- 6 करोड़ की आधुनिकीकरण परियोजना….पर यात्रियों को कोल डस्ट से नहीं मिली राहत
- 16 लाख टन कोयला लोडिंगः आधुनिक स्टेशन पर भी यात्रियों का ‘कोल क्राइसिस’ जारी
- बैकुंठपुर स्टेशन का कायाकल्प बनाम कोल साइडिंग की धूल…यात्रियों के बीच टकराहट
- अमृत भारत योजना प्रगति पर, लेकिन कोल साइडिंग ने बिगाड़ी स्टेशन की ‘क्लीन इमेज’
- अमृत भारत स्टेशन योजनाः बैकुंठपुर स्टेशन का कायाकल्प तेज… लेकिन कोल साइडिंग की धूल से यात्रियों की परेशानी बरकरार
- हर साल 16 लाख टन कोयला लोडिंग…प्लेटफार्म तक उड़ता डस्ट,यात्रियों के कपड़े-चेहरे तक हो जाते काले
- 6 करोड़ की लागत से 2 वर्षों से जारी…



–राजन पाण्डेय-
कोरिया,10 दिसंबर 2025 (घटती-घटना)। अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत बैकुंठपुर रोड स्टेशन को आधुनिक स्वरूप देने हेतु लगभग 6 करोड़ रुपये की लागत से तेजी से निर्माण-सुधार कार्य जारी है। स्टेशन में वेटिंग हॉल, शौचालय, साइनेज, सर्कुलेटिंग एरिया, पार्किंग,वाई फाई,वन स्टेशन-वन प्रोडक्ट जैसे कई उन्नत सुविधाओं का विकास किया जा रहा है, लेकिन इन सभी प्रयासों के बीच एक बड़ी चुनौती आज भी जस की तस है स्टेशन से सटे एसईसीएल कोल साइडिंग से उड़ने वाला कोयला धूल, रोजाना कोल लोडिंग के दौरान उड़ने वाला डस्ट यात्रियों के चेहरे, कपड़ों और सामान पर परत की तरह जम जाता है, जिससे लगातार असुविधा और स्वास्थ्य संबंधी समस्या की आशंका बनी रहती है।
आधुनिक स्टेशन,पुरानी समस्या… कोल साइडिंग का धुआँ,यात्रियों की हवा क्यों?
अमृत भारत स्टेशन योजना ने पूरे देश में रेलवे स्टेशनों के कायाकल्प को नई गति दी है। बैकुंठपुर रोड स्टेशन भी इसी नई सोच का हिस्सा है। लगभग 6 करोड़ की लागत से स्टेशन को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जा रहा है वाई फाई से लेकर उच्च स्तरीय प्लेटफॉर्म तक,लेकिन सवाल यह है कि क्या आधुनिकता केवल स्टेशन बिल्डिंग तक सीमित होगी,या यात्रियों की सांसों तक भी पहुंचेगी? बैकुंठपुर स्टेशन से लगे कोल साइडिंग में हर साल 16 लाख टन कोयला लोड होता है। यह वही स्टेशन है, जहां ट्रेन का इंतजार करते हुए यात्री अपने रूमाल से बार-बार चेहरा पोंछते हैं, क्योंकि कोल डस्ट इतनी प्रचंडता से उड़ता है कि प्लेटफॉर्म से लेकर बैठने की जगह तक हर चीज पर काली परत चढ़ जाती है,एक तरफ करोड़ों का आधुनिकीकरण, दूसरी तरफ कोयले की धूल यह विरोधाभास स्थानीय प्रशासन और रेलवे दोनों के लिए चुनौती है, यदि यात्रा का अनुभव बेहतर बनाना लक्ष्य है,तो कोल डस्ट कंट्रोल को योजना का अनिवार्य हिस्सा बनाया जाना होगा, सीनियर डीसीएम का बयान साइडिंग नहीं हटेगी, लेकिन स्पि्रंकलर लगाए जाएंगे यह समाधान नहीं, केवल एक अस्थायी उम्मीद है जब तक साइडिंग की कार्यप्रणाली को वैज्ञानिक तरीके से नियंत्रित नहीं किया जाएगा,तब तक यात्रियों को आधुनिक स्टेशन नहीं,आधुनिक धूल ही मिलेगी।
16 लाख टन वार्षिक कोयला लोडिंग…प्लेटफार्म तक पहुंच जाता है डस्ट
