ग्रामीण बोले-नहीं देंगे अपनी जमीन,सरगुजा में बवाल-पथराव,कोरबा में सीआईएसएफ ने दौड़ा-दौड़ाकर पीटा
रायगढ़,08 दिसंबर 2025। छत्तीसगढ़ में कोल माइंस को लेकर लगातार विरोध जारी है। इसी बीच रायगढ़ के तमनार ब्लॉक के 14 गांव के ग्रामीणों ने जिंदल पावर लिमिटेड की प्रस्तावित कोल माइंस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि हम किसी भी कीमत पर जमीन नहीं देंगे। इस दौरान बड़ी संख्या में फोर्स तैनात रही। जानकारी के मुताबिक,ग्रामीणों के समर्थन में लैलूंगा विधायक विद्यावती सिदार भी मौके पर पहुंचीं। विधायक ने भी ग्रामीणों के साथ जनसुनवाई निरस्त करने की मांग की। जनसुनवाई के लिए टेंट न लगने देने के उद्देश्य से मानव श्रृंखला बनाकर विरोध दर्ज कराया। इसके पहले कोरबा में गेवरा खदान में ग्रामीणों ने प्रदर्शन किया। सीआईएसएफ ने लाठीचार्ज किया। इसमें 10 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए। वहीं रायगढ़ के छाल क्षेत्र में भी 300 ग्रामीणों ने जनसुनवाई रद्द करने की मांग की। इसके अलावा सरगुजा के अमेरा ओपनकास्ट कोल माइंस के खिलाफ ग्रामीणों ने प्रदर्शन किया। इस दौरान पुलिस और ग्रामीणों के बीच झड़प हो गई। ग्रामीणों ने पुलिस पर पथराव और गुलेल से हमला किया। हमले में एएसपी, थाना प्रभारी समेत लगभग 25 पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। वहीं पुलिसकर्मियों ने भी ग्रामीणों पर पत्थर से हमला किया।
सबसे पहले जानिए रायगढ़ में क्यों हो रहा विरोध प्रदर्शन : दरअसल,रायगढ़ के तमनार ब्लॉक में कोल खदान के लिए जिंदल पावर लिमिटेड को जमीन प्रस्तावित है, लेकिन ग्रामीण कोल खदान के खिलाफ हैं। ग्रामीणों का कहना है कि प्रस्तावित खदान से उन्हें विस्थापन, पर्यावरणीय नुकसान और आजीविका पर संकट का खतरा है। उनका कहना है कि तमनार और आसपास का इलाका पहले से ही कंपनियों के कारण प्रदूषण की चपेट में है। भारी वाहनों की आवाजाही से सड़क दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं। जल-जंगल-जमीन भी तेजी से नष्ट हो रहे हैं। प्रस्तावित कोयला खदान का हर हाल में विरोध करेंगे।
5 दिसंबर से ग्रामीण जनसुनवाई को निरस्त करने की मांग पर अड़े : तमनार ब्लॉक में प्रस्तावित गारे-पेलमा कोल ब्लॉक सेक्टर-1 की जनसुनवाई को लेकर ग्रामीणों का विरोध जारी है। 5 दिसंबर से ग्रामीण जनसुनवाई को निरस्त करने की मांग पर अड़े हुए हैं। इस आंदोलन में लगभग 14 गांवों के लोग शामिल हैं।
ग्रामीण धौराभांठा स्कूल मैदान में धरने पर बैठे हैं। इनमें झरना, आमगांव, कोसमपाली, पतरापाली, जांजगीर, गोढ़ी, कसडोल, महलोई, सरसमाल सहित अन्य गांवों के लोग भी शामिल हैं। ग्रामीण किसी भी नई कंपनी या कोयला खदान को इस क्षेत्र में शुरू नहीं होने देना चाहते हैं।
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