

दिनदहाड़े हरे पेड़ की बलि! कानून के रखवाले ही बने पर्यावरण के हत्यारे?
कोरिया वन मंडल कार्यालय परिसर में नीम का हरा-भरा पेड़ काटा गया,वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल
जिस विभाग की जिम्मेदारी हरियाली बचाने की,वही अपने आंगन में चला रहा आरा!
-राजन पाण्डेय-
कोरिया,20 दिसम्बर 2025 (घटती-घटना)। जिस विभाग के कंधों पर वन, पर्यावरण और हरियाली की रक्षा की जिम्मेदारी है,उसी विभाग के कार्यालय परिसर में हरे-भरे नीम के पेड़ की दिनदहाड़े कटाई यह सिर्फ विडंबना नहीं,बल्कि प्रशासनिक नैतिकता का खुला पतन है,यह घटना कोरिया वन मंडल के परिसर की है, सवाल यह नहीं कि एक पेड़ क्यों काटा गया सवाल यह है कि किस अधिकार,किस अनुमति और किस सोच के तहत? दिन-दहाड़े कोरिया वन मंडल कार्यालय के भीतर नीम का हरा-भरा पेड़ काटा जा रहा है, सवाल सीधा और गंभीर है क्या शहर के भीतर, वह भी डीएफओ कार्यालय परिसर में, पेड़ काटने के लिए किसी अनुमति की आवश्यकता नहीं होती? या फिर नियम केवल आम नागरिकों के लिए हैं? जिस विभाग पर वन,पर्यावरण और हरियाली की रक्षा की जिम्मेदारी है, वही विभाग अपने ही परिसर में हरे पेड़ों की कटाई करता नजर आ रहा है, यह न सिर्फ दोहरे मापदंड को उजागर करता है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण पर सरकारी दावों की साख पर भी सवाल खड़ा करता है।
कानून सिर्फ जनता के लिए?
जब आम नागरिक अपने घर के सामने सूखी डाल काटता है, तो उससे एनओसी,परमिशन,जुर्माना और केस तक की बात होती है,लेकिन जब वही काम वन विभाग खुद करता है,तो क्या नियम स्वतः स्थगित हो जाते हैं? अगर विभागीय परिसर में पेड़ काटने के लिए भी लिखित अनुमति, तकनीकी कारण,पर्यावरणीय आकलन,प्रतिपूरक वृक्षारोपण की योजना जरूरी नहीं तो फिर जनता से नियमों की उम्मीद क्यों?
खोखले दावे,नंगी हकीकत
एक तरफ पोस्टर, नारे और अभियान पेड़ लगाओ, पर्यावरण बचाओ और दूसरी तरफ सरकारी कैंपस में हरे पेड़ों की बलि, यह सिर्फ दोहरा मापदंड नहीं,यह पर्यावरणीय पाखंड है,नीम जैसा पेड़जो ऑक्सीजन, औषधीय गुण और शीतलता देता है अगर वह भी ‘असुविधा’ बन जाए,तो सोचिए जंगलों की हालत कैसी होगी?
जिम्मेदारी तय होनी चाहिए…
यह मामला किसी चेनसॉ ऑपरेटर का नहीं, बल्कि फैसला लेने वालों का है, आदेश देने वालों का है, और नजरअंदाज करने वालों का है क्या इस कटाई की फाइल सार्वजनिक की जाएगी? क्या जिम्मेदार अधिकारी जवाब देंगे? या फिर यह भी ‘सरकारी परिसर का अंदरूनी मामला’ बनकर दफन हो जाएगा?
अंतिम सवाल
अगर वन विभाग ही पर्यावरण कानूनों का पालन नहीं करेगा,तो फिर जंगलों की रक्षा कौन करेगा? कानून सबके लिए बराबर है—यह सिद्धांत भाषणों में नहीं, आचरण में दिखना चाहिए,वरना कल को जब जंगल उजड़ेंगे,हवा जहरीली होगी और तापमान असहनीय तो दोष पेड़ों का नहीं,उन हाथों का होगा जिन्होंने उन्हें काटा, यह सिर्फ एक पेड़ की कहानी नहीं है यह उस सिस्टम की तस्वीर है,जो हरियाली को भाषणों में पूजता है और हकीकत में काट देता है।
घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur