Breaking News

कोरिया@आत्मानंद विद्यालयों में इन दिनों अनुशासन औरभ्रष्टाचार जारी है

Share

प्राचार्य–लिपिक गठजोड़ से विद्यालयों की साख पर दाग

-संवाददाता-
कोरिया,29 अक्टूबर 2025 (घटती-घटना)।
कोरिया जिले के आत्मानंद विद्यालयों में इन दिनों अनुशासन और शैक्षणिक गुणवत्ता की जगह मनमानी और भ्रष्टाचार ने जड़ें जमा ली हैं। विद्यालयों में पदस्थ गैर-नियमित और गैर-संविदा लिपिकों के साथ कुछ प्राचार्यों की मिलीभगत ने आत्मानंद विद्यालयों की साख को गहरा नुकसान पहुंचाया है।
बता दे की कोरिया जिले के आत्मानंद विद्यालयों में पदस्थ प्राचार्यों सहित गैर नियमित गैर संविदा लिपिकों की मनमानी से इन विद्यालयों की साख प्रभावित हो रही है जिस ओर इन विद्यालयों के संचालनकर्ताओं का ध्यान नहीं जा रहा है,कोरिया जिले के आत्मानंद विद्यालयों में मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम में जमकर भ्रष्टाचार जारी है और इस भ्रष्टाचार से जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के भी तार जुड़े हुए हैं और बताया जाता है कि कार्यालय के एक लिपिक से संबंधित एक समूह को कई विद्यालयों का मध्याह्न भोजन कार्यक्रम संचालित करने का जिम्मा प्रदान किया गया है,वहीं आत्मानंद विद्यालय बैकुंठपुर एवं सोनहत में पदस्थ दो गैर नियमित,गैर संविदा लिपिक मनचाहा काम कर रहे हैं और वह विद्यालय जाने की जगह घूम फिर कर वेतन प्राप्त कर रहे हैं,इन दोनों लिपिकों को कार्यालय से सह प्राप्त है और यह विद्यालय जाने की बजाए घूम फिर कर वेतन उठा रहे हैं। मध्याह्न भोजन संचालन में भ्रष्टाचार किया जा रहा है और हाजिरी पूरे छात्रों की दर्ज हो रही है जबकि भोजन करने वाले छात्रों की संख्या आधी भी नहीं होती,बताया या भी जा रहा है कि हाल ही में प्राचार्य पदोन्नति के दौरान मध्याह्न भोजन में बचत के लालच के कारण इस विद्यालय में पदस्थापना प्राप्त करने के लिए होड़ लगी हुई थी और कईयों ने इसे अपने लिए पहली पसंद माना था क्योंकि मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम में इन विद्यालयों में हाजिरी ज्यादा की लगाई जाती है जबकि भोजन करने वाले छात्रों की संख्या बिल्कुल कम होती है,अधिकांश छात्र अपने साथ टिफिन लेकर आते हैं और वह स्कूल का खाना खाने की बजाए घर का खाना खाते हैं और बस इसका लाभ उठाने हाजिरी पूरी लगाई जाती है जिसमें हिस्सा बाद में होता है,और यह आपस में बांटा जाता है जैसा बताया जा रहा है,मध्याह्न भोजन व्यवस्था संचालन में गुणवत्ता का भी आभाव बताया जा रहा है वहीं ईंधन भी कोयला या लकड़ी उपयोग किया जा रहा है जबकि शासन से एलपीजी गैस के लिए राशि प्रदान की जाती है,कोरिया जिले में आत्मानंद के दो लिपिक जो गैर नियमित गैर संविदा हैं वह केवल आत्मानंद के नाम पर नौकरी कर रहे हैं वह विद्यालय की बजाए इधर उधर काम करना पसंद करते हैं।बताया जा रहा है कि प्राचार्यों से मिलीभगत कर यह दोनों लिपिक जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में काम करने के नाम पर मौज कर रहे हैं और सबसे बड़ी बात यह कि यह दोनों आपस में भाई हैं।
प्राचार्य पदोन्नति में भी हुआ खेल
