- हजारों की भीड़,पुलिस से झूमाझटकी, विपक्ष की ऐतिहासिक दहाड़
- वन विभाग की कथित अनियमितताओं के खिलाफ एमसीबी की सड़कों पर विपक्ष का अब तक का सबसे बड़ा शक्ति-प्रदर्शन
- बुलडोजर कार्रवाई,जंगल तस्करी और भ्रष्टाचार के खिलाफ कांग्रेस की दहाड़,पुलिस-कार्यकर्ता झूमाझटकी के बावजूद रुकने को तैयार नहीं आंदोलन
- भारी भीड़,उग्र नारे और विपक्ष की गरज, डीएफओ ऑफिस घेराव ने प्रशासन और सत्ता दोनों को दिया कड़ा संदेश
- एमसीबी में सत्ता परिवर्तन के बाद विपक्ष का सबसे बड़ा प्रदर्शन,नेतृत्व में श्रीवास्तव,कमरो और मिश्रा की तिकड़ी,भीड़ भी उमड़ी,घेराव भी हुआ, और मंच से गूंजा विपक्ष का गर्जन




-राजन पाण्डेय-
मनेंद्रगढ़,09 दिसंबर 2025 (घटती-घटना)। एमसीबी जिले में आज 9 दिसंबर का दिन वन विभाग की मनमानी, बैगा परिवारों पर बुलडोजर कार्रवाई,जंगल कटाई और तस्करी के खिलाफ कांग्रेस के विशाल जन-आंदोलन के नाम दर्ज हो गया। जिला कांग्रेस कमेटी के आह्वान पर खान नर्सिंग होम मैदान से उठी रैली जब सड़कों पर उतरी तो पूरा मनेंद्रगढ़ कांग्रेस के जनसैलाब से थम गया, डीएफओ कार्यालय का घेराव होते-होते भीड़ का स्वरूप इतना विशाल हो गया कि पुलिस बल को बैरिकेडिंग बढ़ानी पड़ी, नारेबाजी, झूमाझटकी और तगड़ी नोकझोंक के बावजूद कांग्रेस कार्यकर्ता पीछे नहीं हटे। भीड़ में एक ही आवाज़ अनियमित वन विभाग हटाओ,बैगा परिवारों पर अत्याचार बंद करो!
वन विभाग की मनमानी अब राजनीति नहीं,जनरोष का मुद्दा
एमसीबी जिले में जिस तरह बैगा परिवारों के घर तोड़े गए,जंगलों की कटाई खुलकर हुई और विभाग ने अपनी जवाबदेही से दूरी बना ली—यह प्रशासनिक संवेदनहीनता का सबसे बड़ा उदाहरण है। जब जनता का धैर्य टूटता है, तो सड़कें आवाज़ बन जाती हैं, आज कांग्रेस का जनसैलाब जनता के उस दर्द का आईना था जिसे वर्षों से अनदेखा किया गया,यह आंदोलन सिर्फ सरकार को नहीं,पूरे तंत्र को चेतावनी देता है कि अब अन्याय,भ्रष्टाचार और आदिवासी समुदाय पर अत्याचार वैध शासन नहीं माना जाएगा,जंगल सिर्फ लकड़ी नहीं जनजातियों की जीवन-रेखा और उनकी अस्मिता हैं,इन्हें बचाने की लड़ाई अब प्रशासन के खिलाफ एक जन-क्रांति बनती जा रही है।
जब शासन चुप हो जाए,तब सड़कें बोलती हैं…
एमसीबी जिले में वर्षों से जंगल कटाई,वन तस्करी और विभागीय भ्रष्टाचार की शिकायतें जनता लगातार उठाती रही, लेकिन इस बार मामला सिर्फ भ्रष्टाचार तक सीमित नहीं यह आदिवासी जीवन और अस्तित्व पर सीधा हमला है, जब बैगा परिवारों के घर गिराए जाते हैं, तो यह सिर्फ अतिक्रमण की कार्रवाई नहीं होती,यह प्रशासन द्वारा कमजोरों पर शक्ति-प्रदर्शन का निर्मम चेहरा होता है,कांग्रेस का आज का आंदोलन उसी दर्द का विस्फोट था, कार्यकर्ताओं के बीच एक बात स्पष्ट दिखी जनता अब वन विभाग की मनमानी और सत्ता के संरक्षण से उपजे अत्याचार को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है,आज का प्रदर्शन सिर्फ विरोध नहीं,एक नई राजनीति की शुरुआत है जहां मुद्दे भावनाओं और जन अधिकार की लड़ाई बन चुके हैं।
आंदोलन की राजनीति में कौन चमका,कौन गायब रहा?
