Breaking News

कोरिया@बढ़ा जलस्तर…बढ़ा रकबा…बढ़ी पैदावार…बढ़ी आय

Share


अकलासरई में बना परकोलेशन टैंक किसानों के लिए वरदान


-संवाददाता-
कोरिया,10 दिसंबर 2025
(घटती-घटना)।

जनपद पंचायत सोनहत के अंतर्गत आने वाला अकलासरई गांव वर्षों से पानी की गंभीर कमी का सामना करता रहा है, ऊंचाई पर बसे इस गांव में बारिश का पानी टिक नहीं पाता था और भूजल स्तर लगातार गिरता जा रहा था,परिणामस्वरूप किसान केवल एक ही फसल पर निर्भर रहते,जिससे उनकी आय सीमित और कठिनाइयाँ बढ़ी होती थीं,इसी समस्या का स्थायी समाधान खोजते हुए ग्राम पंचायत ने ग्रामीणों की सहमति से सोनकुंवर पति जयकरण की भूमि पर परकोलेशन टैंक निर्माण का निर्णय लिया। उद्देश्य था वर्षा जल को संरक्षित करना,मिट्टी में जल रिसाव बढ़ाना, सिंचाई क्षमता मजबूत कर किसानों को दोहरी-तिहरी फसल की ओर बढ़ाना लगभग दो लाख रुपये की स्वीकृत राशि से बना यह टैंक अब पूरे गांव के लिए एक मॉडल जल संरक्षण संरचना बन चुका है।
रोजगार सहायक की पहल…गांव में जागरूकता और तकनीकी समझ बढ़ी
परियोजना को साकार करने में रोजगार सहायक की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने ग्रामीणों को समझाया कि परकोलेशन टैंक केवल पानी जमा नहीं करता, बल्कि उसे जमीन में धीरे-धीरे रिसने देता है, और आसपास के कुओं, ट्यूबवेल और खेतों में नमी को बढ़ाता है, इस जागरूकता के बाद ग्रामीणों ने भी परियोजना का पूरा सहयोग किया।
परकोलेशन टैंक से बदली सोनकुंवर की किस्मत
पहले सोनकुंवर केवल 1 एकड़ में ही धान की खेती कर पाती थीं, परकोलेशन टैंक बनने के बाद जलस्तर बढ़ा, खेत की नमी बढ़ी, सिंचाई आसान हुई, और इस वर्ष उन्होंने लगभग 2 एकड़ में धान की रोपाई की, अब वे पहली बार बड़े रकबे में रबी फसलें आलू, गोभी, अरहर और सरसों भी ले रही हैं, जिनसे बेहतर उत्पादन और अधिक आमदनी की उम्मीद है।
गांव के अन्य किसानों पर भी पड़ा सकारात्मक असर
सिर्फ सोनकुंवर ही नहीं,अकलासरई के कई अन्य किसानों ने भी बताया कि मिट्टी में नमी बढ़ी है, बोरवेल-कुएँ का जलस्तर सुधरा है,गर्मी में भी खेतों में पानी की उपलब्धता बनी रहती है, परकोलेशन टैंक के कारण गांव में दोहरी फसल लेने की क्षमता बढ़ी है और युवाओं में कृषि विस्तार का उत्साह दिखाई दे रहा है।
अकलासरई जल संरक्षण का नया उदाहरण-
जिस गांव में पानी टिकता नहीं था,अब वही गांव जल संवर्धन, सामुदायिक भागीदारी और टिकाऊ कृषि मॉडल का उदाहरण बन रहा है, परकोलेशन टैंक ने यह साबित किया है कि छोटे निवेश से बड़े बदलाव संभव हैं, बस ज़रूरत है योजनाओं के सही क्रियान्वयन और समुदाय की सहभागिता की।


Share

Check Also

अम्बिकापुर@यूजीसी नियमों के खिलाफ स्वर्ण समाज का ऐलान,1 फरवरी को अंबिकापुर बंद

Share अम्बिकापुर,29 जनवरी 2026 (घटती-घटना)। यूजीसी के नए नियमों के विरोध में प्रस्तावित 1 फरवरी …

Leave a Reply