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सोनहत@सांसद प्रतिनिधि रुद्र साहू ने धान खरीदी केंद्रों का लिया जायजा,किसानों की समस्याओं से हुए अवगत

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डीएपी यूरिया की कमी पर जताई गंभीर चिंता, कहा खाद उपलब्धता जल्द सुनिश्चित कराएंगे…


-संवाददाता-
सोनहत,26 नवंबर 2025
(घटती-घटना)।

सांसद प्रतिनिधि रुद्र साहू ने कटगोड़ी व सोनहत क्षेत्र के धान खरीदी केंद्रों का निरीक्षण कर खरीदी व्यवस्था का जायजा लिया,रुद्र ने मौके पर मौजूद किसानों से फसल तुलाई, ट्रक-लिफ्टिंग, चेक-पेमेंट और रकबा कटौती से जुड़ी समस्याएँ विस्तार से सुनीं, उन्होंने कहा कि किसानों को खरीदी में किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं आए, यह हमारी प्राथमिक जिम्मेदारी है। कोई भी समस्या हो—मुझे सीधे अवगत कराएं, मैं 24 घंटे उपलब्ध हूँ।
रकबा कटौती की शिकायत—रुद्र ने दिलाया समाधान का भरोसा…कुछ किसानों ने अपने रकबे कटने की शिकायत की। इस पर रुद्र साहू ने कहा तहसील कार्यालय में सम्पर्क कर कटे हुए रकबे फिर से जोड़ा जाएगा,जिस किसान का रकबा गलत तरीके से घटा है, उसे न्याय दिलाना हमारी प्राथमिकता है उन्होंने प्रभारी प्रबंधकों से खरीदी केंद्रों पर व्यवस्था सुचारू रखने और किसानों की परेशानी दूर करने का निर्देश भी दिया।
डीएपी-यूरिया की भारी किल्लत,रुद्र ने जताई चिंता-रुद्र साहू ने किसानों की सबसे गंभीर समस्या उठाई डीएपी खाद की कमी, उन्होंने कहा समितियों में आपूर्ति कम और किसानों की मांग बहुत अधिक है। रबी फसल का सीजन आधा बीत चुका है, ऐसे में खाद न मिलना किसानों के लिए संकट बन गया है, किसान लगातार समितियों और सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन जरूरत के अनुरूप खाद उपलब्ध नहीं हो रही है।
सोनहत की समितियां खाली—डीएपी,इफको, यूरिया सभी स्टॉक आउट-डीएपी संकट का सबसे गंभीर असर सोनहत ब्लॉक में नजर आया, रिपोर्ट के अनुसार एक भी बोरी डीएपी स्टॉक में नहीं बची, सोनहत,रजौली और रामगढ़ समितियों में इफको और यूरिया भी उपलब्ध नहीं, किसान गेहूँ, चना, तिवरा, मसूर, सरसों जैसी रबी फसलों की बुवाई के लिए खाद को लेकर परेशान हैं, रुद्र साहू ने प्रशासन से तत्काल खाद उपलब्ध कराने की मांग करते हुए कहा कि “अगर अभी खाद नहीं मिला, तो पूरी रबी फसल प्रभावित हो जाएगी।
किसानों की आवाज…खाद नहीं—तो फसल नहींज् किसके पास जाएँ? स्थानीय किसानों ने बताया कि खाद की तलाश में वे कई समितियों का चक्कर लगा चुके हैं, गेहूं की बुवाई का समय निकल रहा है,दलहन,तिलहन फसलों के लिए डीएपी अत्यंत आवश्यक है, जाएँ भी तो कहाँ जाएँ? यह किसानों की सबसे बड़ी चिंता बन गई है।


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