- गुरु घासीदास की गोद में दो झुंडों का अद्भुत कलरव
- ठंडी हवा-नीला पानी और हजारों किलोमीटर दूर से आए मेहमान
- टेडिया डेम में प्रकृति का अद्भुत संगीत… प्रवासी पक्षियों का कलरव लौट आया
- गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान की आबोहवा में जल क्रीड़ा करती दो झुंड…स्थानीय लोग हुए मंत्रमुग्ध
- कभी आग ने घटा दी थी संख्या, इस बार घनी सर्दी और भरपूर बारिश ने फिर सजाया परिंदों का बसेरा
-राजन पाण्डेय-
कोरिया,08 दिसंबर 2025 (घटती-घटना)। सर्दियों की कोमल हवा और डूबते सूरज की सुनहरी रोशनी के बीच रविवार की शाम सिंघोर के टेडिया जलाशय में प्रकृति मानो गीत बन गई,गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान के रामगढ़ परिक्षेत्र में बसे इस शांत जलाशय पर दो अलग-अलग झुंड में प्रवासी पक्षियों का कलरव गूंजा—और दृश्य इतना मनोहारी था मानो पर्वतीय प्रतिध्वनि में पक्षी प्रेम की धुन छेड़ रहे हों, स्थानीय लोग कहते दिखे—बड़ी दूर से आये हैं…प्यार का तोहफा लाए हैं।
प्रवासी पक्षियों का मौसम…क्यों आते हैं वे हजारों किलोमीटर दूर से?
नवंबर से मार्च के बीच, जब उत्तरी और मध्य एशिया में कड़ाके की ठंड छा जाती है, यही पक्षी अपेक्षाकृत गर्म, भोजन-समृद्ध और सुरक्षित स्थानों की तलाश में लंबी दूरी तय करते हैं,टेडिया डेम जैसे जलाशय इन्हें सुरक्षित आश्रय, पर्याप्त भोजन (जलीय कीट, छोटे जीव, जलकाई) शांत जलवायु प्रदान करते हैं,इसलिए भारत के अनेक जलाशय सरौन डैम, प्रतापगढ़, और विश्व प्रसिद्ध भरतपुर का केवलादेव घाना राष्ट्रीय उद्यान हर वर्ष इन प्रवासी मेहमानों से गुलज़ार होते हैं।
लंबे समय बाद लौटी चहचहाहट,आग का खतरा कम होते ही बढ़ी मौजूदगी
नीलकंठ के पहाड़, बिजाधुर और टेडिया जलाशय का इलाका वर्षों से प्रवासी पक्षियों का पसंदीदा क्षेत्र रहा है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में बार-बार लगी आगों ने इनकी आबादी और आवास को प्रभावित किया था, इस बार स्थिति अलग है लगातार हुई बेहतर बारिश, जंगलों की हरीतिमा में वृद्धि, पर्याप्त जल स्तर, सर्दियों का कड़ापन ने फिर इन परिंदों को यहां ठहरने के लिए प्रेरित किया है, स्थानीय लोगों ने बताया कि पिछले कुछ हफ्तों में यहां पक्षियों के तैरने, उड़ान भरने और समूह में जल क्रीड़ा करते शानदार दृश्य लगातार दिख रहे हैं, मार्च तक इन पक्षियों के लौटने की उम्मीद है।
टेडिया डेम दो पहाड़ों के बीच बसा सौंदर्य का घर
स्थानीय जानकार बताते हैं कि इस डेम के निर्माण में तत्कालीन जल संसाधन मंत्री डॉ. रामचंद्र सिंहदेव की महत्वपूर्ण भूमिका रही, पहाड़ों के बीच स्थित यह जलाशय प्राकृतिक आकर्षण, सिंचाई क्षमता, हरियाली और पर्वतीय शांति, के कारण वर्षों से पक्षियों और प्रकृति प्रेमियों का पसंदीदा स्थल रहा है।
कौन-कौन आये मेहमान? विशेषज्ञ बताते हैं…
