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मनेन्द्रगढ़@ राजनीति से बड़ा ‘मानवता का धर्म’

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एक्सीडेंट में घायल युवतियों को पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने अपनी ही गाड़ी से पहुंचाया अस्पताल…
मनेन्द्रगढ़,24 दिसम्बर 2025 (घटती-घटना)।
यह घटना किसी राजनीतिक बयान या मंच की नहीं,बल्किचरित्र की कसौटी है, लोकतंत्र में जनप्रतिनिधि केवल कानून बनाने या भाषण देने के लिए नहीं होते वे समाज के संकट क्षणों में दिशा दिखाने के लिए भी होते हैं, गुलाब कमरो का यह कदम याद दिलाता है कि सत्ता के बिना भी सेवा की जा सकती है,और राजनीति से ऊपर मानवता का धर्म होता है,काश,यह दृश्य अपवाद न रहे बल्कि परंपरा बने।
बता दे की राजनीति के शोर और आरोप प्रत्यारोप के दौर में जब जनप्रतिनिधियों से संवेदनशीलता की उम्मीदें अक्सर टूटती हैं, ऐसे समय में गुलाब कमरो ने मानवता की एक ऐसी मिसाल पेश की,जिसने भरोसा जगा दिया। मंगलवार को मनेन्द्रगढ़ कलेक्ट्रेट कार्यालय के समीप हुई बाइक दुर्घटना में दो युवतियां गंभीर रूप से घायल हो गईं। सड़क पर तड़पती युवतियों को देखकर जहां लोग असमंजस में थे,वहीं वहां से गुजर रहे पूर्व विधायक ने बिना एक पल गंवाए मदद का हाथ बढ़ाया।
राजनीति से ऊपर मानवता का धर्म : पूर्व विधायक गुलाब कमरो अपने गृह ग्राम साल्ही से मनेन्द्रगढ़ की ओर आ रहे थे। दुर्घटना स्थल पर पहुंचते ही उन्होंने न प्रोटोकॉल देखा,न सुरक्षा घेरा—बस गाड़ी रुकवाई और स्वयं सड़क पर उतर आए। युवतियों की गंभीर हालत को भांपते हुए उन्होंने एम्बुलेंस का इंतज़ार करना उचित नहीं समझा और अपने निजी वाहन से दोनों को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मनेन्द्रगढ़ पहुंचाया।
तत्परता ने बचाई जान गोल्डन ऑवर में मिला इलाज : कलेक्ट्रेट जैसे व्यस्त मार्ग पर हुए हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी थी। ऐसे समय में श्री कमरो की त्वरित प्रतिक्रिया निर्णायक साबित हुई। अस्पताल पहुंचकर उन्होंने स्वयं डॉक्टरों से बातचीत की,उपचार की स्थिति जानी और यह सुनिश्चित किया कि घायलों को प्राथमिकता के आधार पर इलाज मिले। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार दुर्घटना के बाद का पहला घंटा गोल्डन ऑवर जीवन रक्षक होता है, और यही समय पर मिला उपचार घायलों के लिए वरदान बन गया।
समाज के लिए प्रेरणादायक पहल : घटनास्थल पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों ने इस मानवीय पहल की मुक्तकंठ से सराहना की। लोगों का कहना था कि अक्सर वीआईपी काफिले ऐसी घटनाओं से नजरें फेरकर निकल जाते हैं,लेकिन गुलाब कमरो ने आगे बढ़कर यह साबित किया कि पद नहीं, संवेदना बड़ी होती है।


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