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सूरजपुर@मुख्यालय में नहीं रहते पीडब्लूडी के अफसर-कर्मचारी,जनता परेशान

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सरकारी क्वार्टर होने के बाद भी रोज़ाना दूसरे जिलों से आना-जाना,कामकाज ठप, आदेश हवा में…


-ओंकार पाण्डेय-
सूरजपुर,17 नवंबर 2025 (घटती-घटना)।
शासन द्वारा बार-बार दिए जा रहे निर्देशों के बावजूद नगर के कई सरकारी विभागों के अधिकारी और कर्मचारी मुख्यालय में नहीं रहते, इसका सीधा असर आम जनता के कामकाज पर पड़ रहा है, लेकिन इस मनमानी पर न कार्रवाई हो रही है,न ही कोई जवाबदेही तय की जा रही है। शिकायतें कई बार उच्चाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों तक पहुंचाई गईं, मगर हर बार कार्रवाई के नाम पर सिर्फ आश्वासन ही मिला। जिले में दौरे पर आने वाले प्रभारी मंत्री, विभागीय मंत्री और कलेक्टर स्पष्ट निर्देश देते हैं कि सभी अधिकारी अपने-अपने मुख्यालय में रहें, पर हालात जस के तस हैं।
पीडब्लूडी में मनमानी सबसे ज्यादा, सरकारी र्क्वाटर होने के बाद भी बाहर से आना-जाना
पीडब्लूडी विभाग के अफसरों की मुख्यालय से गैरहाजिरी अब एक खुला राज बन चुकी है,एसडीओ राजू वर्मा,सरकारी र्क्वाटर आवंटित,फिर भी प्रतिदिन सरगुजा से आना-जाना,नतीजा फील्ड निरीक्षण और जनता से जुड़े काम प्रभावित,सब-इंजीनियर प्रमोद गुप्ता रामानुज नगर में अधिकृत मर्टर,लेकिन सूरजपुर से रोज़ सफर कार्यस्थल पर उपलब्धता कम,सब-इंजीनियर सुधीर बड़ा,प्रतापपुर में आवंटित सरकारी निवास, फिर भी सरगुजा से आते-जाते,सब इंजीनियर पंकज जिला मुख्यालय में है अधिकृत विभागीय कार्य प्रगति मानों ठप्प,इनकी अनुपस्थिति से निर्माण कार्यों की मॉनिटरिंग, शिकायतों का निस्तारण और ग्रामीण क्षेत्रों में निरीक्षण कार्य गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है।
आम जनता की शिकायत,ऑफिस
में अधिकारी मिलते ही नहीं…

नागरिकों का कहना है कि अधिकारी मुख्यालय में नहीं ठहरते, अचानक आवश्यकताओं में संपर्क नहीं हो पाता, सरकारी कामों में अनावश्यक देरी,आपात स्थितियों में भी साहब शहर में नहीं हैं का जवाब मिलता है
प्रशासन की निष्कि्रयता भी सवालों के घेरे में…
जब उच्च स्तर से लिखित और मौखिक दोनों तरह के आदेश मौजूद हैं,तो फिर इन अफसरों पर कार्रवाई क्यों नहीं? क्या विभागीय अधिकारियों को पूरी छूट दे दी गई है? या फिर मुख्यालय में न रहने का यह प्रचलन प्रशासन की नज़र में अपराध नहीं? मुख्यालय में न रहने वाले अफसरों की यह मनमानी सिर्फ शासन के आदेश का उल्लंघन नहीं,बल्कि जनता के अधिकारों से खिलवाड़ है,जरूरत अब औपचारिक चेतावनी नहीं, कड़ी कार्रवाई की है,ताकि जनता को राहत मिले और विभागों का कामकाज पटरी पर लौटे।


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