- खुलेआम भ्रष्टाचार मचाने के बाद भी सीएमओ दिखा रहा दंभ,नगर से नहीं हटाए जाने वह है आश्वस्त
- क्या सत्ता संगठन को मात देने भ्रष्टाचारी सीएमओ को दे रहा है संरक्षण
- नगर पटना के आर्थिक खजाने को लगातार लूट रहा है सीएमओ,सब कुछ जानते हुए भी जिम्मेदार हैं मौन

-संवाददाता-
कोरिया/पटना,11 अक्टूबर 2025 (घटती-घटना)। नवगठित नगर पंचायत पटना के सीएमओ भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे हुए हैं स्पष्ट भ्रष्ट्राचार सीएमओ का नजर भी आ रहा है बावजूद इसके सीएमओ को न तो हटाया जा रहा है और न ही सीएमओ के ऊपर कार्यवाही की जा रही है क्या इसके पीछे की वजह सत्ता और संगठन की आपसी लड़ाई है,पटना नगर में पहली बार नगरीय निकाय चुनाव सम्पन्न हुए नगर की जनता को लगा कि वह अपने मन का अध्यक्ष चुनकर विकास के पथ पर आगे बढ़ेंगे लेकिन नगर को जो सीएमओ मिला हुआ है वह ऐसा होने नहीं देगा यह नगर की जनता नहीं जानती थी,हुआ भी ऐसा ही कुछ नगर के सीएमओ ने अपने नगर आगमन से लेकर अब तक केवल भ्रष्टाचार को ही अंजाम दिया है और जो छिपा हुआ भ्रष्टाचार नहीं है बल्कि वह सामने उजागर है जिसे कोई भी देख समझ सकता है लेकिन इसके बावजूद भी सीएमओ पर मेहरबानी बनी हुई है और वह आगे भी अपने भ्रष्टाचार को गति दे रहा है।
कोरिया जिले में सत्ता और संगठन की लड़ाई छिपी हुई नहीं है,वर्तमान विधायक की बात करें तो वह कभी संगठन के साथ चलते नजर नहीं आए बात आज की हो या पहले की,विधायक जब जब निर्वाचित हुए उन्होंने संगठन को हमेशा अपने से बाद में प्राथमिकता दी और संगठन से जुड़े लोगों को उन्होंने किनारे ही लगाने का काम किया भले इसके लिए पार्टी को ही क्यों नहीं नुकसान पहुंचा हो,नगर पटना के मामले में भी सत्ता और संगठन की ही लड़ाई साफ समझ में आती है,संगठन ने अपनी पसंद और जिताऊ दावेदार को प्रथम अवसर पर टिकट प्रदान किया और सत्ता को यह नागवार गुजरा,सत्ता ने वैसे भरसक प्रयास किया कि वह अपने अधिक पार्षद नगर में चुनाव के दौरान जीत दिलाकर ला सके लेकिन ऐसा संभव नहीं हुआ और सत्ता के चहेते अधिकांश बुरी तरह चुनाव हार गए,सत्ता ने पुनः प्रयास किया जैसा बताया जाता है कि कम बहुमत के बावजूद उपाध्यक्ष सत्तापक्ष का न बन पाए लेकिन संगठन ने फिर बाजी मार ली और उपाध्यक्ष पद भी संगठन के प्रयासों से मिल गया,जब हर प्रयास के के बावजूद सत्ता संगठन को पटना के मामले में मात नहीं दे सका तब सीएमओ ही अब सत्ता के पास आखिरी उपाय बचा जिससे वह नगर पंचायत पटना को अपने अनुसार संचालित कर सके और इसीलिए पटना में जो कुछ नजर आ रहा है वह संभव हो पा रहा है जो रुक नहीं रहा है,सीएमओ को सत्ता का संरक्षण प्राप्त है इसका प्रमाण यह भी है कि सीएमओ को जब दोषी मानकर कलेक्टर ने जांच के लिए उसे हटाने का प्रयास किया कलेक्टर का वह आदेश ही अप्रभावी हो गया जो सीएमओ द्वारा कलेक्टर को पराजित करने के हिसाब से खुद सीएमओ बताते सुने जाते हैं जैसा सूत्र बताते हैं। संगठन भले पटना का पहला चुनाव जीत गया लेकिन वह जीतकर भी हारा हुआ है क्योंकि अध्यक्ष उपाध्यक्ष नगर के संगठन से जुड़े होने के कारण सीएमओ तक द्वारा उपेक्षित हैं। वैसे भाजपा का संगठन मजबूत माना जाता है वहीं यह बैकुंठपुर के मामले में सत्ता से हमेशा कमजोर क्यों हो जाता है यह एक बड़ा प्रश्न है,वैसे क्या जिस तरह बैकुंठपुर में सत्ता हमेशा संगठन पर हावी रहा है उसी तरह अन्य जगह का भी हाल है या केवल यह अपवाद है जो बैकुंठपुर में है।
बिना संरक्षण सीएमओ का खुलेआम भ्रष्टाचार जारी रह पाना असंभव,कहते हैं लोग
लोगों का मानना है कि सत्ता और संगठन की एक पार्टी की लड़ाई में नवगठित नगर पंचायत पटना का नुकसान हो रहा है,नगर की विकास निधियां बंदरबांट कर ली जा रही हैं सीएमओ द्वारा,जहां जब जैसा मौका मिलता है सीएमओ का चेक बुक तैयार रहता है और वह पैसा निकाल लेता है,उसे डर भय बिल्कुल नहीं है ऐसा लगता है कि वह कभी जांच के दायरे में आएगा और मुश्किल में पड़ जाएगा,कुल मिलाकर लोगों का मानना है कि सीएमओ की कार्यप्रणाली और उसकी हिम्मत उसके बस वाली बात नहीं है,सीएमओ को संरक्षण प्राप्त है इसलिए वह भ्रष्टाचार के साथ नगर में बना हुआ है और यह संरक्षण उसे कौन प्रदान कर रहा है समझा जा सकता है यह लोगों का मत है।
