
कानून की निगरानी में कारागारः निरीक्षण नहीं,संवैधानिक दायित्व…
कोरिया,23 दिसम्बर 2025 (घटती-घटना)। जिला जेल बैकुण्ठपुर का हालिया निरीक्षण केवल एक औपचारिक प्रशासनिक गतिविधि नहीं, बल्कि संविधान, मानवाधिकार और न्यायिक उत्तरदायित्व के त्रिकोण का प्रत्यक्ष उदाहरण है, यह निरीक्षण उस सिद्धांत को दोहराता है कि कारावास सजा है, अमानवीय व्यवहार नहीं, राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश और उच्चतम न्यायालय के रिट याचिका (सी) 1404/2023 सुकन्या संस्था बनाम यूनियन ऑफ इंडिया में पारित आदेशों का मूल उद्देश्य स्पष्ट है, जेलों में जातिगत या किसी भी प्रकार के भेदभाव का पूर्ण उन्मूलन और बंदियों के मौलिक अधिकारों की प्रभावी सुरक्षा, भारतीय संविधान का अनुच्छेद 14 समानता की गारंटी देता है, अनुच्छेद 21 गरिमामय जीवन का अधिकार सुनिश्चित करता है, और अनुच्छेद 39ए विधिक सहायता को न्याय तक पहुंच का साधन मानता है। जेल निरीक्षण के दौरान लीगल एड क्लीनिक, भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता, बैरक व्यवस्था और बंदियों से प्रत्यक्ष संवाद, ये सभी तत्व इन्हीं संवैधानिक प्रावधानों की जमीनी कसौटी हैं, न्यायालयों ने समय-समय पर यह स्पष्ट किया है कि कैदी भी नागरिक हैं और उनके अधिकार कारावास की दीवारों के भीतर समाप्त नहीं होते। इसीलिए डिस्टि्रक्ट विजिटर्स बोर्ड की तिमाही निरीक्षण व्यवस्था केवल अनुपालन नहीं, बल्कि न्यायिक निगरानी का सशक्त उपकरण है, निरीक्षण में जातिगत या अन्य भेदभाव का न पाया जाना सकारात्मक संकेत है, किंतु यह भी स्मरणीय है कि अधिकारों की सुरक्षा निरंतर प्रक्रिया है, एक दिन का निष्कर्ष नहीं, यह पहल प्रशासन और न्यायपालिका के संयुक्त उत्तरदायित्व को रेखांकित करती है जहां पारदर्शिता,जवाबदेही और संवेदनशीलता अनिवार्य हैं। यदि ऐसे निरीक्षण नियमित, निष्पक्ष और परिणामोन्मुख बने रहें, तो कारागार दंड के स्थान से सुधार और पुनर्वास के केंद्र बन सकते हैं। बता दे की राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली के निर्देशानुसार तथा माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा रिट पिटीशन (सी) क्रमांक 1404/2023 – सुकन्या संस्था बनाम यूनियन ऑफ इंडिया व अन्य में पारित आदेशों के अनुपालन में 22 दिसंबर 2025 को जिला जेल बैकुण्ठपुर का निरीक्षण किया गया, निरीक्षण दल का नेतृत्व शैलेश कुमार तिवारी (प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश / अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण) एवं चंदन त्रिपाठी (कलेक्टर, कोरिया) ने किया, इस दौरान श्याम मधुकर, अमृता दिनेश मिश्रा सहित विजिटर बोर्ड के अन्य सदस्य उपस्थित रहे, निरीक्षण के दौरान जिला जेल बैकुण्ठपुर में जातिगत या अन्य किसी प्रकार का भेदभाव नहीं पाया गया, तथा व्यवस्थाएं संतोषजनक पाई गईं।
स्वच्छता, इंफ्रास्ट्रक्चर और भोजन की जांच : निरीक्षण बोर्ड ने जेल परिसर के बैरक, शौचालय,साफ-सफाई की स्थिति, इंफ्रास्ट्रक्चर की गहन समीक्षा की। साथ ही बंदियों को प्रदान किए जा रहे भोजन की गुणवत्ता की भी जांच की गई। अधिकारियों ने बंदियों की व्यक्तिगत समस्याएं सुनीं और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
लीगल एड क्लीनिक का निरीक्षण : जेल में स्थापित लीगल एड क्लीनिक का भी निरीक्षण किया गया। क्लीनिक के माध्यम से बंदियों को दी जा रही कानूनी सहायता, परामर्श एवं सुविधाओं की स्थिति का अवलोकन करते हुए इसे और प्रभावी बनाने पर चर्चा की गई।
त्रैमासिक निरीक्षण की व्यवस्था : उल्लेखनीय है कि माननीय उच्चतम न्यायालय के 03 अक्टूबर 2024 के आदेशों के परिपालन में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण एवं डिस्टि्रक्ट विजिटर्स बोर्ड, कोरिया द्वारा प्रत्येक तिमाही में जिला जेल बैकुण्ठपुर का निरीक्षण किया जाता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जेल में बंद किसी भी बंदी के साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव न हो और उन्हें उनके संवैधानिक अधिकारों का पूर्ण संरक्षण मिले।
बंदियों के अधिकार और मूलभूत सुविधाओं की समीक्षा
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने बंदियों से संवाद कर जेल में निरुद्ध रहने की अवधि में मिलने वाले कानूनी अधिकारों, विधिक सहायता एवं मूलभूत सुविधाओं की जानकारी ली। यह भी सुनिश्चित किया गया कि सभी बंदियों को समय पर विधिक सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं तथा उनके साथ किसी प्रकार का जातिगत या अन्य भेदभाव नहीं हो रहा है।
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