80 गाँवों की प्यास बुझाने वाली योजना खुद प्यास से तड़प रही…5 करोड़ से अधिक खर्च, टंकियां अधूरी, पाइपलाइन बंद, पानी का अता-पता नहीं



-राजन पाण्डेय-
कोरिया/सोनहत,02 दिसंबर 2025 (घटती-घटना)। नल है तो जल नहीं, जल है तो नल नहीं जल जीवन मिशन के इन जमीनी हालातों ने इस पंचलाइन को कोरिया जिले में कड़वी सच्चाई बना दिया है, केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना, जिसका उद्देश्य था हर गांव-हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाना, आज कोरिया जिले के सोनहत व आसपास के क्षेत्रों में बदहाली, भ्रष्टाचार, लापरवाही और कागजी दावों की बलि चढ़ चुकी है, 80 ग्रामों के लिए बनी जल प्रदाय योजना और लगभग 5 करोड़ की 44 टंकियों का हाल यह है कि कई टंकियां अधूरी पड़ी हैं, कई की टोंटियां टूटी हैं, पाइपलाइन गायब सोर्स नहीं, मोटर नहीं, कनेक्शन अधूरा और जहां नल लगे हैं, वहां एक बूंद पानी तक नहीं, विभाग दावा करता है 15-17 गांव में पानी पहुंच रहा है लेकिन ग्रामीणों की सच्चाई इसके बिल्कुल उलट है।
4 पानी टंकियां…2 सालों में भी पूरी नहीं…कई गांवों में काम शुरू तक नहीं…
पीएचई विभाग ने दावा किया था कि सोनहत विकासखंड में 44 टंकियां तैयार होंगी और 80 गांवों में जल उपलब्ध होगा,पर जमीनी हकीकतः कई टंकियां आधी बनी छोड़ दी गईं,कई में दरारें आ गईं,कई का कनेक्शन ही नहीं,कई गांवों में काम शुरू भी नहीं हुआ,पुरानी टंकियां ही मजबूरी में उपयोग की जा रही हैं, यह स्थिति भ्रष्टाचार और ठेकेदार-अफसर गठजोड़ की ओर इशारा करती है।
सोनहत सबसे बुरा हालःनई टंकियां बनीं…कनेक्शन गायब…
सोनहत मुख्यालयः पानी की टंकी आधी बनते ही पुराने नल-ठीहे टूटे, पाइपलाइन खराब, कनेक्शन नहीं, 20 वार्ड में से सिर्फ 2-3 वार्ड में पुरानी टंकी से थोड़ा पानी, भुनिहारिपाराः 12 लाख से बनी बड़ी टंकी पर एक बूंद पानी नहीं, स्टेडियम ग्राउंड टंकीः कागज में चालूजमीन पर बंद, ओर्गाई, कैलाशपुरः 12 लाख की टंकियां एक दिन पानी आया, फिर बंद, ग्रामीण आज भी बाल्टी लेकर भटक रहे हैं।
रामगढ़…क्रेडा पीएचई से बेहतर, पर अधूरी व्यवस्था
रामगढ़ में सोलर प्लांट लगे, लेकिन टंकी नहीं, कुछ मुहल्लों में मोटर नहीं, कुछ में कनेक्शन टूटा, सिंघाड़ी पारा में पानी मिलता है, बाकी जगह हालात खराब यानी जहां क्रेडा थोड़ा बेहतर है, वहां भी व्यवस्था आधी-अधूरी।
कटगोड़ी…12 लाख की टंकियां, पर टोंटी से पानी नहीं
कटगोड़ी क्षेत्र मेंः दमुज, लब्जी 2 साल से पानी नहीं, केराझरिया, तर्रा, बसेर, रावतसरई नल नहीं, सुंदरपुर टंकी बनी, कनेक्शन नहीं, कुछ गांवों में सोलर प्लांट से थोड़ा पानी, लेकिन नियमित आपूर्ति नहीं
पराडोल,अकलासरई, भैसवार 12 लाख की टंकियां शो-पीस बनकर खड़ी
भैसवार, जामटिकराः टंकी बनी, पानी नहीं, अकलासरई-पराडोलः सिर्फ ढांचा खड़ा पाइपलाइन नहीं मोटर नहीं, बंशीपुर-कचोहरः क्रेडा ने पानी दिया पीएचई ने कनेक्शन ही नहीं लगाया।
सबसे बड़ा प्रश्नः क्या 5 करोड़ की टंकियों में “पानी” से ज्यादा “कमिशन” भरा गया?
