रायपुर,21 दिसम्बर 2025। छत्तीसगढ़ में पुलिस आरक्षक भर्ती प्रक्रिया को लेकर पिछले कुछ समय से चल रहे विवाद और अभ्यर्थियों के असंतोष के बीच राज्य सरकार ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की है। उपमुख्यमंत्री और गृहमंत्री विजय शर्मा ने स्वयं अभ्यर्थियों के बीच पहुँचकर उनकी समस्याओं का समाधान करने का मोर्चा संभाला है। यह कदम चयन प्रक्रिया पर उठ रहे सवालों और अनियमितताओं के आरोपों के बाद उठाया गया है। छत्तीसगढ़ पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा में कथित गड़बड़ी के आरोपों को लेकर मचे घमासान के बीच उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने संवेदनशीलता का परिचय दिया। रायपुर के सिविल लाइन स्थित अपने शासकीय निवास पर उन्होंने प्रदेश भर से आए सैकड़ों अभ्यर्थियों के साथ आमने-सामने चर्चा की। यह संवाद सत्र इसलिए आयोजित किया गया ताकि अभ्यर्थी बिना किसी हिचकिचाहट के अपनी शिकायतों और आपत्तियों को सीधे सरकार के समक्ष रख सकें।
पुलिस मुख्यालय और गृहमंत्री के निवास पर सुनवाई का दौर : सरकार ने अभ्यर्थियों के आक्रोश को भांपते हुए दो-स्तरीय शिकायत निवारण प्रक्रिया अपनाई। सबसे पहले 19 और 20 दिसंबर को पुलिस मुख्यालय स्तर पर अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक ने शिकायतकर्ताओं से विस्तार से चर्चा की थी। इसके बाद, मामले की गंभीरता को देखते हुए गृहमंत्री ने खुद मोर्चा संभाला। उनके बंगले पर हुई बैठक में न केवल उम्मीदवार बल्कि सभी जिलों के एडिशनल एसपी रैंक के अधिकारी भी मौजूद रहे, ताकि मौके पर ही तथ्यों की जांच की जा सके।
अधिकारियों ने नियमों के आधार पर दिया हर शंका का समाधान
गृहमंत्री के निवास पर आयोजित इस संवाद में अधिकारियों ने एक-एक कर अभ्यर्थियों द्वारा उठाए गए बिंदुओं का जवाब दिया। भर्ती के दौरान अपनाई गई फिजिकल टेस्ट, लिखित परीक्षा और आरक्षण नियमों से जुड़ी शंकाओं पर एडिशनल एसपी रैंक के अधिकारियों ने दस्तावेजी प्रमाणों और नियमावली के आधार पर स्पष्टीकरण दिया। सरकार का उद्देश्य यह था कि अभ्यर्थियों को यह समझ आए कि चयन प्रक्रिया में किन मापदंडों का पालन किया गया है।
5,967 पदों की चयन प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल
विवाद का मुख्य केंद्र सितंबर माह में आयोजित हुई पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा है। गौरतलब है कि राज्य सरकार ने कुल 5,967 रिक्त पदों के लिए यह भर्ती प्रक्रिया शुरू की थी। जब परीक्षा के परिणाम और चयन सूची सामने आई, तो कई उम्मीदवारों ने चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए। अभ्यर्थियों का आरोप था कि नियमों को ताक पर रखकर अनियमितताएं की गई हैं, जिससे योग्य उम्मीदवार चयन से वंचित रह गए हैं।
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