हाल ही में हुई प्राचार्य पदोन्नति प्रक्रिया में भी अनियमितताएं सामने आई हैं,कई शिक्षकों ने आत्मानंद विद्यालयों में पदस्थापना पाने के लिए इस विद्यालय को पहली पसंद बताया,क्योंकि यहां मध्याह्न भोजन में बचत दिखाकर अतिरिक्त लाभ अर्जित करने का अवसर मिलता है। कोरिया जिले में भी बताया जाता है कि पदोन्नति के लिए आत्मानंद पहली पसंद थी कुछ लोगों के लिए जिससे वेतन से अतिरिक्त लाभ मध्याह्न भोजन व्यवस्था में हेरफेर करके प्राप्त किया जा सके।
जवाबदेही से बचता प्रशासन
जिले के शिक्षा विभाग के अधिकारी इस पूरे मामले में चुप्पी साधे हुए हैं,स्थानीय सूत्रों का कहना है कि शिकायतें होने के बावजूद न तो निरीक्षण टीम भेजी जाती है,न ही किसी जिम्मेदार के खिलाफ कार्रवाई होती है।
एलपीजी गैस की जगह कोयला और लकड़ी से बनाया जा रहा मध्यान्ह भोजन
मध्याह्न भोजन संचालनकर्ता मध्याह्न भोजन कार्यक्रम संचालन के दौरान एलपीजी गैस की जगह लकड़ी और कोयले का उपयोग ईंधन के रूप में कर रहे हैं,शासन जबकि गैस के लिए पैसे का भुगतान करती है और हर विद्यालय में गैस कनेक्शन भी उपलब्ध कराया गया है,ऐसा करके भी भ्रष्टाचार किया जा रहा है।
मध्यान्ह भोजन में भ्रष्टाचार का खेल
जिले के कई आत्मानंद विद्यालयों में मध्याह्न भोजन कार्यक्रम में जमकर भ्रष्टाचार किया जा रहा है, बताया जाता है कि जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के एक लिपिक से जुड़े एक विशेष समूह को कई विद्यालयों का मध्याह्न भोजन कार्यक्रम संचालित करने का जिम्मा सौंपा गया है, इस व्यवस्था से प्रतिदिन हजारों रुपये का हेरफेर किया जा रहा है, सूत्रों के अनुसार विद्यालयों में छात्रों की हाजिरी पूर्ण दर्ज की जाती है, जबकि वास्तव में भोजन करने वाले छात्रों की संख्या आधी से भी कम होती है, अधिकांश छात्र घर से टिफिन लाते हैं, लेकिन रसोई का बिल पूरे बच्चों के नाम पर बनता है।
प्राचार्यों और लिपिक की मिलीभगत
जानकारी के अनुसार आत्मानंद विद्यालय बैकुंठपुर एवं सोनहत में पदस्थ दो गैर-नियमित, गैर-संविदा लिपिक मनमानी कर रहे हैं, वे विद्यालय जाने की बजाय दिनभर बाहरी कार्यों में घूमते रहते हैं, फिर भी पूरे वेतन का भुगतान नियमित रूप से प्राप्त करते हैं, बताया जा रहा है कि इन दोनों को कार्यालय स्तर से संरक्षण प्राप्त है, और शिकायतों के बावजूद किसी भी प्रकार की कार्रवाई नहीं की जा रही है, यह दोनों आपस में भाई हैं और यह अलग अलग विद्यालय में पदस्थ हैं और यह केवल आत्मानंद के लिपिक हैं वहीं यह विद्यालय से कार्यालय में काम के नाम पर गायब रहते हैं,वैसे कार्यालयों में या शिक्षा विभाग में लिपिकों की संख्या जरूरत से ज्यादा है और एक एक विद्यालय में तीन तीन लिपिक पदस्थ हैं ऐसे में आत्मानंद के लिपिक क्यों कार्यालय बुलाए जा रहे हैं यह समझ से परे है।

जनता पूछ रही है आत्मानंद या आत्मलाभ विद्यालय?- जिन विद्यालयों का उद्देश्य बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर वातावरण देना था, वहीं अब भ्रष्टाचार, मनमानी और शैक्षणिक लापरवाही का केंद्र बनते जा रहे हैं, स्थानीय अभिभावक मांग कर रहे हैं कि जांच समिति गठित कर पूरा मामला उजागर किया जाए, ताकि आत्मानंद विद्यालयों की खोई हुई साख वापस लाई जा सके।


Share

Check Also

अम्बिकापुर@यूजीसी नियमों के खिलाफ स्वर्ण समाज का ऐलान,1 फरवरी को अंबिकापुर बंद

Share अम्बिकापुर,29 जनवरी 2026 (घटती-घटना)। यूजीसी के नए नियमों के विरोध में प्रस्तावित 1 फरवरी …

Leave a Reply