- पहाड़ की चोटी पर बसे नीलकंठ धाम से दिखता ‘हरीतिमा का अनंत सागर’
- कोरिया-सिंगरौली सीमा का छुपा खजाना: प्रकृति,शांति और अध्यात्म का दुर्लभ मेल
- राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में पर्यटन की अपार संभावनाओं का अनछुआ स्थल…
- राज्य सीमांत पर स्थित नीलकंठ धाम का विहंगम दृश्य…


-राजन पाण्डेय-
कोरिया सोनहत,07 दिसंबर 2025 (घटती-घटना)। छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले और मध्यप्रदेश के सिंगरौली जिले की सीमा पर स्थित सोनहत विकासखंड के ग्राम दसेर की प्रसिद्ध नीलकंठ पहाड़ी पर स्थापित नीलकंठ धाम इन दिनों अपनी अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता से श्रद्धालुओं और पर्यटकों का आकर्षण बना हुआ है, ऊँचाई पर बसे इस धार्मिक स्थल तक पहुँचने पर नीचे फैली घाटियों और चारों दिशाओं में फैली घनी हरितिमा का सागर मन मोह लेता है। दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालु यहां पहुंचकर न केवल भगवान नीलकंठ के दर्शन करते हैं,बल्कि प्रकृति के इस दुर्लभ संगम का आनंद भी लेते हैं। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहाँ की प्रार्थना से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, भारत डॉक्यूमेंट्री के कृपा शंकर पांडेय ने बताया कि यह क्षेत्र राष्ट्रीय उद्यान की सीमा के नजदीक है और इसके आसपास कई ऐसी ही आकर्षक व पर्यटन क्षमता वाली प्राकृतिक जगहें मौजूद हैं, जिन्हें संवारकर बड़े पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जा सकता है।
नीलकंठ धाम राज्य सीमा की ऊँचाई पर बसा चमत्कारी आध्यात्मिक स्थल
छत्तीसगढ़ के कोरिया और मध्यप्रदेश के सिंगरौली जिले की सीमा पर, सोनहत विकासखंड के ग्राम दसेर में स्थित नीलकंठ धाम,पहाड़ की ऊँचाई पर बसा एक ऐसा धार्मिक स्थल है जहाँ पहुँचते ही यात्रियों को लगता है मानो वे बादलों और हरियाली को छू रहे हों, यह धाम नीलकंठ पहाड़ी पर स्थित है,और ऊपर से देखने पर चारों दिशाओं में फैला घने जंगलों का हरा महासागर ऐसा प्रतीत होता है मानो प्रकृति ने स्वयं इस स्थल को अलौकिक आभा से सजाया हो।
श्रद्धा का केंद्र…मनोकामना पूरी करने वाला धाम
दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालु मानते हैं कि यहां की पूजा और प्रार्थना मनोकामनाओं को पूर्ण करती है, धाम के आसपास का वातावरण पूर्ण रूप से शांत, आध्यात्मिक और ऊर्जावान है यही कारण है कि लोग यहाँ सिर्फ दर्शन के लिए नहीं, बल्कि मानसिक शांति के लिए भी आते हैं।
प्रकृति की गोद में अनछुए पर्यटन स्थल
नीलकंठ धाम के आसपास विस्तृत वन क्षेत्र, घाटियाँ, पहाड़ी ढलान और प्राकृतिक दृश्य इसे ‘हिडन नेचर व्यू प्वाइंट’ बनाते हैं,भारत डॉक्यूमेंट्री के कृपा शंकर पांडेय बताते हैं इस राष्ट्रीय उद्यान सीमा क्षेत्र में कई ऐसी पर्यटन योग्य जगहें हैं,जिन्हें विकसित किया जाए तो यह क्षेत्र राज्य के प्रमुख इको-टूरिज्म सर्किट में शामिल हो सकता है।
पहुँच मार्ग और यात्रा अनुभव
धाम तक पहुँचने का रास्ता साहसिक यात्रा जैसा अनुभव देता है।
पहाड़ी रास्तों पर वाहन चढ़ाई के साथ-साथ पैदल यात्रा भी रोमांच बढ़ाती है।
शीर्ष पर पहुँचते ही विरान पहाडि़यों के बीच अचानक खुलते विशाल हरियाली दृश्यों का पैनोरमा यात्रियों को मंत्रमुग्ध कर देता है।
फोटो स्पॉट…ड्रोन व्यू से और भी अद्भुत
ड्रोन से देखने पर पहाड़ी शिखर पर बसा छोटा-सा धाम
और उसके चारों ओर फैली गहरी घाटियां…
सोशल मीडिया पर पोस्ट करने लायक बेहतरीन फ्रेम देते हैं।
इको-टूरिज्म,धार्मिक टूर और ट्रेकिंग…नीलकंठ धाम भविष्य का बड़ा पर्यटन हब
यह क्षेत्र
आध्यात्मिक पर्यटन
प्रकृति प्रेमियों
ट्रेकिंग उत्साहियों
और पारिवारिक यात्राओं
सभी के लिए आकर्षक बन सकता है, यदि आधारभूत सुविधाओं और प्रचार-प्रसार को बढ़ाया जाए।
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