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कोरिया@खनिज संपदा,दुर्लभ जड़ी-बूटी और पर्यटन के अवसरों से समृद्ध

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  • खनिज संपदा,दुर्लभ जड़ी-बूटी और पर्यटन के अवसरों से समृद्ध कोरिया जिला उद्योग, स्वास्थ्य व शिक्षा सुविधाओं की राह देखता हुआ…
  • उपलब्ध रोजगार शिक्षा पानी स्वास्थ्य सुविधाएं आवासीय भवनों की हुई बढ़ोत्तरी, वनांचलों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव
  • अविभाजित मध्यप्रदेश से छत्तीसगढ़ राज्य बने हो गए 25 साल आज भी सम्भावनाओ के बीच सुविधाओ की तलाश
  • राज्य बनने के बाद से बदली पांच सरकारें,सबने अपने स्तर से किया प्रयास पर अभी बहुत से क्षेत्रों को है बुनियादी विकास की जरूरत
  • स्कूलों की संख्या,सिंचाई रकबा कृषि सुविधाओं, पंचायतों की संख्या में हुई बढ़ोत्तरी
  • 25 सालों में बनी सैकड़ो नई सड़के पर अभी भी सड़को की काफी जरूरत
  • उद्योग विस्तार की राह थमी, औद्योगिक क्षेत्र में नहीं हुए सकारात्मक प्रयास

-राजन पाण्डेय-
कोरिया,31 अक्टूबर 2025 (घटती-घटना)।
छत्तीसगढ़ राज्य के गठन को 25 वर्ष बीत चुके हैं। इन वर्षों में कोरिया जिला कई मायनों में बदला है शिक्षा,सड़क और सिंचाई सुविधाओं में वृद्धि हुई है,परंतु बुनियादी विकास की दौड़ में अब भी कई वनांचल और ग्रामीण क्षेत्र पीछे हैं, कभी रियासतकालीन वैभव और प्राकृतिक संपदा से सम्पन्न कोरिया आज भी उद्योग, स्वास्थ्य और रोजगार के स्थायी अवसरों की प्रतीक्षा में है।
आपको बता दे की कोरिया जिला ऐतिहासिक और पौराणिक रूप से हमेशा समृद्ध रहा है कोरिया की धरती प्राकृतिक संसाधनो से भरपूर है कोरिया रियासत के राजा रामानुज प्रताप सिह देव ने 1941 में यहां शिक्षा की अलख जगाई थी परन्तु आज भी उद्योग एवं मानक स्तर के संस्थान नही खोले जा सके है। कोल खनन कार्य में बड़े अधिकारीयों से लेकर कर्मचारीयों तक अधिकांश बाहरी लोग आसीन है । राज्य गठन के बाद लोगों को एक उम्मीद जगी थी की विकास के मार्ग खुलेंगे लेकिन,लेकिन उम्मीद के मुताबिक काम नही हो सका राज्य बने 25 साल हो गए पांच सरकारें बदली 25 साल की सरकार में लगभग 17 साल भाजपा और 8 साल कांग्रेस ने को मौका मिला सभी ने लोगो के लिए योजनाएं लाई, राज्य को विकास के पथ पर आगे बढ़ाने का प्रयास किया बहुत से कार्य हुए भी लेकिन आज भी कई गांवों की स्थिति दयनीय है जिन्हें विकास से जोड़ने की सतत जरूरत है। कोरिया को जिले का दर्जा मिले हुए करीब 27 वर्ष पूर्ण होने को हैं,लेकिन शासन प्रशासन द्वारा कई ग्रामो में जिलावासीयों को मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं कराई जा सकी हैं। कर्मचारियों के निवास करने के लिए पूर्ण रूप से अच्छे शासकीय आवास तक नहीं हैं। कई सड़के बनी लेकिन कई ग्रामीण सड़कें जर्जर हालत में हैं,प्रमुख नदियों पर सियासत काल में बनाए गए कालातीत हो चुके पुलों पर नया निर्माण हुआ,ग्रामीण इलाकों के स्वास्थ्य केन्द्रों में चिकित्सक नहीं रहना चाहते थे बावजूद इसके स्वस्थ्य सुविधांए काफी कुछ बढोत्तरी हुई है, वहीं खनिज संसाधनों की प्रचुरता के बावजूद जिले में उद्योगों की स्थापना नहीं होने के कारण यहां का खनिज अन्य राज्यों को बेचा जा रहा है,जिले में शिक्षा के स्तर की हालत पहले से कुछ बेहतर हुई है लेकिन विद्यालयों में शिक्षक व भवन की कमी सर्वविदित है,रोजगार के संसाधन उपलब्ध नहीं होने से यहां के शिक्षित बेरोजगारों को रोजी रोटी की समस्या सता रही है। पर्यटन के क्षेत्र में असीम संभावनाएं होने के बावजूद सरकार की उदासीनता से पर्यटन को बढ़ावा नहीं मिल पा रहा है। यहां के वनों में प्राप्त दुर्लभ वनौषधियों वनों तक ही सीमित हैं, शासन प्रशासन की सार्थक पहल से जिले का विकास तीव्र गति से हो सकते हैं, कोरिया जिलें में बेशकीमती खनिजों का खजाना है, वही उद्योगों को शासन प्रशासन द्वारा बढ़ावा न दिये जाने से जिले की खनिजों को अन्य राज्यों में बेचा जा रहा है,एसईसीएल द्वारा जिले के चरचा चिरमिरी पाण्डव पारा व अन्य क्षेत्र में कोयला की अनेक खदानें हैं, कोयले की गुणवत्ता भी उच्च है। इसके बावजूद जिले में उद्योगों की स्थापना न होने से अन्य राज्यों में स्थापित कोयले पर आधारित उद्योगों द्वारा कोयले को बड़ी कंपनियों द्वारा खरीदा जा रहा हैं, जिले के कई क्षेत्रों में पत्थर व रेत भी प्रचुर मात्र में है। इनके अवैध उत्खनन से राजस्व समेत पर्यावरण को भी क्षति पहुच रही है।