आदिवासी समुदाय से अध्यक्ष प्रत्याशी घोषित करना ही सत्ता और संगठन के बीच की है नाराजगी
माना जाता है कि भाजपा संगठन ने नगर पटना के प्रथम चुनाव में जीत मात्र को लक्ष्य रखा वहीं सत्ता की मंशा अपने चहेतों को अध्यक्ष प्रत्याशी बनाना था जिसे संगठन ने नकार दिया,संगठन अपने मंसूबे में तो कामयाब हो गया अध्यक्ष उपाध्यक्ष पद पर संगठन ने कब्जा जमाते हुए पार्षदों की संख्या भी बहुमत तक पहुंचा दी लेकिन इस बीच सत्ता नाराज हो गया जिसका दंश अब नगर की जनता भोग रही है,सत्ता सीएमओ को लेकर उसके भ्रष्टाचार को लेकर मौन है मजे ले रहा है यह साफ नजर आ रहा है,सत्ता जीत से प्रसन्न कम नगर में अध्यक्ष उपाध्यक्ष के अप्रभावी होने से प्रसन्न है यह माना जा रहा है। आदिवासी समुदाय से अध्यक्ष प्रत्याशी का सत्ता द्वारा विरोध ही सत्ता की अब जारी नाराजगी की वजह बताई जाती है।
पटना नगर की जनता ने संगठन की पसंद अध्यक्ष पद प्रत्याशी को तो चुना लेकिन कई सत्ता पसंद पार्षद प्रत्याशियों को नकारा भी,करारी हार नजर आई
नगर पटना की जनता ने ग्राम से नगर बनने के बाद हुए पहले चुनाव में संगठन की पसंद अध्यक्ष पद की प्रत्याशी को तो चुना लेकिन सत्ता की पसंद रहे कई पार्षद पद के प्रत्याशियों को नकार दिया जिन्हें करारी हार मिली, अध्यक्ष पद का ख्वाब सजाए ऐसे सत्ता की पसंद लोग जो बाद में पार्षद पद पर लड़ने तैयार हुए उन्हें उपाध्यक्ष पद की लालसा थी लेकिन जनता ने नगर की उन्हें नगर पंचायत की दहलीज तक पहुंचने लायक नहीं समझा और उन्हें चुनाव में हराकर घर बैठा दिया। पटना नगर में सत्ता के कुछ ऐसे मठाधीश हैं जिन्हें नगर की जनता बिल्कुल नहीं पसंद करती वहीं सत्ता ने उन्हें ही भरोसेमंद माना और दाव उन पर खेला लेकिन जनता ने समझदारी दिखाते हुए यह दाँव पलट दिया। जब मठाधीश चुनाव हार गए वह सत्ता के साथ संगठन के खिलाफ शामिल हो गए और अब वह नगर पंचायत में पीछे से लगे हुए हैं जिससे नगर की सरकार का संचालन सही ढंग से न हो सके और आरोप अध्यक्ष पर लगता रहे।
पंचायत चुनाव में विधायक के कहने पर सीएमओ ने किया था सहयोग इसलिए है भ्रष्टाचार की छूट?
सूत्रों की माने तो सीएमओ यह भी कहते सुने जाते हैं कि पंचायत चुनाव में विधायक को किया गया सहयोग उनके लिए एक रक्षा कवच बना हुआ है, ऐसा सहयोग किया गया है कि विधायक कभी सीएमओ के खिलाफ नहीं जायेंगे,अब सीएमओ की यह बातें कितनी सही हैं जो सुनाई दे रही हैं इसकी पुष्टि तो नहीं हो सकती लेकिन सीएमओ के खुलेआम भ्रष्टाचार पर विधायक का साफ मौन समझ में जरूर आता है,अपनी ही पार्टी की अध्यक्ष उपाध्यक्ष के प्रति कोई लगाव नजर नहीं आता विधायक खेमे में,हां सीएमओ के लिए पैरवी की बातें सामने आती हैं जरूर।क्या सीएमओ को सहयोग का इनाम मिल रहा है।
विपक्ष भी सीएमओ के पक्ष में,चुनाव में मिली हार का बदला लेने विपक्ष को सीएमओ का नगर में फैलाया गया भ्रष्टाचार भी स्वीकार
नगर पंचायत पटना के विपक्षी पार्षदों की स्थिति की बात करें तो वह भी सीएमओ की तरफ ही अपनी निष्ठा साबित कर रहे हैं,वह जानते हैं कि सीएमओ अकेले भ्रष्टाचार को अंजाम दे रहा है अध्यक्ष उपाध्यक्ष केवल नाममात्र के अध्यक्ष उपाध्यक्ष रह गए हैं जिन्हें सत्ता ने शक्तिहीन कर दिया है उसके बावजूद वह सीएमओ को बचाव में नजर आते हैं,विपक्ष चुनाव की हार और नगर में सरकार नहीं बन पाने की भड़ास सीएमओ का साथ देकर निकाल रहा है,विपक्ष अपनी हार की खीज निकालने नगर में व्याप्त भ्रष्टाचार को नजर अंदाज भी करने तैयार है क्योंकि अध्यक्ष उपाध्यक्ष पद की हार उसके अहम का मामला है।
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