- दो जिलों में एक जैसी गड़बड़ी और दोनों जगह एक ही अधिकारी!
- क्या यह सिर्फ इत्तेफाक या फिर संगठित भर्ती-तंत्र?
- एमसीबी में गड़बड़ी के आरोप झेलने वाला अधिकारी सूरजपुर में भी भर्ती विवाद के बीच…क्या विशेष संरक्षण मिला?
- महिला बाल विकास मंत्री के ही संभाग में दो जिलों में गड़बड़ी…क्या मंत्रालय को इसकी भनक नहीं?
- अभ्यर्थियों की शिकायतें कलेक्टर के पास लंबित…फिर भी चयन सूची जारी, शपथ-पत्र लेना शुरू
- दो जिलों में एक जैसे विवाद…यह संयोग है या ‘समझी-समझाई योजना’?
- एमसीबी और सूरजपुर…दोनों जिलों की महिला एवं बाल विकास भर्ती में अनुभव प्रतिशत अंक हेराफेरी का समान पैटर्न
- दोनों जिलों में एक ही अधिकारी की भूमिका पर उठे सवाल…क्या मंत्री स्तर पर कोई विशेष संरक्षण?
- कलेक्टर को दिए गए दर्जनों आवेदन लंबित…फिर भी चयन सूची जारी,अभ्यर्थी भड़क उठे…”यह खेल पहले से तय…
- इंटरव्यू में ‘कॉल कर बुलाए जाने’ का आरोप, चयनितों से शपथ-पत्र…गड़बड़ी स्वीकारने जैसा प्रशासनिक कदम…

-शमरोज खान-
सूरजपुर/एमसीबी, 01 दिसंबर 2025 (घटती-घटना)। महिला एवं बाल विकास विभाग की भर्तियों में लगातार गड़बड़ी के आरोपों के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या दो जिलों में एक जैसी गड़बड़ी करने वाले अधिकारी को किसी मंत्री का संरक्षण प्राप्त है? जो अधिकारी एमसीबी में भर्ती विवादों के केंद्र में था उसे सूरजपुर में भी वही जिम्मेदारी और वही प्रक्रिया क्यों सौंप दी गई? क्या यह महज इत्तेफाक है? या कोई समझी-बूझी साजिश, जिसकी परतें अब खुलनी शुरू हुई हैं? महिला एवं बाल विकास विभाग की भर्ती में प्रदेश के दो जिलों मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर और सूरजपुर में एक जैसी गड़बड़ी सामने आने से अब पूरा संभाग राजनीतिक और प्रशासनिक सवालों में घिर गया है, दोनों जिलों में अनुभव बदलना, प्रतिशत में मनमानी,अंक जोड़ना-घटाना,फेवरिट नामों को लाभ देना,अपात्रों को पात्र सूची में चढ़ा देना,शिकायतों को नजरअंदाज करना जैसे गंभीर आरोप लगे हैं,और सबसे बड़ा सवाल यह है कि दोनों जिलों की इस गड़बड़ी में जिस अधिकारी की भूमिका सामने आ रही है,वह एक ही है। बता दे की दो जिलों की गड़बड़ी अब एक जिले का मामला नहीं,एक सिस्टम का संकट बन चुकी है,जब शिकायतें नजरअंदाज हों, चयन सूची जल्दी जारी हो, एक ही अधिकारी दो जिलों में विवादों में घिरा हो, और मंत्री स्तरीय मौन बना रहे तो यह मामला अब उच्च स्तरीय जांच,विभागीय ऑडिट, और निलंबन कार्रवाई की माँग करता है।
पैटर्न एक,जिले दो और अधिकारी एक
एमसीबी की भर्ती पर शुरू में सवाल उठे, वहीं आरोप अब सूरजपुर तक पहुंच गए,और दोनों जगह भर्ती का तरीका लगभग कॉपी-पेस्ट जैसा है, दोनों जिलों में एक ही श्रेणी की गलतियाँ,एक जैसे चयन पैटर्न,और एक जैसी हेराफेरी इसके बाद यह संदेह मजबूत हुआ कि क्या किसी विशेष अधिकारी को यही भूमिका निभाने के लिए जानबूझकर दूसरे जिले भेजा गया?
मंत्री के खास बताए जाते हैं जिला कार्यक्रम अधिकारी शुभम बंसल पर गंभीर आरोप
सूत्रों व अभ्यर्थियों का दावा है कि जिला कार्यक्रम अधिकारी शुभम बंसल को मंत्री का नज़दीकी माना जाता है मनेन्द्रगढ़ (एमसीबी) में जिनकी नियुक्तियों पर सवाल उठे अब वही सूरजपुर जिले की चयन प्रक्रिया में निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं, यह भी समझ से परे है कि दो जिलों में एक ही अधिकारी के रहते एक जैसी गड़बड़ी सामने आना सिर्फ संयोग कैसे हो सकता है?
मंत्री के संभाग में दो जिलों की गड़बड़ी…क्या संरक्षण?