जिले के इतिहास की जानकारी
छत्तीसगढ़ राज्य के उत्तर-पश्चिमी भाग में स्थित कोरिया जिला प्राकृतिक संपदा और ऐतिहासिक महत्व से परिपूर्ण क्षेत्र है। यह जिला पूर्व में मध्यप्रदेश राज्य के अंतर्गत था और 25 मई 1998 को सरगुजा जिले से पृथक होकर अस्तित्व में आया,राज्य पुनर्गठन के पश्चात 1 नवम्बर 2000 को छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के साथ ही कोरिया इस नए राज्य का अभिन्न हिस्सा बन गया। जिले का नाम इसकी प्राचीन रियासत कोरिया से लिया गया है,जिसकी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत आज भी जिले की पहचान बनी हुई है।
उद्योग और संसाधन: खनिज संपदा पर दूसरे का कब्जा
कोरिया की धरती कोयला,पत्थर और रेत जैसे खनिजों से भरपूर है। चरचा,पाण्डवपारा,चिरमिरी जैसे क्षेत्रों में उच्च गुणवत्ता का कोयला निकलता है, परंतु जिले में कोई बड़ा उद्योग स्थापित नहीं हो सका। बाहरी कंपनियां खनिज निकालकर ले जाती हैं जबकि जिले के युवा रोजगार के लिए बाहर जाने को मजबूर हैं। स्थानीय स्तर पर उद्योग न होने के कारण खनिजों का मूल्यवर्धन बाहर हो रहा है और जिले का राजस्व भी सीमित रह गया है।
उद्योग विकास की राह थमी
1929 में बिजुरी से चिरमिरी तक रेलखंड की नींव रखी गई, 1931 में कोल उत्पादन शुरू हुआ,चिरमिरी,खुरासिया,चरचा और पाण्डवपारा क्षेत्र कोल उत्पादन के प्रमुख केंद्र बने,परंतु जिले को उसका लाभ नहीं मिल सका, राज्य गठन के बाद भी कोई बड़ा उद्योग नहीं खुला,जिससे रोजगार के अवसर सीमित हैं और युवा पलायन को मजबूर हैं।