बैकुंठपुर रोड स्टेशन के ठीक पीछे एसईसीएल चरचा कॉलरी का प्रमुख कोल साइडिंग स्थित है,यहां से हर साल लगभग 16 लाख टन कोयला रेलवे वैगनों में लोड कर अन्य राज्यों और उद्योगों को भेजा जाता है, लोडिंग के दौरान उड़ने वाला डस्ट सीधे स्टेशन प्लेटफार्म तक पहुंचता है, जिससे यात्रियों की बड़ी संख्या हमेशा प्रभावित होती है,स्टेशन की सतह पर कोल डस्ट की मोटी परत जम जाती है, और आधुनिकीकरण के बावजूद स्वच्छता व आराम जैसी बुनियादी जरूरतें प्रभावित होती दिख रही हैं।
स्टेशन छोटा, प्लेटफार्म सिंगल, 1,500 से ज्यादा यात्री रोज जोखिम उठाकर चढ़ते
उतरते हैं…वर्तमान में बैकुंठपुर रोड स्टेशन में सिंगल और छोटा प्लेटफॉर्म, कई ट्रेनों की बोगियां प्लेटफार्म से आगे निकल जाती हैं, यात्रियों को जोखिम उठाकर चढ़ना-उतरना पड़ता है, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने स्टेशन को अमृत भारत योजना में शामिल कर दिया है, जिसके तहत, विस्तृत मास्टर प्लान, उच्च स्तरीय प्लेटफार्म, एस्केलेटर-लिफ्ट, सूचना प्रणाली, वेटिंग एरिया, पार्किंग और पैदल मार्ग जैसे कार्य तेजी से चल रहे हैं,स्थानीय कला और संस्कृति को शामिल करते हुए स्टेशन को आकर्षक सिटी सेंटर मॉडल का रूप देने की भी योजना है।
मुफ्त वाई फाई, कियोस्क,रूफ प्लाज़ा,नया बैकुंठपुर स्टेशन होगा आधुनिक सुविधाओं से लैस

अमृत भारत योजना के तहत जिन प्रमुख सुविधाओं को शामिल किया गया है, उनमें शामिल हैं मुफ्त वाई-फ ाई ने स्टेशन-वन प्रोडक्ट कियोस्क,आधुनिक शौचालय,विस्तृत वेटिंग हॉल,कार्यकारी लाउंज, एस्केलेटर-लिफ्ट,मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट,इंटीग्रेशन,लैंडस्केपिंग,भविष्य में रूफ प्लाज़ा की संभावना,गिट्टी-रहित पटरियों और सस्टेनेबल टेक्नोलॉजी पर भी फोकस किया गया है।
एसईसीएल रोड सेलः हर महीने 5,000 टन कोयला ट्रकों से भेजा जा रहा, इससे डस्ट की समस्या और बढ़ी
एसईसीएल चरचा क्रह्र कॉलरी में रेलवे रैक उपलब्धता कम होने के कारण रोडसेल शुरू किया गया है,इसके तहत,स्टेशन परिसर में 100 टन क्षमता का कांटा घर बनाया गया है हर महीने 5,000 टन कोयला ट्रकों से बाहरी राज्यों में भेजा जा रहा है, ट्रक मूवमेंट और स्टॉक एरिया स्टेशन के नजदीक होने से यात्रियों को डस्ट की समस्या और बढ़ रही है।
कोल साइडिंग नहीं हटेगी,लेकिन डस्ट रोकने व्यवस्था सुधारी जाएगीःडीसीएम अनुराग कुमार सिंह
बिलासपुर मंडल के वरिष्ठ डीसीएम अनुराग कुमार सिंह ने साफ कहा कोल साइडिंग हटाई नहीं जाएगी, लेकिन कोल डस्ट रोकने स्पि्रंकलर और अन्य उपायों को और मजबूत किया जाएगा, इसके लिए एसईसीएल को पत्र लिखकर आवश्यक सुधार करने कहा जाएगा, यह बयान साफ करता है कि स्टेशन आधुनिकीकरण के बीच कोयला धूल की चुनौती अब भी बड़ी राह में खड़ी है, जिसे लेकर यात्रियों में असंतोष बना हुआ है।
बैकुंठपुर स्टेशन—फैक्ट शीट
अमृत भारत योजना लागतः 6 करोड़
प्रगतिः 2 वर्षों से कार्य जारी
यात्रियों की स्थिति
रोजाना यात्रीः 1500+
सिंगल, छोटा प्लेटफॉर्मः
कई बोगियां प्लेटफॉर्म से बाहरः
चढ़ना-उतरना जोखिम भरा
कोल साइडिंग डेटा
वार्षिक लोडिंगः 16 लाख टन
हर महीने रोड सेलः 5000 टन
100 टन क्षमता का कांटा घर निर्मित
स्टेशन परिसर तक डस्ट का सीधा प्रभाव
योजना में मिलने वाली सुविधाएं
वाई फाई
वेटिंग हॉल
आधुनिक शौचालय
वन स्टेशन-वन प्रोडक्ट
एस्केलेटर-लिफ्ट
पार्किंग व सर्कुलेटिंग एरिया
डिजिटल सूचना प्रणाली
स्थानीय कला पर आधारित सजावट
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