
-न्यूज डेस्क-
रायपुर/कोरिया 13 दिसम्बर 2025 (घटती-घटना)।
सोशल मीडिया पर भावनात्मक अपील और अगले ही दिन सार्वजनिक मंच पर उत्सव यह विरोधाभास ही आज की राजनीति की सबसे बड़ी बहस बन गया है,एक दिन लिखा जाता है दिल बहुत उदास है…जन्मदिन पर इस बार उत्सव न मिले,और अगले दिन नेताओं की मौजूदगी में केक काटने की तस्वीरें वायरल हो जाती हैं, सवाल यहीं से उठते हैं,क्या भावनात्मक पोस्ट केवल सहानुभूति जुटाने का माध्यम बन गए हैं? क्या निजी शोक और सार्वजनिक आचरण के बीच स्पष्ट रेखा होनी चाहिए? जब मंच पर कैमरे हों,तो क्या संदेश बदल जाता है?
राजनीतिक संदेश बनाम सार्वजनिक आचरण
राजनीति में प्रतीक और संदेश का महत्व होता है, लेकिन जब शब्द और दृश्य एक-दूसरे के विपरीत दिखें, तो भरोसा डगमगाता है,आम जनता यही पूछती है जो कहा गया, वही किया भी गया या नहीं? यह मामला किसी एक व्यक्ति का नहीं,बल्कि राजनीतिक संप्रेषण की विश्वसनीयता का है, अगर शोक है, तो सादगी दिखे, अगर उत्सव है,तो स्पष्ट कहा जाए,दोनों साथ दिखें तो सवाल उठेंगे।
नेता प्रतिपक्ष का दोहरा व्यवहार आया सामने,एक दिन पहले और फिर बाद में बदल गईं तस्वीरें : मामला वर्तमान में छत्तीसगढ़ प्रदेश सरकार में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभा रहे व्यक्तित्व से जुड़ा है,हाल ही में उन्होंने एक सोशल मिडिया संदेश जारी किया और अपने आने वाले जन्मदिवस तिथि पर किसी भी आयोजन से समर्थकों को शुभचिंतकों को दूर रहने निर्देश दिया,उन्होंने अपील किया कि दूर से ही उनके लिए बेहतर कमाना की जाए किसी करीबी के इस दुनिया से चले जाने का गम बड़ा है,मन उनका उदास है,इस संदेश और उनके जन्मदिवस तिथि के एक दिन पूर्व ही उनके जन्मदिवस की खुशियां सामने आती हैं और पार्टी के वरिष्ठ लोगों के साथ सार्वजनिक रूप से केक काटने की तस्वीर वायरल होती है,तस्वीर वायरल होते ही लोगों के बीच चर्चा भी लाजमी था जो हुई और व्यवहार का दोहरापन ही निष्कर्ष स्वरूप चर्चा का अंत साबित हुआ।
समर्थकों ने विज्ञापन भी छपवाए,गुटबाजी भी गम के माहौल में गुम नहीं हो पाई- नेता प्रतिपक्ष ने जहां मन उदास है कहकर खुशियां न मनाने का निर्णय सामने रखा वहीं पहले केक काटे जानी की तस्वीर फिर समर्थकों की विज्ञापन वाली गुटबाजी भी सामने नजर आई,समर्थकों की आपसी गुटबाजी भी गम के माहौल में गुम न हो सकी, कोरिया,एमसीबी संयुक्त समर्थक टीम के विज्ञापन से पूर्व विधायक ही गायब नजर आईं, कुल मिलाकर देखा जाए तो गम केवल कथनी वाला मामला बनकर रह गया,उत्सव भी मना और गुटबाजी भी सामने आई।
विज्ञापन में नेताओं की आपसी गुटबाजी है या फिर संकलनकर्ता की यह नई टीम है?- प्रकाशित विज्ञापन कोरिया एमसीबी यह स्पष्ट साबित करता है कि कांग्रेस की आपसी गुटबाजी की यह छवि है,वैसे एक सवाल इस विज्ञापन को देखकर और उठता है कि क्या यह संकलनकर्ता की नई टीम है,वैसे संकलनकर्ता भी नेता जी के सबसे खास हैं और यदि यह उनकी नई टीम है तब तो फिर गुटबाजी से अलग यह नई एक तरकीब है।
कहीं कंबल वितरण और कहीं वृक्षारोपण भी आया नजर,जन्मदिवस पर समर्थकों ने जताई अपनी आस्था– नेता प्रतिपक्ष के जन्मदिवस अवसर पर कोरिया जिले में पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष बैकुंठपुर ने जरूरतमंद लोगों के बीच ठंड के मद्देनजर कंबल का वितरण किया वहीं नगर पालिका उपाध्यक्ष आशीष यादव सहित अन्य ने वृक्षारोपण किया,समर्थकों ने आस्था प्रकट करने अपने अपने स्तर पर कुछ न कुछ आयोजन किया और संदेश सोशल मिडिया के माध्यम से नेता जी तक पहुंचा दिया।
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