- एकलव्य विद्यालय बना भ्रष्टाचार का अड्डा…2023 की खबरें हुई सच साबित,गुम फाइल से खुली पोल…
- सत्ता के साये में दबा रहा आदिवासी शिक्षा घोटाला,अब खड़गवां एकलव्य मामले में प्रशासन जागा…
- कांग्रेस काल में जांच,भाजपा शासन में कार्रवाईः खड़गवां एकलव्य भ्रष्टाचार केस में बड़ा मोड़…
- आदिवासी बच्चों की थाली से चोरीः खड़गवां एकलव्य विद्यालय घोटाले में जिम्मेदारों पर शिकंजा…
- फाइलें गुम,हक लुटाः खड़गवां एकलव्य स्कूल घोटाले ने खोली सिस्टम की परतें…



-रवि सिंह-
एमसीबी/खड़गवां,03 जनवरी 2026(घटती-घटना)। नवगठित जिला मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर के खड़गवां विकासखंड में संचालित एकलव्य आदिवासी आवासीय विद्यालय पोड़ीडीह में वर्षों तक चले कथित भ्रष्टाचार के मामले में आखिरकार प्रशासन ने कार्रवाई का डंडा उठाना शुरू कर दिया है,आदिवासी छात्र-छात्राओं को मिलने वाली शासकीय सुविधाओं में हुई गंभीर अनियमितताओं को लेकर जिन खबरों का प्रकाशन दैनिक घटती-घटना ने वर्ष 2023 तक लगातार किया था,वही अब जांच और निलंबन आदेशों के रूप में सही साबित होती दिख रही हैं,यह मामला अब केवल प्रशासनिक लापरवाही का नहीं,बल्कि सत्ता-प्रभाव,फाइल गायब कराने और आदिवासी अधिकारों पर सुनियोजित चोट का गंभीर उदाहरण बनकर सामने आया है,खड़गवां एकलव्य आवासीय विद्यालय का यह मामला छत्तीसगढ़ में आदिवासी कल्याण योजनाओं की निगरानी और जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा करता है अब वक्त है कि प्रशासन यह साबित करे कि आदिवासी छात्रों के हक पर डाका डालने वालों के लिए सिस्टम में कोई जगह नहीं है, और ऐसी सख्त नजीर बने कि भविष्य में कोई भी इस तरह की गलती करने की हिम्मत न करे।
बड़ा सवालःक्या निलंबन ही अंतिम कार्रवाई होगी?
इस पूरे प्रकरण में अब सबसे अहम सवाल यह है कि क्या यह मामला केवल निलंबन तक ही सीमित रहेगा? क्या दोषी पाए गए कर्मचारियों से शासकीय राशि की वसूली की जाएगी? क्या उनके खिलाफ दंड प्रक्रिया के तहत विभागीय के साथ-साथ आपराधिक कार्रवाई भी होगी? विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों का मानना है कि आदिवासी छात्र-छात्राओं की सुविधाओं में चोरी करना केवल वित्तीय अपराध नहीं,बल्कि सामाजिक अपराध भी है। यदि इस मामले में कड़ी वसूली और दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई,तो यह भ्रष्टाचार के खिलाफ कमजोर संदेश देगा।
आदिवासी अधिकारों से जुड़ा संवेदनशील मामला…
यह पूरा प्रकरण आदिवासी समुदाय के अधिकार,शिक्षा और सम्मान से सीधे जुड़ा हुआ है। एकलव्य विद्यालय जैसे संस्थानों में भ्रष्टाचार न केवल बच्चों के वर्तमान को नुकसान पहुंचाता है,बल्कि उनके भविष्य पर भी गहरा असर डालता है,अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस मामले में उदाहरणात्मक कार्रवाई कर पाता है या नहीं, यदि दोषियों को केवल निलंबित कर छोड़ दिया गया,तो यह न्याय नहीं बल्कि आधा-अधूरा फैसला माना जाएगा।
स्थापना के साथ ही शुरू हो गया था भ्रष्टाचार का सिलसिला
एकलव्य आवासीय विद्यालयों की परिकल्पना आदिवासी बच्चों को बेहतर आवासीय शिक्षा,पौष्टिक भोजन,वस्त्र,शैक्षणिक सामग्री और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी,लेकिन खड़गवां के पोड़ीडीह स्थित इस विद्यालय में स्थापना काल से ही जिम्मेदार पदों पर बैठे अधिकारियों-कर्मचारियों ने इस उद्देश्य को ही कमजोर कर दिया,आरोप है कि छात्रावास,भोजन व्यवस्था,दैनिक उपयोग की सामग्री,रखरखाव और अन्य मदों में शासन से प्राप्त राशि का वर्षों तक दुरुपयोग किया गया। आदिवासी छात्र-छात्राओं की बुनियादी सुविधाओं में लगातार कटौती कर राशि की बंदरबाट की जाती रही।
कोरोना काल में भी नहीं बख्शी गई शासकीय राशि…
सूत्रों और जांच रिपोर्ट के अनुसार, कोरोना महामारी जैसे संवेदनशील दौर में भी विद्यालय के नाम पर प्राप्त बजट का दुरुपयोग किया गया। जब पूरा देश संकट से जूझ रहा था और आदिवासी परिवार सबसे अधिक प्रभावित थे,उसी समय कुछ जिम्मेदारों ने बच्चों की सुविधाओं पर सेंध लगाकर सरकारी धन का निजी लाभ उठाया,यह भ्रष्टाचार किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं था, बल्कि अलग-अलग समय पर विद्यालय में विभिन्न प्रभार संभालने वाले कई लोगों की भूमिका इसमें संदिग्ध पाई गई है।
2023 में जांच, दोषी चिन्हित,फिर भी कार्रवाई क्यों नहीं?
दैनिक घटती-घटना द्वारा लगातार खबरें प्रकाशित होने के बाद कांग्रेस शासनकाल में ही इस पूरे मामले की विभागीय जांच शुरू की गई थी। जांच में कई तत्कालीन जिम्मेदार प्रथम दृष्टया दोषी भी पाए गए थे, इसके बावजूद न तो निलंबन हुआ और न ही वसूली या दंडात्मक कार्रवाई, सबसे गंभीर आरोप यह है कि दोषियों को बचाने के लिए सत्ता-शासन के प्रभाव का इस्तेमाल किया गया और पूरी जांच फाइल ही गायब करा दी गई। बताया जाता है कि जिन पर आरोप थे,वे राजनीतिक रूप से प्रभावशाली लोगों से जुड़े हुए थे या उनके परिजन थे,जिसके कारण कार्रवाई को वर्षों तक रोके रखा गया।
फाइल दोबारा सामने आई,अब शुरू हुई कार्रवाई…
लंबे अंतराल के बाद,जब इस मुद्दे को दैनिक घटती घटना ने फिर से प्रमुखता से उठाया,तब प्रशासनिक स्तर पर खोज-पड़ताल तेज हुई। इसके बाद वह जांच फाइल पुनः सामने आई, जिसमें दोषियों की पहचान पहले ही की जा चुकी थी,अब भाजपा शासनकाल में उसी जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ी है। ताजा जानकारी के अनुसार,भ्रष्टाचार में शामिल रहे कई तत्कालीन जिम्मेदार कर्मचारियों के निलंबन आदेश जारी किए जा चुके हैं और आगे की कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur