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मनेन्द्रगढ़/भरतपुर@ धान खरीदी की बदहाली पर पूर्व विधायक गुलाब कमरों का मुख्यमंत्री को पत्र

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किसानों की पीड़ा को गंभीरता से लेने की मांग
मनेन्द्रगढ़/भरतपुर,23 दिसम्बर 2025 (घटती-घटना)।
जिला एमसीबी एवं कोरिया के धान खरीदी उपार्जन केंद्रों में व्याप्त अव्यवस्थाओं को लेकर भरतपुर-सोनहत विधानसभा के पूर्व विधायक गुलाब कमरों ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने कहा है कि मौजूदा धान खरीदी व्यवस्था किसानों के लिए राहत नहीं,बल्कि परेशानी का कारण बन गई है और यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो इसका सीधा असर किसानों की आर्थिक स्थिति पर पड़ेगा। पत्र में पूर्व विधायक ने उल्लेख किया है कि उपार्जन केंद्रों में प्रतिदिन की खरीदी लिमिट तय होने से किसानों की भारी भीड़ लग रही है,टोकन के लिए किसानों को 15-20 दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा है, जिससे छोटे और मध्यम किसान सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने मांग की है कि किसानों की सुविधा को देखते हुए प्रतिदिन की खरीदी सीमा समाप्त की जाए, ताकि सभी किसान समय पर अपना धान बेच सकें, उन्होंने यह भी बताया कि सर्वर की धीमी गति और कमजोर मोबाइल नेटवर्क के कारण एग्रीटेक पंजीयन पोर्टल पर बड़ी संख्या में किसान पंजीयन से वंचित रह गए हैं, ऐसे किसान आज भी धान बेचने में असमर्थ हैं। इस स्थिति को देखते हुए उन्होंने धान पंजीयन की समय-सीमा बढ़ाने की मांग की है।
वादा अधुरा : पूर्व विधायक कमरों ने सरकार के घोषणा पत्र का हवाला देते हुए कहा कि 21 क्विंटल प्रति एकड़ धान खरीदी का वादा किया गया था,लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि किसानों से केवल 16-17 क्विंटल प्रति एकड़ ही धान खरीदा जा रहा है, उन्होंने इसे किसानों के साथ अन्याय बताया, पत्र में यह मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया कि वन अधिकार पट्टाधारी किसानों से धान खरीदी नहीं की जा रही है,जिससे आदिवासी और वनवासी किसान अपनी उपज बेचने में भारी कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं,इसके साथ ही समर्थन मूल्य को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। पूर्व विधायक ने कहा कि 3100 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य की घोषणा के बावजूद किसानों को केवल 2369 रुपये प्रति क्विंटल का भुगतान किया जा रहा है,जो वादाखिलाफी को दर्शाता है, इसके अतिरिक्त उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि धान उपार्जन केंद्रों में हमाली का पैसा किसानों से ही वसूला जा रहा है, जबकि यह जिम्मेदारी शासन या संबंधित एजेंसियों की होनी चाहिए,पूर्व विधायक गुलाब कमरों ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि किसानों की इन सभी समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए जाएं, ताकि धान खरीदी व्यवस्था को सुचारू बनाया जा सके और किसानों को उनका पूरा हक मिल सके, उन्होंने कहा कि किसान पहले ही प्राकृतिक आपदाओं और बढ़ती लागत से जूझ रहे हैं, ऐसे में खरीदी व्यवस्था की खामियां उनकी परेशानियों को और बढ़ा रही हैं।
जब खरीदी व्यवस्था ही बोझ बन जाए
धान खरीदी किसान के लिए सहारा होनी चाहिए,लेकिन जब वही व्यवस्था बोझ बन जाए, तो सवाल उठना स्वाभाविक है,लाइन में खड़े किसान, टोकन के लिए हफ्तों का इंतजार,सर्वर की सुस्ती और अधूरे वादे,ये सब मिलकर एक ऐसी तस्वीर बनाते हैं,जो किसी भी किसान के आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाती है, सरकार के घोषणा पत्र में किए गए वादे अगर कागजों तक सीमित रह जाएं, तो उनका भरोसा टूटना तय है,21 क्विंटल की बात हो या 3100 रुपये समर्थन मूल्य की जब जमीनी सच्चाई इससे अलग हो, तो नाराजगी लाजिमी है। विशेषकर वन अधिकार पट्टाधारी किसानों को व्यवस्था से बाहर रखना न केवल प्रशासनिक विफलता है,बल्कि सामाजिक अन्याय भी है, आज जरूरत केवल आंकड़ों की नहीं, संवेदनशील फैसलों की है,अगर समय रहते सुधार नहीं हुआ,तो यह असंतोष केवल खेतों तक सीमित नहीं रहेगा। किसान की आवाज़ जब अनसुनी होती है, तब वह सवाल बनकर खड़ी होती है,मुख्यमंत्री से अपेक्षा है कि वे इस पीड़ा को केवल पत्र न मानें, बल्कि एक चेतावनी समझें क्योंकि किसान संतुष्ट होगा, तभी व्यवस्था टिकाऊ होगी।


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