जल संकट और सिंचाई: राजाओं के तालाबों से लेकर अधूरे डेम तक
राजा बालेन्द्र और राजा रामानुज प्रताप सिंह देव ने कोरिया की जल जरूरतों को समझकर सैकड़ों तालाब खुदवाए थे। डॉ. रामचंद्र सिंहदेव के कार्यकाल में गेज, झुमका, घुनघुटा और टेडिया बांध बने, परंतु बाद के वर्षों में जल प्रबंधन ठहर गया,कई नहरें और एनीकट भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गए,आज भी किसान मानसून पर निर्भर हैं और ग्रामीणों को पेयजल के लिए कई किलोमीटर चलना पड़ता है।
सड़कें और संचार: “पगडंडियों पर चलता विकास”
प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के बावजूद कई वनांचल सड़कों का हाल बेहाल है, सोनहत,आनंदपुर,गिधेर,पलारीडांड़, रेवला जैसे गांव आज भी पक्की सड़क से वंचित हैं,कई अधूरे निर्माण वर्षों से फाइलों में अटके हैं। प्रशासनिक सख्ती और जवाबदेही से ही यह काम तेज़ हो सकते हैं।

ग्रामीण सड़कें खस्ताहाल
सड़कें विकास की रीढ़ होती हैं,परंतु कोरिया जिले की सड़कों की स्थिति बदहाल है,प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के अंतर्गत कई मार्ग अधूरे पड़े हैं। सोनहत विकासखंड के आनंदपुर,गोयनी,धनपुर,गिधेर,पलारीडांड़, रेवला,सेमरिया और सुक्तरा जैसी सड़कों पर सफर जान जोखिम में डालने जैसा है। प्रशासनिक लापरवाही के कारण निर्माण कार्य वर्षों से ठप पड़े हैं। आवश्यक है कि प्रशासन निर्माण एजेंसियों पर सख्त कार्रवाई करे।
अब भी सड़कों की दरकार
राज्य गठन के बाद सैकड़ों सड़कों का निर्माण हुआ,लेकिन हर्रा डीह, देवतीडांड़, कुर्थी, बघवार, सेमरिया, पलारी, ठाकुरहाठी, मझगवां, निग्नोहार जैसे कई गाँव आज भी सड़कों से वंचित हैं। इन क्षेत्रों में सड़क पहुँच जाने से शिक्षा,स्वास्थ्य और रोजगार जैसी योजनाएँ प्रभावी ढंग से लागू हो सकेंगी।
शिक्षा: रियासत की परंपरा,आज की चुनौतियाँ
राजा रामानुज प्रताप सिंहदेव ने 1941 में शिक्षा को अनिवार्य किया था और मध्यान भोजन की शुरुआत भी उन्हीं के काल में हुई, आज जिले में प्राथमिक विद्यालयों की संख्या 281 से बढ़कर 387, और उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों की संख्या 22 से बढ़कर 37 हो चुकी है, आत्मानंद स्कूलों की शुरुआत से गुणवत्ता में सुधार हुआ है, पर सीमित सीटों के कारण सबको लाभ नहीं मिल पा रहा, उच्च शिक्षा में मेडिकल कॉलेज का न होना अब भी जिले की बड़ी कमी है।
कोरिया की भौगोलिक पहचान,प्राकृतिक संपदा और ऐतिहासिक संदर्भ
कोरिया छत्तीसगढ़ के उत्तर-पश्चिमी अंचल में स्थित है। यह उत्तर में मध्यप्रदेश,दक्षिण में सरगुजा और सूरजपुर जिलों से घिरा हुआ है, कोयला,पत्थर, रेत,दुर्लभ जड़ी-बूटियाँ और घने वन जिले की पहचान का प्रमुख आधार हैं, पूर्व में कोरिया रियासत का मुख्यालय बैकुंठपुर रहा, रियासत कालीन कोरिया पैलेस, राजा रामानुज प्रताप सिंह देव और उनके द्वारा निर्मित तालाब व शिक्षण संस्थान आज भी गौरव गाथा बयां करते हैं।
जरूरत है तो ठोस नीति,सतत निगरानी और ईमानदार प्रशासनिक पहल की:रवि सिंह
दैनिक घटती-घटना के विशेष संवाददाता रवि सिंह ने कहा कि कोरिया जिला इतिहास,प्राकृतिक संपदा और मानवीय संस्कृति का संगम है, यहाँ संभावनाएं अपार हैं बस आवश्यकता है ठोस नीति,सतत निगरानी और ईमानदार प्रशासनिक पहल की,ताकि विकास की रफ्तार जिले के हर कोने तक पहुँचे।

