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कोरिया/बैकुंठपुर@जिला अस्पताल बैकुंठपुर में प्रसूता महिला घंटों तड़पती रही, डॉक्टर ने कहा – मै अभी नहीं आ पाऊँगी

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परिवार को रात 1 बजे से सुबह तक इंतज़ार,ऑपरेशन न होने पर महिला को ऑटो से प्राइवेट अस्पताल ले जाना पड़ा…

  • कोरिया जिला अस्पताल में अमानवीय लापरवाही,दर्द से तड़पती रही महिला, डॉक्टर नहीं पहुंचे…
  • सरकारी अस्पताल में फिर दिखी बेरुखी,पूरी रात मरीज तड़पता रहा,ड्यूटी डॉक्टर गायब
  • जब मानवता शर्मसार हुई, प्रसूता दर्द से तड़पती रही, डॉक्टर ने नहीं दी तवज्जो
  • डॉक्टर की लापरवाही या सिस्टम की नाकामी?, कोरिया अस्पताल से आई दर्दनाक तस्वीर
  • सरकारी अस्पताल की लापरवाही से मचा हड़कंप,डॉक्टर पर जांच की मांग तेज
  • क्या सरकारी डॉक्टरों में अब मानवता खत्म हो चुकी है?
  • जब डॉक्टरों ने संवेदना खो दी,तब समाज ने विश्वास खो दिया
  • सरकारी अस्पताल: सेवा धर्म भूलते सफेद कोट वाले
  • मानवता बनाम मनमर्जी,सरकारी डॉक्टरों की लापरवाही का काला चेहरा?
  • वेतन पाते हैं सरकार से, पर सेवा करते हैं अपनी सुविधा की?

