2026 की दहलीज़ पर कोरिया: संकल्प, संभावनाएँ और नई राह
नया साल, नया कोरिया: उम्मीदों से भरा 2026
पर्यटन और ईको-टूरिज्म का हब बने कोरिया—यही है 2026 की उम्मीद
झुमका से तमोर-पिंगला तक: कोरिया के पर्यटन को मिले नई उड़ान
वादों से आगे काम: 2026 में अधूरे प्रोजेक्ट पूरे हों
सड़क, अस्पताल, पानी—कोरिया को चाहिए रफ्तार
अधूरी योजनाएँ, अधूरी उम्मीदें—नए साल में पूरा हो विकास
कोरिया में नए साल की नई उम्मीदों के साथ नया सवेरा
पर्यटन का हब, विकास की तेज रफ्तार और प्रशासनिक पहचान—2026 से अपेक्षाएँ







-रवि सिंह-
कोरिया 31 दिसम्बर 2025 (घटती-घटना)। साल 2025 की स्मृतियों को समेटते हुए कोरिया जिला अब 2026 के स्वागत को तैयार है, बीते वर्ष में जहां कुछ सकारात्मक पहलें दिखीं, वहीं कई मुद्दे ऐसे रहे जिन पर दशकों पुरानी यथास्थिति बनी रही। नया साल सिर्फ कैलेंडर बदलने का नाम नहीं, बल्कि संकल्प लेने का अवसर है—कि शिक्षित कोरिया, स्वच्छ कोरिया के लक्ष्य को मिलकर साकार किया जाए, तभी 2026 जिले के इतिहास में स्वर्णिम वर्ष बन सकता है।
शिवघाट के विहंगम दृश्य में पुनः लहराए राष्ट्रध्वज तिरंगा- आजादी के अमृत महोत्सव के दौरान पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में तत्कालीन मुख्यमंत्री के निर्देश पर तत्कालीन कलेक्टर कोरिया कुलदीप शर्मा द्वारा कटगोड़ी शिवघाट के वॉच टावर के पास लगभग 20 मीटर ऊँचा तिरंगा स्थापित कराया गया था, यह तिरंगा देशभक्ति का प्रतीक ही नहीं, बल्कि पर्यटन का आकर्षण भी बना। लोग यहां रुककर फोटो लेते थे, क्षेत्र में रौनक रहती थी। इसी क्रम में झुमका बोट क्लब में भी तिरंगा लगाया गया था, लेकिन बाद में कटगोड़ी शिवघाट से तिरंगा हटा दिया गया, जिससे लोगों में निराशा है।
नए साल में जनमानस की स्पष्ट मांग है कि गणतंत्र दिवस से पूर्व शिवघाट वॉच टावर के पास पुनः तिरंगा स्थापित किया जाए, ताकि यह स्थल फिर से गौरव, पर्यटन और राष्ट्रीय चेतना का केंद्र बने।
बंद मोबाइल टावर चालू हों—वनांचल को मिले डिजिटल संबल- कोरिया जिले के वनांचल क्षेत्रों में वर्षों से मोबाइल टावर बंद पड़े हैं, ग्राम मझगवां, कछाड़ी, रेवला, रामगढ़, सिंघोर, अमृतपुर, सेमरिया, सूक्तरा, उधेनी, कुर्थी, धनपुर, सलगवां खुर्द, दसेर, हर्रा डीह, कचोहर, निग्नोहर, चंदाहा, बंशीपुर, गिधेर जैसे गांव आज भी नेटवर्क के लिए तरस रहे हैं,
डिजिटल इंडिया के दौर में यह स्थिति विडंबनापूर्ण है। ऑनलाइन शिक्षा, टेली-मेडिसिन, सरकारी योजनाओं और आपात सेवाओं तक पहुंच—सब बाधित है, 2026 की प्राथमिकता होनी चाहिए कि बंद टावर तुरंत चालू हों और वनांचल डिजिटल क्रांति से जुड़े।
रीपा की बंद मशीनें चलें—महिलाओं को मिले स्वरोजगार- रूरल इंडस्टि्रयल पार्क (क्रढ्ढक्क्र) में लगी कई मशीनें आज भी धूल खा रही हैं। यदि इन्हें चालू किया जाए तो सैकड़ों महिलाओं को रोजगार और स्वरोजगार मिल सकता है, महिला सशक्तिकरण केवल नारों से नहीं, काम से होता है—और रीपा इसका सशक्त माध्यम बन सकता है।
नए साल में जनमानस की प्रमुख उम्मीदें
पर्यटन व ईको-टूरिज्म
ईको-टूरिज्म हब बने कोरिया: झुमका बांध, गौरघाट जलप्रपात जैसे प्राकृतिक स्थलों का सुनियोजित विकास।