पर्यटन: प्राकृतिक सौंदर्य पर सरकारी बेरुखी भारीकोरिया के पास पर्यटन के असीम अवसर हैं:-

  • गौरघाट जलप्रपात: छत्तीसगढ़ के अद्भुत जलप्रपातों में एक।
  • कोरिया पैलेस: 1946 में बना, पूरी तरह चूना-बेल से निर्मित अनोखा महल।
  • हरचैका गुफा (पांडव स्थल): ऐतिहासिक मूर्तियों और शिल्पकला का केंद्र।
  • गुरुघासीदास राष्ट्रीय उद्यान: टाइगर रिज़र्व घोषित, 15 ऐतिहासिक स्थलों सहित।
  • बलमगढ़ी और झुमका वोट क्लब: तेजी से उभरते स्थानीय पर्यटन केंद्र।

पर्यटन ढांचे के विकास और प्रचार की कमी से यह क्षेत्र अपने पूर्ण सामर्थ्य तक नहीं पहुँच पाया है।

कृषि सिंचाई और शिक्षा के आँकड़े (2000–2025):

मापदंडवर्ष 2000वर्ष 2025वृद्धि
सिंचित रकबा18,013 हे॰21,102 हे॰+3,089 हे॰
सिंचाई प्रतिशत13.72%34.55%+20.83%
प्राथमिक विद्यालय281387+106
उच्च माध्यमिक विद्यालय2237+15
छात्र संख्या21,05137,172+16,121

जिले के बारे में संक्षिप्त जानकारी:-
जिला: कोरिया (छत्तीसगढ़)
स्थापना: 25 मई 1998 (मध्यप्रदेश से अलग होकर)
छत्तीसगढ़ राज्य में सम्मिलन: 1 नवम्बर 2000
नामकरण: पूर्व रियासत कोरिया के नाम पर

जिले की स्थिति एक नजर में:-

विवरणआँकड़े
जिला स्थापना वर्ष1998
नगर निगम0
नगर पालिका1
नगर पंचायतें2
विकासखंड2
कुल ग्राम286
कुल जनसंख्या2,77,000
साक्षरता दर70.06%
मुख्य रेलवे स्टेशन3
मुख्य खनन क्षेत्रचरचा, पाण्डवपारा, झिलमिली
कोल खनन मुख्यालयबैकुन्ठपुर
वन क्षेत्रकुल क्षेत्रफल का लगभग 59%

ये हैं जिले के गौरव:-

  • गौरघाट जलप्रपात: ग्राम बसेर के पास स्थित यह जलप्रपात अपने अनोखे प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध है।
  • कोरिया पैलेस: 1946 में बना यह महल नागपुर के इंजीनियर द्वारा डिजाइन किया गया था। इसकी विशेषता यह है कि इसमें सीमेंट की जगह चूना और बेल का उपयोग किया गया है।
  • पांडव स्थल: भरतपुर ब्लॉक के हरचैका गुफा में प्राचीन मूर्तियाँ व 12 शिवलिंग हैं। माना जाता है कि पांडव अज्ञातवास के दौरान यहां ठहरे थे।
  • गुरुघासीदास राष्ट्रीय उद्यान: बैकुंठपुर से 35 किमी दूर स्थित यह वन क्षेत्र अब टाइगर रिज़र्व घोषित है, जहाँ 15 से अधिक ऐतिहासिक स्थल हैं।
  • बलमगढ़ी: सोनहत क्षेत्र की ऊँची पहाड़ी पर स्थित यह स्थान पर्यटन के लिए आकर्षण का केंद्र बन चुका है।
  • झुमका वॉटर क्लब: बैकुंठपुर स्थित झुमका जलाशय में बना यह क्लब स्थानीय पर्यटन का नया केंद्र बन रहा है।

शिक्षा अधोसंरचना में प्रगति 2000 से अब तक

  • प्राथमिक विद्यालय 281 से बढ़कर 387
  • माध्यमिक विद्यालय 76 से 167
  • हायर सेकेंडरी विद्यालय 22 से 37
  • छात्र संख्या 21,051 से बढ़कर 37,172

यह बताता है कि जिले में शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ी है।


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