रायपुर,12 नवम्बर 2025। एशिया का सबसे बड़ा इस्पात संयंत्र और छत्तीसगढ़ का गौरव,बताया जाता है कि आज वह खुद अपनी पहचान खोने की कगार पर खड़ा है। भिलाई स्टील प्लांट जिसने बीते 70 वर्षों से देश की अर्थव्यवस्था, रोजगार, शिक्षा, चिकित्सा और खेल जगत में अनगिनत सितारे पैदा किए, अब उसी शहर का अभिन्न हिस्सा पंडित जवाहरलाल नेहरू हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर (सेक्टर-9 हॉस्पिटल) निजीकरण की डगर पर खड़ा नजर आ रहा है।
गुप्त दौरों और बैठकों से बढ़ता संदेह : सूत्रों के मुताबिक,हाल ही में केंद्रीय मंत्रालय की एक टीम ने सेक्टर-9 हॉस्पिटल का दौरा किया। यह दौरा पूरी तरह ‘गोपनीय’ रखा गया। लेकिन,भिलाई के सेवानिवृत्त कर्मचारियों के संगठनों, श्रमिक यूनियनों और अस्पताल के स्वास्थ्यकर्मियों के विरोध के बाद यह बात सामने आई कि अस्पताल प्रबंधन कुछ तो छुपाने की कोशिश कर रहै है।
क्या होगा अस्पताल का निजीकरण : भिलाई इस्पात संयंत्र के कर्मचारियों और भिलाईवासियों के लिए अब यह बड़ा सवाल है कि, ‘क्या 70 साल तक जनता की सेवा करने वाला यह हॉस्पिटल अब किसी उद्योगपति के हवाले कर दिया जाएगा?’ लोगों में चर्चा है कि स््रढ्ढरु प्रबंधन और केंद्र सरकार के बीच अंदरखाने में समझौते की तैयारियां चल रही हैं। यह वही अस्पताल है जिसने हजारों लोगों को जीवनदान दिया, जहां मुफ्त या सस्ती चिकित्सा सेवाएं पर्दान की जा रही हैं और जो आज ‘बर्न यूनिट’ और ‘विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं’ के लिए पूरे प्रदेश में मशहूर है।
सेवानिवृत्त कर्मचारी भयभीत, भिलाईवासियों में रोष : भिलाई के सेवानिवृत्त कर्मचारी, जिन्होंने अपना पूरा जीवन इस संयंत्र को खड़ा करने में लगा दिया, आज अपनी चिकित्सा सुविधाओं को लेकर असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। सभी सेवानिवृत्त और छोटे कर्मचारियों के दिलों में इस भय ने डेरा जाल लिया है कि यदि अस्पताल निजीकरण हो गया तो इलाज महंगा हो जाएगा और वे चिकित्सा सुविधाओं से वंचित रह जाएंगे। बातचीत में एक सेवानिवृत्त कर्मचारी ने नम आंखें लिए कहा ‘हमने अपना जवानी इस प्लांट के लिए समर्पित कर दिया, अब बुढ़ापे में हमसे इलाज भी छीन लिया जाएगा क्या? ‘
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