एमसीबी,03 जनवरी 2026(घटती-घटना)। छत्तीसगढ़ में अधिकारी-कर्मचारी हड़ताल के दौरान मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में कलेक्टर कार्यालय से जुड़ा विवाद अब एक अहम प्रशासनिक मोड़ पर पहुंच गया है। हड़ताल के दौरान कार्यालय परिसर में कथित रूप से समर्थन मांगने के आरोप में निलंबित किए गए तीन शासकीय कर्मचारियों का निलंबन सरगुजा संभाग आयुक्त द्वारा निरस्त कर दिया गया है,साथ ही तीनों कर्मचारियों को उनके पूर्व पदस्थापना स्थान पर बहाल करने के आदेश भी जारी किए गए हैं,आयुक्त के आदेश के बाद यह मामला केवल कर्मचारियों की बहाली तक सीमित नहीं रहा,बल्कि प्रशासनिक अधिकार,प्रक्रिया और अनुशासन को लेकर व्यापक चर्चा का विषय बन गया है।
आयुक्त के आदेश में क्या कहा गया…
सरगुजा संभाग आयुक्त ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि निलंबन से पूर्व न तो कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस दिया गया, न ही स्पष्टीकरण या सुनवाई का अवसर प्रदान किया गया,यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है,इसी आधार पर निलंबन आदेशों को निरस्त करते हुए कर्मचारियों को बहाल करने के निर्देश दिए गए, आयुक्त ने यह भी स्पष्ट किया कि आदेश में कर्मचारियों के कृत्य को सही नहीं ठहराया गया है,बल्कि कार्रवाई की प्रक्रियागत त्रुटि को आधार बनाया गया है।
गुलाब कमरो का तीखा बयान…
पूर्व विधायक एवं छत्तीसगढ़ ट्रेड यूनियन काउंसिल के प्रांताध्यक्ष गुलाब कमरो ने निलंबन निरस्त होने को सत्य,संविधान और कर्मचारी एकता की जीत बताया। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई शुरू से ही एकपक्षीय, द्वेषपूर्ण और नियमविरुद्ध थी,गुलाब कमरो ने आरोप लगाया कि कर्मचारियों पर कठोर कार्रवाई करने वाला प्रशासन भ्रष्टाचार के मामलों में आंख मूंदे बैठा रहता है। उन्होंने यह भी कहा कि वे इस पूरे मामले में मुख्य सचिव से कलेक्टर के खिलाफ कार्रवाई की मांग करेंगे।
कर्मचारियों ने जताया आभार…
निलंबन निरस्त होने के बाद कर्मचारी प्रतिनिधि शंकर सुमन मिश्र, गोपाल सिंह,प्रेमचंद गुप्ता,गोपाल बुनकर और संजय पांडे ने गुलाब कमरो से मुलाकात कर उनके समर्थन के लिए आभार जताया। इस अवसर पर गुलाब कमरो ने कहा कि कर्मचारियों के अधिकारों की लड़ाई में वे हमेशा साथ खड़े रहेंगे।
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