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कोरिया@धान खरीदी में बड़ा गड़बड़झाला!

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गिरदावरी में दर्ज रकबा सही,लेकिन सोसायटी टोकन में कम,किसानों ने कलेक्टर से लगाई गुहार
कोरिया,19 दिसम्बर 2025 (घटती-घटना)।
जिले में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। आदिम जाति सेवा सहकारी समिति, पटना (पंजीयन क्रमांक 540) से जुड़े किसानों ने धान टोकन न कटने और रकबा कम दिए जाने की शिकायत को लेकर कलेक्टर कोरिया को लिखित आवेदन सौंपा है, किसानों का आरोप है कि गिरदावरी और फसल विवरण में सब कुछ सही होने के बावजूद सोसायटी स्तर पर जानबूझकर टोकन नहीं काटे जा रहे हैं, जिससे वे अपनी उपज बेचने से वंचित हो रहे हैं।
किसानों ने अपने आवेदन में बताया कि उन्होंने अपने खेतों में धान की खेती की है, फसल अच्छी हुई है और गिरदावरी में धान की फसल दर्ज भी है, बावजूद इसके, सोसायटी द्वारा जारी किए जाने वाले धान खरीदी टोकन में रकबा काफी कम दर्ज किया जा रहा है, कई मामलों में किसानों का कहना है कि जब वे टोकन कटवाने जाते हैं तो यह कहकर मना कर दिया जाता है कि ‘धान खरीदी की लिमिट कम है ‘, इसलिए टोकन नहीं काटा जा सकता।
किसानों को हो रही आर्थिक क्षति : टोकन न कटने के कारण किसान अपनी उपज को समर्थन मूल्य पर बेच नहीं पा रहे हैं। इससे उन्हें मजबूरी में निजी व्यापारियों के हाथों कम दाम पर धान बेचने की स्थिति बन रही है या फिर धान घरों में पड़ा खराब हो रहा है। किसानों का कहना है कि यह स्थिति सीधे तौर पर उनकी आर्थिक कमर तोड़ रही है।
कलेक्टर से हस्तक्षेप की मांग : आवेदन में किसानों ने कलेक्टर से आग्रह किया है कि उनकी परेशानियों को गंभीरता से लेते हुए गिरदावरी के अनुसार धान विक्रय पंजीयन में सही रकबा दर्ज कराया जाए और धान विक्रय हेतु टोकन कटवाने की तत्काल अनुमति दी जाए, ताकि वे समय पर अपनी फसल बेच सकें, आवेदन दिनांक 19 दिसंबर 2025 को दिया गया है, जिस पर पटन समिति से जुड़े कई पंजीकृत किसानों के हस्ताक्षर हैं।
सवालों के घेरे में धान खरीदी व्यवस्था : यह मामला सामने आने के बाद एक बार फिर यह सवाल उठने लगे हैं कि, जब गिरदावरी में फसल दर्ज है तो टोकन क्यों नहीं? लिमिट का बहाना किसके इशारे पर? क्या किसानों को मजबूरन नुकसान उठाने दिया जा रहा है? अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस शिकायत पर क्या कार्रवाई करता है और क्या किसानों को समय रहते न्याय मिल पाता है या नहीं।


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