यह पूरा विवाद महिला एवं बाल विकास मंत्री के ही संभाग में हुआ है दो जिलों में एक जैसी गड़बड़ी होने के बावजूद,कोई निलंबन नहीं, कोई जांच नहीं, कोई शो-काज़ नोटिस नहीं, न ही चयन पर रोक,क्या यह अधिकारी किसी मंत्री या विभागीय लॉबी के विशेष संरक्षण में है? यह सवाल अब ज़ोरों से उठ रहा है,क्या दो जिलों में एक जैसे आरोपों में घिरे अधिकारी को किसी मंत्री का संरक्षण प्राप्त है? यदि नहीं तो फिर गड़बड़ी वाले अधिकारी को नई जिम्मेदारी क्यों मिली? शिकायतों की जांच बंद क्यों पड़ी? चयन सूची इतनी जल्दी क्यों जारी हुई? शपथ-पत्र की मजबूरी क्यों? दो जिलों में एक जैसे पैटर्न कैसे बने? और यदि हाँ, तो यह भ्रष्टाचार का संगठित मॉडल है,जो महिलाओं-शिशु कल्याण जैसे संवेदनशील विभाग में चल रहा है।
रीता मिंज को कथित रूप से “कॉल कर बुलाया गया”…नया विस्फोट
सूत्रों के अनुसार,रीता मिंज,जो पहले सरगुजा चाइल्ड हेल्पलाइन में कार्यरत थीं, उन्हें अधिकारियों द्वारा इंटरव्यू के लिए बुलाया गया बताया जा रहा है, यह आरोप भर्ती की निष्पक्षता पर सीधे प्रहार करता है कि क्या चयन सूची पहले से ‘फिक्स’ थी?
शुभम बंसल पर गंभीर आरोप… दोनों जिलों में एक जैसा खेल
जिला कार्यक्रम अधिकारी शुभम बंसल पर दोनों जिलों में गड़बड़ी का नेतृत्व करने के आरोप हैं, अभ्यर्थियों का आरोप है कि एमसीबी में जो हुआ, वही सूरजपुर में भी हुआ और दोनों जगह वही अधिकारी था, शुभम बंसल को मंत्री का करीबी बताने की चर्चाएँ भी चल रही हैं, जिससे यह विवाद और गहरा गया है।
कलेक्टर को आवेदन लंबित… लेकिन चयन सूची जारी
सैकड़ों अभ्यर्थियों ने गलत अनुभव अंक,प्रतिशत में बदलाव, फेवरिटिज़्म,गलत दस्तावेज़ मिलान जैसी शिकायतें सूरजपुर कलेक्टर को दीं,परंतु जांच से पहले ही चयन सूची जारी कर दी गई,यह एक बड़ा सवाल बन गया है कि क्या जिला कार्यक्रम अधिकारी कलेक्टर से भी अधिक शक्तिशाली?
चयनित अभ्यर्थियों से “शपथ-पत्र” क्यों?
सबसे चौंकाने वाली जानकारी जिला कार्यक्रम अधिकारी चयनित उम्मीदवारों से शपथ पत्र भरवा रहे हैं, शपथ पत्र में लिखा है यदि आपके अनुभव या अंक में कोई गड़बड़ी मिली तो कार्रवाई की जाएगी अर्थात जिन्हें चयनित कर दिया गया है…उन्हीं से गड़बड़ी स्वीकारने की संभावना वाला शपथपत्र…यह कैसा चयन है जिसमें अधिकारी खुद मान रहा है कि गड़बड़ी हो सकती है? कानूनी मोड़ लेने वाला है।
अभ्यर्थी बोले:हम हाई कोर्ट जाएंगे…ये भर्ती धोखा है…
कलेक्टर के स्तर पर कोई सुनवाई न होने पर दोनों जिलों के अभ्यर्थी हाई कोर्ट में याचिका दाखिल करने जा रहे हैं उनका आरोप है यह संगठित भर्ती घोटाला है एक अधिकारी,दो जिले,एक जैसा खेल
सवाल-1: एमसीबी में गड़बड़ी में घिरे अधिकारी को सूरजपुर क्यों बुलाया गया? जिन अधिकारी पर एमसीबी जिले में प्रतिशत बदलने,अनुभव मिलाने-जोड़ने,फेवरेट उम्मीदवारों को लाभ देने जैसे गंभीर आरोप लगे थे…उसी अधिकारी को सूरजपुर जिले में भी भर्ती प्रक्रिया का प्रभारी बनाना कई संदेह खड़े करता है, क्या किसी को जानबूझकर दूसरे जिले में भेजकर वही खेल दोहराया गया?
सवाल-2: क्या मंत्री अपने ही संभाग में ऐसी गड़बड़ी बर्दाश्त कर सकती हैं? गड़बड़ी का दायरा सिर्फ एक जिले तक नहीं रहा अब संभाग के दो जिले (एमसीबी और सूरजपुर) एक जैसे विवाद में घिर चुके हैं,यदि मंत्री को इसकी जानकारी नहीं है तो यह विभागीय विफलता है और अगर जानकारी है तो यह राजनीतिक संरक्षण का संकेत।
अंतिम सवाल
क्या दो जिलों में एक जैसी गड़बड़ी… एक ही अधिकारी और समान पैटर्न—सिर्फ संयोग है?
या फिर इसमें मजबूत राजनीतिक प्रशासनिक संरक्षण काम कर रहा है?
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