रायपुर,17 दिसम्बर 2025। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। राज्य प्रशासनिक सेवा की निलंबित अधिकारी सौम्या चौरसिया को प्रवर्तन निदेशालय ने विशेष अदालत में पेश किया। जहां एजेंसी ने उनसे पूछताछ के लिए कोर्ट से 3 दिन की कस्टोडियल रिमांड मांगी थी। विशेष अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद ईडी को यह रिमांड दी है। रिमांड अवधि समाप्त होने के बाद शुक्रवार को दोपहर 3ः30 बजे सौम्या चौरसिया को फिर से ईडी की विशेष अदालत में पेश किया जाएगा। बता दें कि ईडी ने अदालत में दलील दी कि शराब घोटाले की जांच में कई अहम आर्थिक लेन-देन, हवाला नेटवर्क और डिजिटल साक्ष्य सामने आए हैं, जिनकी तह तक जाने के लिए कस्टोडियल पूछताछ आवश्यक है। इसी आधार पर ईडी ने रिमांड की मांग की थी। ईडी के अनुसार, यह मामला करीब 3200 करोड़ रुपये के शराब घोटाले से जुड़ा है। आरोप है कि वर्ष 2019 से 2023 के बीच तत्कालीन कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में राज्य की शराब नीति में बदलाव कर चहेती कंपनियों को लाभ पहुंचाया गया। लाइसेंस की शर्तें इस तरह बनाई गईं कि चुनिंदा कंपनियों को ही काम मिल सके।
नकली होलोग्राम और टैक्स चोरी : जांच में सामने आया है कि इन कंपनियों ने नोएडा की एक फर्म के जरिए नकली होलोग्राम और सील तैयार करवाई। इन्हीं नकली होलोग्राम लगी महंगी शराब की बोतलों को सरकारी दुकानों के माध्यम से बेचा गया। चूंकि होलोग्राम फर्जी थे, इसलिए बिक्री की पूरी जानकारी शासन के सिस्टम में दर्ज नहीं हो सकी और बिना एक्साइज टैक्स दिए शराब की बिक्री होती रही। इससे राज्य सरकार को करीब 2165 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ।
सौम्या चौरसिया तक 115 करोड़ पहुंचने का दावा
ईडी के रिमांड आवेदन में दावा किया गया है कि शराब घोटाले से जुड़े करीब 115 करोड़ रुपये दो अलग-अलग हिस्सों में लक्ष्मीनारायण बंसल के माध्यम से सौम्या चौरसिया तक पहुंचाए गए। इसके अलावा, आरोपी तांत्रिक केके श्रीवास्तव से पूछताछ में यह भी सामने आया है कि घोटाले की करीब 72 करोड़ रुपये की राशि हवाला के जरिए इधर-उधर की गई।
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