एमसीबी जिले में सत्ता परिवर्तन के बाद यह पहला अवसर था जब विपक्ष ने अपनी वास्तविक ताकत का प्रदर्शन किया, नेतृत्व में तीन चेहरे सबसे प्रमुख रूप से उभरे जिला अध्यक्ष अशोक श्रीवास्तव संगठन क्षमता और भीड़ प्रबंधन,पूर्व विधायक गुलाब कमरो सबसे तीखा हमला,सबसे बड़ी भीड़,सबसे ऊंची आवाज़,सौरव मिश्रा युवा तेजस्विता,वोकल पोजि़शन, सोशल मीडिया प्रभाव इन तीनों के नेतृत्व ने कांग्रेस के अंदर एक स्पष्ट संदेश दिया लड़ाई वही लड़ेगा जो जनता के साथ खड़ा रहेगा,लेकिन इस आंदोलन का सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल टिकट की दौड़ में सबसे आगे रहने वाले पूर्व विधायक नदारद क्यों?
जिलाध्यक्ष अशोक श्रीवास्तव का सख्त संदेश बैगा परिवारों के घर गिराना अमानवीय,यह अत्याचार नहीं चलेगा
जिलाध्यक्ष श्रीवास्तव ने कहा बैगा जनजाति के गरीब परिवारों पर बुलडोजर चलवाना सिर्फ अवैध नहीं,अमानवीय अपराध है, उन्होंने भाजपा नेताओं और मंत्री पर भ्रष्ट डीएफओ को संरक्षण देने का गंभीर आरोप लगाया और कहा कि जनता अब जंगल और जनजाति पर अत्याचार बर्दाश्त नहीं करेगी।
पूर्व विधायक गुलाब कमरो मंच पर गरजे यह तो सिर्फ शुरुआत है…अगला घेराव कलेक्टर कार्यालय का होगा
भरतपुर-सोनहत के पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने आज सबसे तीखे हमले बोले, भीड़ देखते ही उन्होंने कहा मनेंद्रगढ़,चैनपुर सहित कई क्षेत्रों में गरीबों के घर अतिक्रमण के नाम पर गिराए जा रहे,जिले में जंगल कटाई और तस्करी माफिया नेताओं के संरक्षण में फल-फूल रही है,डीएफओ आंखें बंद कर बैठे हैंज् यह मिलीभगत है,कर्तव्य नहीं,कमरो ने मंच से जनता से पूछा क्या अगला घेराव कलेक्टर कार्यालय का होना चाहिए? हजारों हाथ हवा में उठे जवाब स्पष्ट था हाँ! आज के आंदोलन में सबसे अधिक और सबसे संगठित भीड़ कमरो के क्षेत्र भरतपुर-सोनहत से आई यह एक बड़ा राजनीतिक संकेत माना जा रहा है।
युवाओं की आवाज़ शहर में भालू घूम रहा,विभाग सो रहा…
एनएसयूआई प्रदेश अध्यक्ष नीरज पांडे ने विभाग पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया, उन्होंने कहा कि वन्यजीव खुले में घूम रहे, लोगों की जान जोखिम में है लेकिन विभाग पूरी तरह ‘असंवेदनशील और निष्कि्रय’ है।
कांग्रेस प्रवक्ता सौरव मिश्रा का वायरल बयान…डीएफओ साहब, आपका डर ही आपकी कहानी बता रहा है…
घेराव से एक दिन पहले डीएफओ निवास की बैरिकेडिंग, बांस-दीवार और सुरक्षा घेरा देखकर सौरव मिश्रा ने तंज कसा “जितनी मेहनत डीएफओ को बचाने में की गई, इतनी मेहनत अगर बैगा परिवारों के घर न गिराने में करते तो आज हालात अलग होते, सौरव मिश्रा ने साफ कहा डीएफओ हटे बिना आंदोलन रुकेगा नहीं कलेक्टर कार्यालय घेराव तय है।
जिला महामंत्री केसरवानी का हमला ट्री गार्ड,फॉसिल पार्क और योजनाओं में करोड़ों की लूट
उन्होंने कहा कि जिले के योजनाओं में व्यापक वित्तीय अनियमितता हो रही है, यह जंगल तस्करों और भ्रष्ट अधिकारियों की खुली साझेदारी है।