वन्य प्राणी विशेषज्ञ डॉ. अविनाश परिडा ने बताया भूरे सिर वाली गल एक प्रमुख प्रवासी प्रजाति है जो मध्य एशिया से सर्दियों में भारत आती है,सफेद शरीर,हल्के भूरे पंख और प्रजनन काल में गहरे भूरे सिर के कारण यह आसानी से पहचानी जाती है, वे आगे बताते हैं ये पक्षी दिशा निर्धारण के लिए सूर्य,तारे और पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र का उपयोग करते हैं, तटीय क्षेत्रों, नदियों, झीलों और आर्द्रभूमियों को पसंद करते हैं, पर्यावरण संतुलन में मैला ढोने वाले तथा छोटे जीवों के नियंत्रक शिकारी की भूमिका निभाते हैं, टेडिया डेम में इनका दिखना स्वस्थ पारिस्थितिकी का संकेत माना जा सकता है।
स्थानीय लोगों के लिए उत्सव जैसा माहौल
टेडिया डेम में इन दिनों सुबह-शाम लोगों का पहुंचना बढ़ गया है। दूर-दराज गांवों से भी परिवार पक्षियों को तैरते, उड़ते और एक दूसरे के साथ जल क्रीड़ा करते देखने आते हैं,पानी में उनकी लयबद्ध गतिविधियों और आसमान में गोलाकार उड़ानें बच्चों और युवाओं के लिए किसी प्राकृतिक उत्सव से कम नहीं।
प्रवासी पक्षी क्यों आते हैं?
मूल स्थानों पर कड़ाके की ठंड
भोजन की अधिक उपलब्धता
सुरक्षित जलाशय और शांत जलवायु
प्रजनन चक्र का अनुकूल समय
टेडिया डेम
क्यों खास?
दो पहाड़ों के बीच स्थित प्राकृतिक घाटी
स्वच्छ जल, हरियाली और कम मानव-दखल
लगातार बारिश से जलस्तर में सुधार
राष्ट्रीय उद्यान का शांत वातावरण
टेडिया डेम में अद्भुत कलरव…प्रवासी मेहमानों की वापसी से राष्ट्रीय उद्यान में गूँजी प्रकृति की धुन
जंगल फिर हरा, पक्षी फिर वापसी’- आग से प्रभावित क्षेत्र में इस बार हरियाली और ठंड ने फिर सजाया प्राकृतिक बसेरा…
‘मार्च तक रहेगा परिंदों का ठिकाना’- स्थानीय लोग सुबह-शाम झुंड देखने उमड़ रहे। डेम की शांति और सौंदर्य ने बनाया पसंदीदा ठिकाना…
‘टेडिया डेम डॉ. सिंहदेव की परिकल्पना’- दो पहाड़ों के बीच बना यह बांध आज भी क्षेत्र की पहचान, सिंचाई और वन्य जीवन का भरोसेमंद स्रोत

(वेलकम बोर्ड पर बैठे पक्षी)- गुरुघासीदास राष्ट्रीय उद्यान के टेडिया डेम में स्वागत पट्टी पर विराम लेते प्रवासी पक्षी सर्दियों की सुबह का अद्भुत दृश्य…

(ऊँची उड़ान वाला वाइड शॉट)-टेडिया डेम के शांत जल और हरियाली के बीच आसमान में उड़ान भरते प्रवासी पक्षियों के झुंड — सर्दियों में लौट आया प्रकृति का संगीत।”

(लकड़ी के ब्रिज वाला दृश्य )-टेडिया डेम के बीचों बीच बने लकड़ी के वॉकवे पर शांत जल में तैरते प्रवासी मेहमान — प्राकृतिक पर्यटन की अनोखी अनुभूति।

(लकड़ी का ब्रिज व उड़ते पक्षी )-“पहाड़ों के बीच बसे टेडिया डेम पर उड़ान भरते प्रवासी पक्षियों का मनोहारी दृश्य — राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में प्रकृति का संतुलन लौटने का संकेत।”
घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur