयास असफल होते रहे,लेकिन वर्तमान में इसका संचालन पूर्व कोरिया भाजपा जिलाध्यक्ष के भाई द्वारा अधिकृत व्यक्ति से मासिक किराए पर किए जाने की चर्चा है।
मंत्री-विधायकों की मौजूदगी से बढ़ी हलचल
कार्यक्रम में प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, कृषि मंत्री व प्रभारी मंत्री राम विचार नेताम तथा भरतपुर-सोनहत विधायक रेणुका सिंह की उपस्थिति ने आयोजन को और अधिक सुर्खियों में ला दिया, जानकारों के अनुसार, कार्यक्रम से पहले केवल स्वास्थ्य मंत्री के आगमन की चर्चा थी, लेकिन बाद में प्रभारी मंत्री का दौरा तय हुआ, इसी दौरान प्रोटोकॉल में कई बार बदलाव किए जाने की बातें सामने आईं, जिसने सियासी गलियारों में अटकलों को हवा दी।
प्रचार-प्रसार या सियासी संतुलन?
नववर्ष के मौके पर आयोजित यह कार्यक्रम आधिकारिक तौर पर पिस्ता इन के प्रचार-प्रसार और इसे एक पहचान दिलाने के उद्देश्य से रखा गया बताया गया, सांस्कृतिक कार्यक्रमों में इंडियन आइडल फेम गायिका खुशबू शर्मा और साजन की प्रस्तुति ने माहौल को जोशीला बना दिया, लेकिन सवाल यहीं से उठने लगे, क्या यह केवल प्रचार का कार्यक्रम था या फिर इसके पीछे राजनीतिक समीकरणों को साधने की कोशिश भी शामिल थी?


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