-रवि सिंह-
कोरिया/बैकुंठपुर सरगुजा12 नवंबर 2025 (घटती-घटना)।
जिला अस्पताल बैकुंठपुर में बीती रात एक प्रसूता महिला को गंभीर प्रसव पीड़ा होने के बावजूद समय पर ऑपरेशन नहीं किया गया, जिसके चलते परिवार को जिंदगी के खतरे के बीच महिला को ऑटो में लिटाकर प्राइवेट अस्पताल ले जाना पड़ा, मामले ने अस्पताल प्रशासन और ड्यूटी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिला अस्पताल कोरिया से एक अमानवीय घटना सामने आई है, जिसने सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की संवेदनशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं,
जानकारी के अनुसार, एक महिला प्रसूता को देर रात तेज प्रसव पीड़ा होने पर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था, परिजनों ने पूरी रात इलाज के लिए डॉक्टरों से गुहार लगाई, लेकिन ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर नहीं पहुंचे, परिजन बताते हैं कि मरीज दर्द से तड़पती रही, कई बार नर्सों ने भी डॉक्टर को फोन किया, लेकिन जवाब मिला मैं अभी नहीं आ पाऊंगी”। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब सरकारी अस्पताल में इस तरह की लापरवाही हुई हो, रात के समय डॉक्टरों का अनुपस्थित रहना अब आम बात हो गई है, सवाल यह है कि जब निजी अस्पतालों में किसी भी समय डॉक्टर उपलब्ध हो जाते हैं, तो सरकारी अस्पतालों में ऐसी अमानवीय देरी क्यों होती है? घटना के बाद क्षेत्र में आक्रोश का माहौल है, लोगों ने जिला प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है। वहीं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने मामले की जांच की बात कही है।
क्या सरकारी डॉक्टरों में अब मानवता नहीं बची?
कोरिया जिले के जिला अस्पताल से एक हृदयविदारक मामला सामने आया है। रात में एक महिला प्रसूता मरीज दर्द से तड़पती रही,परंतु ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर नहीं पहुंचे,परिवारजन पूरी रात गुहार लगाते रहे, लेकिन अस्पताल प्रशासन और डॉक्टरों की लापरवाही ने इस घटना को अमानवी बना दिया,यह पहला मामला नहीं है जब सरकारी अस्पतालों की संवेदनहीनता उजागर हुई हो। सवाल यह है कि जब निजी अस्पतालों में डॉक्टर हर समय उपलब्ध रहते हैं,तो सरकारी अस्पतालों में मरीज की तड़प भी डॉक्टरों को क्यों नहीं जगा पाती?
जिम्मेदारी तय होनी चाहिए…
सरकारी अस्पतालों में नियुक्त डॉक्टरों को यह नहीं भूलना चाहिए कि उनका पहला कर्तव्य मरीज की सेवा है,न कि अपनी सुविधा। इस तरह की घटनाएं जनता के विश्वास को तोड़ती हैं और सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की साख पर प्रश्नचिह्न लगाती हैं। सरकार को चाहिए कि ऐसे मामलों की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए,लापरवाह डॉक्टरों पर कठोर कार्रवाई की जाए,और यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी मरीज की जान लापरवाही से न जाए,यह घटना चेतावनी है कि अगर अब भी सुधार नहीं हुआ, तो सरकारी अस्पतालों पर जनता का भरोसा पूरी तरह से खत्म हो जाएगा।
रात 1:00 बजे भर्ती,लेकिन सुबह तक नहीं हुई डिलीवरी
परिजनों के अनुसार, महिला को रात करीब 1 बजे जिला अस्पताल में भर्ती किया गया, शुरुआती जांच में डॉक्टरों ने स्पष्ट कहा कि नॉर्मल डिलीवरी संभव नहीं है,और सी-सेक्शन ऑपरेशन करना आवश्यक है,इसके बावजूद, सुबह से दोपहर और फिर शाम तक ऑपरेशन नहीं किया गया।
ड्यूटी डॉक्टर ने सीनियर डॉक्टर को फोन किया,मिला जवाब…‘मैं अभी अस्पताल नहीं आ पाऊंगी’
परिवार के अनुसार,जब ड्यूटी डॉक्टर ने सीनियर गॉयनेकोलॉजीस्ट डॉक्टर (बंसारिया मैडम) को महिला की स्थिति बताई,तो उनका जवाब था- ‘मैं अभी अस्पताल नहीं आ पाऊंगी…आज मैं कोई ऑपरेशन नहीं कर पाऊंगी।’यह सुनकर परिवार हैरान और परेशान रह गया,उधर,प्रसूता दर्द से चीखती-चिल्लाती रही,लेकिन ऑपरेशन थिएटर तक ले जाने की प्रक्रिया भी आगे नहीं बढ़ी।
मजबूरी में ऑटो से निजी अस्पताल ले जाना पड़ा
जब दर्द अत्यधिक बढ़ गया और स्थिति गंभीर हो गई,तो परिजनों ने महिला को ऑटो में लिटाकर शर्मा अस्पताल पहुंचाया,रास्ते में महिला की हालत बेहद नाजुक थी,अगर रास्ते में मां या बच्चे को कुछ हो जाता तो उसका जिम्मेदार कौन? परिवार का सवाल यहीं से उठता है।
यह केवल एक मरीज की पीड़ा नहीं, व्यवस्था की विफलता है…
जिला अस्पताल को जिले का सबसे बड़ा सरकारी उपचार केंद्र माना जाता है,यदि यहाँ रात में सर्जन ड्यूटी पर नहीं, आपातकालीन ऑपरेशन नहीं हो पा रहा,प्रसूता को सड़क पर भेजा जा रहा, तो यह स्थिति स्वास्थ्य व्यवस्था के ढांचे पर गंभीर सवाल खड़ा करती है।
परिजनों की मांग…
परिवार ने स्पष्ट कहा है-‘यदि मां या बच्चे की जान को खतरा पहुंचता है,तो इसकी जिम्मेदारी जिला अस्पताल प्रशासन की होता,उन्होंने ड्यूटी सिस्टम और जिम्मेदार डॉक्टरों की जांच की मांग की है।
जिला अस्पताल में महिला मरीज की लापरवाही पर सीएमएचओ ने जांच के दिया आदेश,टीम गठित कर सौंपी जांच जिम्मेदारी
जिला अस्पताल में एक महिला मरीज को दर्द से तड़पने के बाद भी समय पर इलाज न मिलने की खबर पर स्वास्थ्य विभाग ने संज्ञान लिया है,मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने इस मामले की जांच के आदेश जारी कर दिए हैं,जिला अस्पताल में एक महिला प्रसूता को डिलीवरी के लिए भर्ती किया गया था,परंतु डॉक्टरों की अनुपस्थिति के कारण उसे देर तक इलाज नहीं मिल पाया,इस खबर के प्रकाशन के बाद स्वास्थ्य विभाग हरकत में आ गया। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी,बैकुंठपुर द्वारा जारी आदेश क्रमांक 4858/शिकायत/2025 में लिखा गया है कि खबर संबंध में जांच प्रतिवेदन तत्काल प्रस्तुत करें ताकि उच्चाधिकारियों को अवगत कर आवश्यक कार्यवाही की जा सके। इस प्रकरण को प्राथमिकता दी जाए। आदेश में खण्ड चिकित्सा अधिकारी, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पटना,खाद्य एवं औषधि प्रशासन के अधिकारियों, डीपीएम (एनएचएम) तथा सहायक ग्रेड-3 स्थानीय कार्यालय को जांच में शामिल किया गया है।
सीएमएचओ ने मांगी त्वरित रिपोर्ट
पत्र में निर्देश दिया गया है कि जांच प्रतिवेदन शीघ्र प्रस्तुत किया जाए ताकि उच्च अधिकारियों को सूचित कर आगे की कार्रवाई की जा सके,साथ ही यह भी कहा गया है कि जिला अस्पताल के प्रभारी सिविल सर्जन को भी आवश्यक कार्रवाई के लिए सूचित किया गया है।
विभाग की सक्रियता के बाद उम्मीदें बढ़ीं…
इस जांच आदेश के बाद अब उम्मीद की जा रही है कि महिला मरीज के साथ हुई लापरवाही की पूरी सच्चाई सामने आएगी, और दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों व डॉक्टरों पर कार्रवाई होगी।
प्रशासन से बड़े सवाल
आपातकालीन सी-सेक्शन करने के लिए 24&7 सर्जन उपलब्ध क्यों नहीं?
जिला अस्पताल में ‘ड्यूटी डॉक्टर के आने की मनोदशा’ पर व्यवस्था क्यों निर्भर?
क्यों प्रसूता को ऑटो में ले जाने की नौबत आई? एम्बुलेंस कहाँ थी?
क्या यह लापरवाही नहीं,बल्कि गंभीर चिकित्सीय लापरवाही है?
क्या अब सरकारी डॉक्टरों के भीतर से सेवा भाव और संवेदना समाप्त हो गई है?
क्या उन्हें केवल सरकारी वेतन और आरामदायक पोस्टिंग ही नजर आती है?
क्या ‘मानवता’ अब केवल किताबों और शपथ तक सीमित रह गई है?

परिवार का आरोप
जिला अस्पताल में कोई आपातकालीन प्रसूति प्रबंधन सिस्टम एक्टिव नहीं था
किसी ने तत्काल सहायता या निर्णय नहीं लिया
सी-सेक्शन के लिए डॉक्टर की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं थी
मरीज को खुद प्राइवेट अस्पताल ले जाने की मजबूरी खड़ी कर दी गई





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