झुमका आइलैंड का विस्तार: वाटर स्पोर्ट्स और एडवेंचर टूरिज्म के केंद्र के रूप में पहचान।
होम-स्टे मॉडल: ग्रामीण क्षेत्रों में होम-स्टे से स्थानीय रोजगार और पर्यटन को बढ़ावा।
कृषि व स्वरोजगार
‘बिहान’ व मिलेट्स को बढ़ावा: कोदो–कुटकी जैसी फसलों की अपार संभावनाएं।
कोरिया मिलेट्स कैफ़े: बैकुंठपुर–सोनहत जैसे क्षेत्रों में स्थानीय व स्वस्थ खान-पान का प्रमोशन।
फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स: फलों–सब्जियों के लिए लघु इकाइयों से किसानों की आय में वृद्धि।
शिक्षा व कौशल विकास
डिजिटल लाइब्रेरी: प्रमुख ब्लॉक मुख्यालयों में आधुनिक डिजिटल लाइब्रेरी।
कौशल प्रशिक्षण: स्थानीय उद्योगों की मांग के अनुरूप युवाओं को ट्रेनिंग।
स्वास्थ्य व बुनियादी ढांचा
जिला अस्पताल व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में सुविधाओं का विस्तार।
टेली-मेडिसिन को सुदूर गांवों तक पहुंचाने की प्राथमिकता।
स्वच्छ कोरिया, सुंदर कोरिया: जन-भागीदारी के साथ कचरा-मुक्त अभियान।
गुरु घासीदास–तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व
पर्यटन बढ़ने से संरक्षण मजबूत होगा और स्थानीय युवाओं को गाइड/जिप्सी संचालन में रोजगार मिलेगा—गुरु घासीदास–तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व 2026 में नई पहचान बना सकता है।
कोरिया को मिले संभाग का दर्जा—एक पुरानी, जरूरी मांग- नए जिलों के गठन के बाद प्रशासनिक विकेंद्रीकरण की मांग तेज है। कोरिया को संभाग बनाने से मनेंद्रगढ़–चिरमिरी–भरतपुर और सूरजपुर जैसे पड़ोसी जिलों को लाभ होगा, प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण: कमिश्नर व आईजी कार्यालय से योजनाओं की रफ्तार, विकास की नई राह: पुलिसिंग, राजस्व, स्वास्थ्य और शिक्षा में गुणात्मक सुधार।
शहरी विकास: सड़कें, रोशनी और स्मार्ट लुक
जिला मुख्यालय सड़क चौड़ीकरण: वादों से आगे बढ़कर काम; डिवाइडर, स्ट्रीट लाइट्स, फुटपाथ और हरियाली।
अधूरे निर्माण पूरे हों: स्वास्थ्य, सड़क, आवास—कछुआ चाल पर विराम।
जिला अस्पताल व एमसीएच भवन
कंचनपुर का एमसीएच —फिनिशिंग/इंटीरियर पूरा हो, सेवाएं शुरू हों।
नया जिला अस्पताल—डेडलाइन निकल चुकी; 2026 में पूर्ण होकर जनता को लाभ मिले।
जल जीवन मिशन
ग्रामीण इलाकों में पाइपलाइन है, पानी नहीं—भ्रष्टाचार की जांच हो और अधूरी कनेक्टिविटी पूरी हो। (जल जीवन मिशन)
ग्रामीण विकास: खेल, सड़क, बिजली, राशन
सोनहत के मिनी स्टेडियम: सलगवां कला, कैलाशपुर, भैसवार, रामगढ़—काम फिर शुरू हो।
सीसी सड़कें: स्वीकृति और भुगतान के बाद भी रुका काम—2026 में पूरा हो।
विद्युतीकरण: कचोहर, बंशीपुर, चंदाहा, कदना, तंजरा—रोशनी पहुँचे।
रामगढ़–कोटडोल सड़क (₹41 करोड़): दर्जनों गांवों को जोड़ने वाला प्रोजेक्ट शीघ्र शुरू हो।
दूरस्थ गांवों में राशन दुकानें: 20–40 किमी पैदल दूरी की मजबूरी खत्म हो।
स्वास्थ्य की जमीनी सच्चाई: सोनहत की सोनोग्राफी- “ने साहबज् अब सोनोग्राफी नई होथे काज्?” यह सवाल सिर्फ एक बुजुर्ग महिला का नहीं, पूरे इलाके की पीड़ा है। 2026 में सोनहत अस्पताल की सोनोग्राफी सेवा कम से कम सप्ताह में 3 दिन बहाल हो—यही उम्मीद है।
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