ग्रामीणों का आरोपः बिना सोर्स देखे निर्माण शुरू कर दिया गया, पाइपलाइन बिछाने की जगह सिर्फ बिल पास हुए, मोटर लगे बिना टंकियों का भुगतान किया गया, काम अधूरा छोड़ ठेकेदार गायब, पीएचई विभाग सोया रहा सरकार बदली, पर जल जीवन मिशन की गड़बडि़यां जस की तस रहीं।
स्कूल आंगनबाड़ी में रनिंग वाटर भी फेल,4 साल से भुगतान अटका,सप्लायर कर्ज में डूबे
सोनहत के सप्लायर सूर्य प्रकाश साहू बताते हैं हमने सामग्री दी, पर 4 साल से 12 लाख का भुगतान नहीं हुआ, हमारे जैसे कई सप्लायर कर्ज में डूब गए हैं, शिकायतें दीं एसडीएम, सीईओ, कलेक्टर, कमिश्नर, सीएम पोर्टल तक… पर पैसा नहीं मिला, अधिकांश स्कूल-आंगनबाड़ी मेंः नल सूखे, पाइप टूटे,मोटर खराब बच्चे बूंद-बूंद के लिए तरस रहे।
कटगोड़ी समूह जल प्रदाय योजना ठप्प…
35 गांव प्यासे छोड़ दिए गए पूर्व सरकार में स्वीकृत कटगोड़ी समूह आधारित जल प्रदाय योजना अब निरस्त, इससे 35 गांव फिर से पानी समस्या में, करोड़ों फाइलों में दफन, लोग टैंकर और हैंडपंप पर निर्भर, ग्रामीणों की मांग सोनहत ब्लॉक में पीएचई कार्यालय खोला जाए, अधिवक्ता जयचंद सोनपाकर ने कहा ब्लॉक स्तर पर पीएचई ऑफिस नहीं, शिकायत के लिए लोगों को बैकुंठपुर जाना पड़ता है, अधिकारी सोनहत में रुकते तक नहीं,पूरा ब्लॉक 2-3 टेक्नीशियन के भरोसे है, ये स्थिति बताती है कि जल जीवन मिशन केवल कागजों में सफल है।
विभाग का दावा 15-17 गांव में पानी चल रहा…ग्रामीणों का जवाब”एक दिन आया,फिर बंद!
पीएचई कार्यपालन अभियंता ने दावा कियाः 15-17 गांव में पानी पहुंच रहा, क्रेडा को भुगतान न होने से 38 साइट में पंप नहीं, बाकी काम पूर्ण लेकिन ग्रामीणों के अनुसार पानी अनियमित, मोटर बंद, टोंटी सूखी, पाइपलाइन टूटी, टंकी जुगाड़ में यानी दावा और जमीन दोनों में जमीन-आसमान का फर्क।
जल जीवन मिशन 5 करोड़ में सिर्फ टंकियां,पानी कहीं नहीं!
सोनहत-बैकुंठपुर-कटगोड़ी-रामगढ़-भैसवार-पराडोल— हर जगह एक ही कहानी नल है तो जल नहीं… जल है तो नल नहीं… और जहां दोनों हैं—वहां पानी एक दिन आता है, फिर महीनों गायब, लोग पूछ रहे हैं पानी का क्या? 5 करोड़ किसने पी लिया? सरकार को अब चुनना होगा या तो पूरी जांच या टंकियां ऐसे ही सफेद हाथी बनकर खड़ी रहेंगी।
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