कांग्रेस का अल्टीमेटम…अगर वन विभाग नहीं सुधरा, अगली बार पूरा जिला कलेक्टर ऑफिस घेर देगा
कांग्रेस ने मांगें रखीं बैगा परिवारों पर कार्रवाई करने वाले कर्मचारियों पर एफआईआर, अवैध कटाई-तस्करी पर तत्काल रोक, डीएफओ को तुरंत हटाया जाए, भ्रष्टाचार की उच्चस्तरीय जांच अन्यथा कांग्रेस ‘चरणबद्ध और निर्णायक आंदोलन’ करेगी।
यह सिर्फ आंदोलन नहीं, सत्ता को चेतावनी है…
वन विभाग की मनमानी, आदिवासी परिवारों पर बुलडोजर, जंगल तस्करी और प्रशासनिक तानाशाही आज का आंदोलन इन सबका विस्फोटक प्रतिरोध था, यह स्पष्ट संकेत है कि एमसीबी की जनता अब सवाल पूछ रही है, और विपक्ष पहली बार इतने ताकतवर रूप में सड़कों पर उतरा है।
विपक्ष का पहला सबसे बड़ा शक्ति-प्रदर्शन, और टिकिट पॉलिटिक्स की सच्चाई
एमसीबी जिले में सत्ता परिवर्तन के बाद आज का कांग्रेस का प्रदर्शन अब तक का सबसे बड़ा विपक्षी आंदोलन साबित हुआ, पहली बार विपक्ष ने इतने बड़े स्तर पर जनता,कार्यकर्ताओं और नेतृत्व तीनों की सामूहिक ताकत को एकजुट कर सड़कों पर उतारा, इस आंदोलन की सबसे बड़ी पहचान यह रही कि यथावत जिलाध्यक्ष अशोक श्रीवास्तव,भरतपुर-सोनहत के पूर्व विधायक गुलाब कमरो और युवा नेता व तेजस्वी वक्ता सौरभ मिश्रा इन तीन नेताओं ने मोर्चा संभाला, भीड़ जुटाई, नेतृत्व किया और विपक्ष की दहाड़ मंच से सुनाई दी, इतना बड़ा जनसैलाब और इतना तीखा विरोध—यह साफ संकेत है कि एमसीबी में कांग्रेस ने सत्ता परिवर्तन के बाद अपनी वापसी की मजबूत शुरुआत कर दी है, पर सवाल बड़ा टिकट की रेस में सबसे आगे रहने वाले पूर्व विधायक कहां थे? एमसीबी की टिकट दौड़ में सबसे आगे माने जाने वाले मनेंद्रगढ़ के पूर्व विधायक,आज पूरे जिले के इस ऐतिहासिक आंदोलन से पूरी तरह नदारत दिखाई दिए।
एमसीबी जिले की राजनीति अब दो ध्रुवों में बदलती दिख रही है…
संघर्ष करने वाले नेता
दूर से सिर्फ टिकट का इंतज़ार करने वाले नेता
आज के आंदोलन ने यह भी साफ कर दिया कि 2028 की दावेदारी संघर्ष से तय होगी,सिफारिश से नहीं…
अब राजनीति का सबसे बड़ा सवाल…टिकट की रेस में आगे रहने वाले पूर्व विधायक डॉ विनय जयसवाल आंदोलन से गायब क्यों?
आज जहां हजारों की भीड़ थी,पूरा विपक्ष एकजुट था,मंच से दहाड़ लग रही थी, पुलिस के साथ झूमाझटकी भी हुई,और कांग्रेस अपनी ताकत दिखा रही थी। वहीं मनेंद्रगढ़ के वह पूर्व विधायक,जो टिकट की दौड़ में सबसे आगे माने जाते हैं, आंदोलन में पूरी तरह नदारद रहे,जिले में अब चर्चा यही टिकट चाहिए लेकिन संघर्ष नहीं? क्या जिले की सबसे बड़ी लड़ाई में अनुपस्थित रहकर भी वे टिकट की लाइन में सबसे आगे रहेंगे? क्या पार्टी उनसे सवाल पूछेगी या फिर बैक डोर से एंट्री का खेल फिर शुरू होगा? कांग्रेस कार्यकर्ताओं की स्पष्ट राय जो सड़कों पर संघर्ष करेगा वही टिकट का असली दावेदार होगा।
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