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अम्बिकापुर@सरगुजा में जापानी इंसेफेलाइटिस का खतरा बढ़ा,23 लोगों के सैंपल जांच के लिए भेजे गए

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अम्बिकापुर,16 अक्टूबर 2025 (घटती-घटना)। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में जापानी इंसेफेलाइटिस (जापानी बुखार) का खतरा बढ़ गया है। जिले में सुअरों में इस वायरस की पुष्टि के बाद अब स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह अलर्ट पर है। विभाग ने सकालो फार्म और आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले 23 लोगों के ब्लड सैंपल लेकर जांच के लिए रायपुर भेजे हैं। माना जा रहा है कि इंसानों में संक्रमण की संभावना बनी हुई है। जानकारी के अनुसार, अंबिकापुर, लुंड्रा, बतौली, सीतापुर और मैनपाट क्षेत्रों में जापानी इंसेफेलाइटिस फैलने की आशंका के चलते पशु चिकित्सा विभाग ने 120 सुअरों के सैंपल जांच के लिए भेजे थे। बेंगलुरु स्थित आईसीएआर लैब से आई रिपोर्ट में 61 सुअरों में वायरस की पुष्टि हुई। यानी आधे से अधिक सैंपल पॉजिटिव पाए गए। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने तत्काल लोगों की जांच शुरू की और आसपास के इलाकों में मच्छर नियंत्रण के उपाय तेज किए। विशेषज्ञों के अनुसार, यह वायरस मच्छरों के काटने से फैलता है। सुअरों पर इसका ज्यादा असर नहीं होता, लेकिन जब संक्रमित मच्छर इंसान को काटता है तो वायरस मानव शरीर में प्रवेश कर जाता है। यह रोग इंसान से इंसान में नहीं फैलता, लेकिन मस्तिष्क को प्रभावित कर घातक साबित हो सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि जापानी इंसेफेलाइटिस का कोई निश्चित इलाज नहीं है, केवल लक्षणों के आधार पर उपचार किया जाता है। टीकाकरण और मच्छर नियंत्रण ही इस बीमारी से बचाव के मुख्य उपाय हैं। शुरुआती लक्षणों में तेज बुखार, सिर दर्द, उल्टी, थकान और मानसिक भ्रम शामिल हैं।


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