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बैकुंठपुर@नहरों की मरम्मत के लिए छिंदिया उपसरपंच ने किसानों के साथ दिया ज्ञापन

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खैरी जलाशय लबालब, पर नहरों की जर्जर हालत से किसानों को नहीं मिल रहा पानी… विभाग का जवाब, “बजट नहीं”

  • विगत 3 वर्षों से किसानों को नहीं मिल रहा सिंचाई के लिए पानी
  • सुशासन तिहार के अलावा जिला कलेक्टर और विधायक को भी ज्ञापन देने का नहीं हुआ है लाभ
  • विभागीय अधिकारियों का कहना,बजट के अभाव में मरम्मत कार्य रुका
  • खरीफ की फसल बोंए या नहीं,संशय में किसान


-रवि सिंह-
बैकुंठपुर,12 नवंबर 2025
(घटती-घटना)।

क्षेत्र में बीते वर्षों से अच्छी बारिश के कारण जलाशय और बांध लबालब हैं,लेकिन किसानों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है, खैरी जलाशय से निकलने वाली नहरें जर्जर होने के कारण पिछले तीन वर्षों से किसानों को सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल रहा,जिससे क्षेत्र के किसान खरीफ फसलों को लेकर संशय में हैं।
पिछले कुछ वर्षों से क्षेत्र में अच्छी वर्षा होने के कारण कोरिया जिले के बांध और जलाशय तो लबालब भर रहे हैं, परंतु नहरों की जर्जर स्थिति के कारण जलाशयों और बांध में एकत्रित पानी का लाभ किसानों को सिंचाई के लिए उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। क्षेत्र के किसान सिंचित जमीन होने के बावजूद केवल प्राकृतिक वर्षा पर निर्भर हैं और खरीफ फसलों का लाभ नहीं ले पा रहे हैं। कोरिया जिला मुख्यालय बैकुंठपुर से लगभग 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित अमहर खैरी जलाशय,जो क्षेत्र के चार पांच पंचायतों के किसानों के लिए खरीफ फसलों हेतु पर्याप्त पानी उपलब्ध दशकों से करता रहा है,3 वर्षों से जलाशय में पर्याप्त पानी होने के बावजूद क्षेत्र के किसानों का इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसका एकमात्र कारण है, वर्षों पूर्व निर्मित हुए नहरों की जर्जर स्थिति। विगत कई वर्षों से नहरों की माकुल मरम्मत नहीं की गई है, जिसके कारण नहर के पाट या तो टूट गए हैं, या जगह-जगह पर उनमें लीकेज की समस्या बनी हुई है। इस समस्या से सबसे ज्यादा पीडि़त ग्राम पंचायत छिंदिया के किसान हैं, जिन्हें पिछले तीन वर्षों से जलाशय में पर्याप्त पानी होने के बावजूद फसलों के लिए पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।
चिरमिरी में नाली के गंदे पानी को साफ करने में लगे एसटीपी प्लांट पूर्णतः फ्लॉप — डोमरु रेड्डी
कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने जनदर्शन में कलेक्टर से की मुलाकात,12 करोड़ की योजना को बताया ‘फर्जीवाड़ा’
चिरमिरी,12 नवम्बर 2025 (घटती-घटना)। पर्यावरण संरक्षण के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च करने के बावजूद चिरमिरी में स्थापित एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) अब फ्लॉप प्रोजेक्ट साबित हो रहे हैं,पूर्व महापौर एवं जिला कांग्रेस उपाध्यक्ष के. डोमरु रेड्डी ने मंगलवार को कांग्रेस नेताओं के साथ जनदर्शन में कलेक्टर से मुलाकात कर आरोप लगाया कि एसईसीएल प्रबंधन द्वारा चिरमिरी क्षेत्र में करोड़ों की योजनाओं में खुली लूट मचाई जा रही है।
12 करोड़ का ‘सफेद हाथी’ बना ट्रीटमेंट प्लांट
जानकारी के अनुसार, गोदरीपारा,हल्दीबाड़ी के एनसीपीएच कॉलरी और चिरमिरी कॉलरी बरतुंगा के कोठारी क्षेत्र में नालियों से निकलने वाले गंदे पानी को ट्रीटमेंट कर साफ करने हेतु लगभग 12 करोड़ की लागत से तीन एसबीआर सिस्टम स्थापित किए गए थे, परंतु आज स्थिति यह है कि तीनों प्लांट पूरी तरह निष्कि्रय हैं, और इनमें से एक भी कॉलोनी का गंदा पानी इनसे होकर नहीं गुजरता। पूर्व महापौर रेड्डी ने कहा एसईसीएल ने इस योजना में जनता के टैक्स का पैसा पानी की तरह बहा दिया। प्लांट चालू दिखाने के लिए नालियों का नहीं, बल्कि बोरिंग के साफ पानी का कृत्रिम बहाव दिखाया जा रहा है।
कागजों में ‘क्लीन वाटर’,जमीन पर गंदगी
एनजीटी के सख्त निर्देशों के बाद पर्यावरण सुरक्षा के नाम पर बनाई गई यह योजना कागजों में तो ‘क्लीन वाटर प्रोजेक्ट’ दिखती है, लेकिन हकीकत में यह सिर्फ कागजी खानापूर्ति साबित हो रही है, नालियों का कनेक्शन प्लांट से न जुड़ने के कारण एक लीटर भी गंदा पानी फिल्टर नहीं होता, और जो प्लांट “प्रदूषण नियंत्रण” के लिए बनाए गए थे, वे अब सिर्फ दिखावटी ढांचा बनकर खड़े हैं।
भुगतान पहले, काम अधूरा
रेड्डी ने आरोप लगाया कि अधूरे काम के बावजूद ठेकेदार को भुगतान कर दिया गया, और अब मेंटेनेंस के नाम पर दोबारा राशि जारी की जा रही है। इसके अलावा, निर्माण एजेंसी द्वारा एसईसीएल कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने की बात अनुबंध में दर्ज थी, लेकिन उस दिशा में भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। “कंपनी ने सिर्फ कागजों में रिपोर्ट बनाई, जमीनी स्तर पर कुछ नहीं किया। अब समय आ गया है कि इस फर्जीवाड़े की जांच उच्च स्तरीय समिति से कराई जाए।
जनदर्शन में कलेक्टर से मुलाकात
कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने जनदर्शन के दौरान जिला कलेक्टर से इस पूरे मामले की शिकायत की और एसईसीएल पर धोखाधड़ी, भ्रष्टाचार और जनता से छल का आरोप लगाया। प्रतिनिधिमंडल ने यह भी कहा कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो वे इस मामले को राज्य शासन और पर्यावरण विभाग के समक्ष उठाएंगे।
जवाबदेही की मांग…
पूर्व महापौर ने कहा कि यह केवल वित्तीय अनियमितता का मामला नहीं है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की भावना से भी खिलवाड़ है। सरकार की योजनाओं का उद्देश्य जनता को सुविधा देना था,लेकिन चिरमिरी में यह योजना भ्रष्टाचार का केंद्र बन गई है। दोषियों पर कार्रवाई आवश्यक है।
ज्ञापन और गुहार का सिलसिला जारी
किसानों की समस्या को लेकर ग्राम पंचायत छिंदिया की उप सरपंच श्रीमती अंजू जायसवाल ने नहरों की मरम्मत के लिए कई बार अधिकारियों को आवेदन दिया, उन्होंने यह मुद्दा सुशासन तिहार के दौरान भी उठाया, साथ ही जिला कलेक्टर और क्षेत्रीय विधायक को भी ज्ञापन सौंपा, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी ना कोई निरीक्षण हुआ, ना ही मरम्मत कार्य प्रारंभ। उपसरपंच अंजू जायसवाल ने कहा तीन साल से किसान सिर्फ आश्वासन सुन रहे हैं। जलाशय में पानी भरा है, लेकिन नहरों के टूटे पाटों से एक बूंद भी खेतों तक नहीं पहुंच रही।
खरीफ फसल पर संकट, ‘सिंचित भूमि पर भी वर्षा पर निर्भर किसान’
बैकुंठपुर मुख्यालय से लगभग 12 किलोमीटर दूर अमहर-खैरी जलाशय दशकों से क्षेत्र के चार-पांच पंचायतों के किसानों की सिंचाई का प्रमुख स्रोत रहा है, परंतु अब स्थिति यह है कि जलाशय में पर्याप्त पानी होने के बावजूद नहरों की खराब स्थिति के कारण किसानों को एक बूंद पानी नहीं मिल रहा, नहरों के पाट टूट चुके हैं, जगह-जगह लीकेज हैं और कई स्थानों पर नालियां जाम हैं, ग्राम पंचायत छिंदिया के किसान सबसे अधिक प्रभावित हैं, जिन्हें लगातार तीसरे वर्ष भी जल की आपूर्ति नहीं मिल सकी है।
अधिकारियों ने बजट की कमी बताई…
किसानों की समस्या को लेकर जब उपसरपंच ने जल संसाधन विभाग के कार्यपालन अभियंता श्री ए.के. निराला से मुलाकात की,तो उन्होंने बजट की अनुपलब्धता को वजह बताया, अधिकारी ने बताया कि नहरों की मरम्मत के लिए लगभग ?3 करोड़ का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है, जबकि पुनर्निर्माण के लिए ?8 करोड़ का अलग प्रस्ताव लंबित है,अधिकारी का कहना है वर्तमान में मनरेगा से भी धनराशि उपलब्ध नहीं है। जैसे ही बजट आवंटित होता है, मरम्मत कार्य को प्राथमिकता दी जाएगी।
किसानों में असमंजस
अमहर-खैरी जलाशय के आसपास के किसानों के सामने अब बड़ा सवाल है “खरीफ फसल बोएं या नहीं? क्योंकि यदि सिंचाई नहरों से पानी नहीं मिला, तो पूरी लागत डूब जाएगी, किसान प्राकृतिक वर्षा पर निर्भर रहने को मजबूर हैं, जबकि उनकी भूमि तकनीकी रूप से सिंचित क्षेत्र में दर्ज है, एक किसान ने कहा हमारे खेतों के पास से नहर गुजरती है, पर उसमें अब सिर्फ घास उगती है, पानी नहीं।


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